
ग्रेच्युटी का इंतजार कर रहे प्राइमरी शिक्षकों के परिवार को मिली बड़ी राहत, जानें क्या है UPDATE?

कई ऐसे शिक्षक के परिजन ग्रेच्युटी के इंतजार में थे जिनके अपने इस दुनिया को छोड़ कर चले गए। विभाग ने मृतक कर्मचारी शिक्षक के सभी भुगतान कर दिए लेकिन विकल्प के अभाव में ग्रेच्युटी देने से इनकार कर दिया। ऐसे में कई मामले हाई कोर्ट में पेंडिंग थे।
कई मामले जिसमें उषा रानी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वहां से मिले निर्देश के बाद ग्रेच्युटी का भुगतान किया गया। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश हाईकोर्ट में विचाराधीन मामलों के लिए संजीवनी का काम किया और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अधार बनाकर ग्रेजुएटी भुगतान के आदेश उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट भी दे दिया।
मामला कुछ इस तरह
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है। इसमें एक नियम है कि अगर कोई भी शिक्षक 62 वर्ष पर सेवानिवृत्त का विकल्प देता है तो उसे ग्रेजुएटी नहीं मिलती।
कई ऐसे शिक्षक थे जिन्होंने 60 साल पर सेवानिवृत्त का विकल्प नहीं दिया था। नियम यह है कि यदि कोई शिक्षक 60 साल पर सेवानिवृत्त का विकल्प देता है तो उसे ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता है।
कई ऐसे शिक्षक थे जिन्होंने 60 वर्ष की सेवा निवृत्ति का विकल्प नहीं दिया। उनके मृत्यु के पश्चात ग्रेजुएटी का भुगतान नहीं किया गया। शिक्षक के निधन के बाद परिजन ग्रेजुएटी के मामले को लेकर हाई कोर्ट पहुंच गए। वहां से आए मिले निर्णय के बाद कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान किया गया।
सैकड़ों शिक्षकों को मिला ग्रेविटी का भुगतान
परिषदीय शिक्षकों के निधन के कई वर्षों बाद उनके आश्रितों को ग्रेजुएटी का भुगतान करने का आदेश दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में शासन के विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी ने 10 जनवरी को प्रदेश भर के 630 मृत शिक्षकों के ग्रेजुएटी भुगतान के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है।




