राष्ट्रीय

बढ़ती महंगाई में फीका हुआ त्यौहारों का उत्साह, सुई से लेकर सब कुछ महंगा

Sandeep Tiwari
14 Oct 2021 12:29 AM GMT
enthusiasm of festivals faded due to rising inflation from needle to everything is expensive
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लगातार बढ़ती महंगाई के कारण फीका पड़ रहा त्यौहारो का उत्साह।

देश में बढ़ रही महंगाई से आमजन तबाह होने की स्थिति पर पहुंच गया है। सुई से लेकर हर सामान हर दिन महंगा हो रहा है। गरीबों को भी सरकार द्वारा दिया जाने वाला मुफ्त का अनाज भी भारी पड़ने लगा है। इस महंगाई मे गरीब क्या चावल और गेहूं खाकर जीवित रह सकते हैं। आसमान छूती महंगाई मे त्यौहार का रंग भी फीका लगने लगा है।

व्यवस्था हुई डामाडोल

मजदूर वर्ग से लेकर सरकारी कर्मचारी का बजट महंगाई की वजह से डामाडोल है। डीजल पेट्रोल हर दिन महंगे हो रहे हैं। रसोई गैस में सैकड़ों रुपए की वृद्धि से रसोई की व्यवस्था डगमगा रही है। डीजल के बढ़ रहे दाम से भाड़े में वृद्धि होना स्वाभाविक है। आज बात अगर खाद्य तेल की करें तो वह दोगुनी कीमत तक पहुंच चुका है।

खाद्य पदार्थों के बढे़ दाम

महंगाई की मार डीजल पेट्रोल में ही नहीं है। डीजल के लगातार बढ़ रहे दाम का असर हमारे खाद्य पदार्थों में भी पड़ रहा है। डीजल का रेट सीधे तौर पर माल वाहक वाहनों के किराए को प्रभावित करता है। आज हालत यह है कि 5 किलो का आटा डेढ़ सौ रुपए में बिक रहा था उसकी कीमत 175 से 180 रुपए तक पहुंच चुका है।

68 का डीजल मिल रहा 102 में

बढ़ती महंगाई में डीजल दहाई अंक पार कर सैकडे तक पहुंच गया। भोपाल में मार्च 2020 की अगर बात करें तो उस समय डीजल का भाव 68.27 रुपए प्रति लीटर था। जो आज बढ़कर 102.22 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच चुका है।

गैस का बढ़ा रेट, रसोई में तड़का हुआ कम

हर दिन बढ़ रही रसोई गैस की कीमत रसोई के जायके को कम कर रहा है। अक्सर खाने में लगने वाला तड़का लोगों ने कम कर दिया है। रसोई गैस सिलेंडर के महीने में 594 रुपए में मिल रही थी वाह 9 सैकड़ा को पार कर गया है। एक अनुमान के मुताबिक 1 साल में रसोई गैस करीबन 311 रुपए तक महंगा हो चुका है।इस बढ़ती महंगाई में खाद्य तेलों की कीमत भी कुछ ज्यादा ही तेजी से बढ़ रही है। अस्सी नब्बे रुपए प्रति लीटर मिलने वाला सरसों का तेल 2 सैकड़ा के पार चल रहा है। वहीं रिफाइंड और सोयाबीन के तेल में दोगुनी वृद्धि हो चुकी है। वर्तमान समय में सब्जी के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं 20 दिन पूर्व 30 किलो बिकने वाला प्याज अब 50 से 60 तक पहुंच चुका है। टमाटर के दाम देखते ही देखते 30 से 60 रुपए तक पहुंच गए। वहीं अन्य सब्जियों के दाम भी दोगुने कीमत तक पहुंच चुके हैं।

सरकार को कोस रहे आमजन

लोगो का कहना है कि अच्छे दिनों का सपना दिखाने वाली भाजपा सरकार मुफ्त में कोरोना का टीका लगाकर महंगाई को खुली छूट दे दी है। बढ़ती महंगाई से आमजन त्रस्त है। लेकिन सरकार को आमजन की यह दुर्गति नहीं दिख रही है।

गरीबों की थाली में केवल सूखी रोटी

सरकार उचित मूल्य की दुकान से देश के गरीबों को कोरोना के समय मुफ्त में खाद्यान्न दे रही है। लेकिन नमक तेल सब्जी की बढ़ती महंगाई ने गरीब को सूखी रोटी खाने पर मजबूर कर रखा है। उज्जवला योजना के नाम पर गैस सिलेंडर तो बांट दिए गए लेकिन बढ़ती महंगाई में गैस का रेगुलेटर आन नहीं हो पा रहा है। अब सरकार यह नही देख रही है कि हमारी माताएं बहने गैस देने के बाद भी धंऐ में अपना जीवन उड़ा रही है। गांव के गरीबों ने तो गैस सिलेंडर को ले जाकर उसी ईंधन वाले कमरे में रखदिया है।

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