
अहमदाबाद बम ब्लास्ट के आतंकियों को सज़ा से बचाने, मौलाना अरशद मदनी कोर्ट के फैसले को चुनौती देगा

Ahmadabad Serial Blast: देश के साथ सबसे बड़ी समस्या पता क्या है? यहां ऐसे लोग भी रहते हैं जो खुल्लमखुल्ला आतंकवादियों की पैरवी करते हैं। पहले कहते हैं आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता और जब कोई आतंकवादी को सज़ा होती है तो उसे न्याय दिलाने की बातें करते हैं। मौलाना अरशद मदनी को ही देख लीजिये, मौलाना साहेब को अब कोर्ट के निर्णय से तकलीफ है।
अहमदाबाद में 2008 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में 38 दोषियों को स्पेशल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई, साथ ही 11 अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे. अब इस फैसले को जमीअत उलेमा-ए-हिंद अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने चुनौती देने की बात कही है. मदनी ने कहा, "देश के नामी वकील, दोषियों को फांसी से बचाने के लिए मज़बूती से क़ानूनी लडाई लड़ेंगे. हमें यक़ीन है कि इन लोगों को हाईकोर्ट से पूरा न्याय मिलेगा."
56 लोगों के हत्यारे आतंकी को क्यों बचाना चाहता है मदनी
यह सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर कोई ऐसा क्यों चाहेगा की 56 लोगों की ज़िन्दगी छीन लेने वाले आतंकियों को फांसी से बचा लिया जाए, इसका जवाब भी शायद सभी को मालूम होगा, जो ऐसा कर रहे हैं उन्हें भी और जो ये सब होता देख रहे हैं उन्हें भी. इन आतंकवादियों ने अहमदाबाद और सूरत में 50 बम प्लांट किए थे, इनका मकसद सिर्फ बेकसूरों की जान लेना था जिहाद करना था. 29 बमों को तो पुलिस ने खोज लिया और डिफ्यूज कर दिया लेकिन 21 बम धमाकों में 56 बेक़सूर लोगों की जान चली गई और 200 लोग घायल हो गए। ऐसा करने वाले आतंकवादियों को भी कुछ ऐसे नेता है जो बचाना चाहते हैं.
कौन है मौलाना अरशद मदनी
मौलान सैय्यद अरशद मदनी इसका पूरा नाम है, यह आदमी जमीयत उलेमा-ए-हिन्द का अध्यक्ष है। बचपन से लेकर अपने बुढ़ापे तक इसने सिर्फ इस्लामिक ज्ञान लिया है, जब यह 6 साल का था तो पूरी कुरान याद कर लिहिस रहा. कहा जाता है कि भारत में धर्मनिरपेक्षता की वकालत करते थे, इसका यह भी मानना है कि मोदी भारत के सभी मुसलमानों के लिए स्वीकार्य नहीं है। गुजरात दंगों के लिए पीएम मोदी को दोषी मानते हैं तो दंगों के बाद 56 लोगों को मारने वाले आतंकवादियों की पैरवी करते हैं. इनका धर्मनिरपेक्ष रवैया तो समझ से परे है.




