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5 June 2023 World Environment Day Speech, Theme, Significance: जानें विश्व पर्यावरण दिवस से जुडी महत्वपूर्ण बातें

5 June 2023 World Environment Day Speech, Theme, Significance: जानें विश्व पर्यावरण दिवस से जुडी महत्वपूर्ण बातें
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5 June 2023 World Environment Day Speech, Theme, Significance In Hindi: मनुष्य, पशु या पेड़- पौधे जिन परिस्थितियों में रहते हैं वह वातावरण या पर्यावरण कहलाता है। प्रतिवर्ष 5 जून को मानव जाति के कल्याण के लिए विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।

5 June 2023 World Environment Day Speech, Theme, Significance In Hindi: मनुष्य, पशु या पेड़- पौधे जिन परिस्थितियों में रहते हैं वह वातावरण या पर्यावरण कहलाता है। प्रतिवर्ष 5 जून को मानव जाति के कल्याण के लिए विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों में स्वस्थ पर्यावरण के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना है।

World Environment Day Theme For Year 2023

वर्ष 2023 की विश्व पर्यावरण दिवस की थीम है - ‘‘बीट प्लास्टिक प्रदूषण’’। आज हमारी सर्वाधिक चुनौती है प्लास्टिक का कम से कम उपयोग हो। जबकि घर के अन्दर व बाहर हम सब बहुतायत में प्लास्टिक का उपयोग कर रहे हैं। विश्व में 40 करोड़ टन प्लास्टिक का उत्पादन प्रतिवर्ष होता है। जिसमें आधा प्लास्टिक सिंगल यूज में उपयोग होता है। यदि हम सब ठान लें कि बाजार से सब्जी लाने के लिए घर से थैला लेकर जायेगें और इसी तर्ज पर प्लास्टिक से बनी हुई वस्तुआंे का उपयोग बन्द कर दें तो विश्व में प्राणी जगत राहत की सांस लेगा।

World Environment Day Theme Significance

शहरों में नाली जाम होने का बड़ा कारण भी प्लास्टिक की पन्नियाँ हैं। हर भारतीय को गौ-माता की रक्षा के लिए योगदान होता है। किन्तु खेतों व सड़को में पड़ी पन्नी के सेवन से हजारों पशुओं की मौत हो जाती है। शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का दायित्व जिला प्रशासन, नगर पालिक निगम, त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं, एनजीओ तथा समाज सेवी संस्थाओं का होता है। प्लास्टिक मुक्त अभियान को देश में स्वच्छता मिशन व ओडीएफ की तर्ज में चलाना होगा। अन्यथा कई शासकीय योजनाओं की तरह प्लास्टिक मुक्त अभियान भी विफल होजायेगा।

विश्व में बढ़ती हुई शहरीकरण व्यवस्था चिन्ता का विषय है। केन्द्र शासन व राज्य सरकारों को गॉवों को स्वास्थ्य, शिक्षा व रोजगार तथा अन्य मूलभूत आवश्यकताओं से परिपूर्ण करना होगा। 21वीं सदी के दो दशक बीत चुके हैं। पिछले पाँच दशकों में मानव जीवन के रहन-सहन में बहुत बदलाव हुये हैं।

इन बदलावों एकल परिवार, शहरीकरण, पेड़ों की कटाई, पौध रोपण में अरूचि, स्कूली बच्चों में नैतिक शिक्षा बन्द करना, स्कूल में बागवानी कक्षाओं का बन्द होना, औद्योगीकरण, खेलकूद व व्यायाम में अरूचि, नशे का सेवन करने वाले व्यक्तियों की संख्या में भारी वृद्धि, शहरों व गाँवों में कंक्रीट सड़को का जाल बनना,फसलों के अवशेष में आग लगाना आदि शामिल हैं। केवल 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाने से हमारा जीवन सुरक्षित नहीं होगा। आवश्यक है कि देश का हर नागरिक हर दिन अपनी आदतों में सुधारात्मक परिवर्तन लाये।

पर्यावरण की सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि हम सब मिलकर वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण कम करने का प्रयास करें। हमें अपने दैनिक दिनचर्या में बदलाव के लिए सतत प्रयास करना होगा। आम जन मानस को चाहिये कि वह पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए अधिक से अधिक पेड़-पौधें लगायें, ऊर्जा बचायें, पानी बचायें, स्वस्थ जीवनचर्या अपनायें, कूड़ा-कचरा कम करें व सतत खाद्य प्रणाली में ध्यान दें।

नेशनल हाइवे में काटे गये वृक्षों को समय सीमा में वृक्षारोपण करायें। आवश्यकता होने पर ही चार पहिया वाहन/मोटर साइकल का प्रयोग करें। दीपावली व होली के त्योहारों में पर्यावरण को द्वष्टिगत रखते हुये राष्ट्रीय नीति बने। विश्व में बढ़ रहे डीजल-पेट्रोल वाहनों को सौर ऊर्जा से चलाने हेतु रिसर्च की आवश्यकता है।

शासन को इस कार्य के लिए मेधावी वैज्ञानिको को उच्चतम वेतनमान पर खोज करना होगा। किसानो को पशुपालन व जैविक खेती के क्षेत्र मे आगे आना चाहिये। स्वास्थ्य के क्षेत्र में संचारी रोगों पर नियंत्रण व तेजी से बढ़ रही असंचारी बीमारियां दमा, ब्लड प्रेसर, डायबिटीज, कैसर, ह्मदय रोग, लकवा व थायराइड बीमारियों के नियंत्रण के लिए पूर्व की भांति मोटा अनाज जौ, बाजरा, मक्का, कोदौ, चना, आदि के उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिये। इससे कम पानी में खेती होगी। साथ ही इन बीमारियों व जटिलताओ पर नियंत्रण भी होगा।

दुनिया भर में करोड़ों लोगों की जान वायु प्रदूषण से होती है। वायु प्रदूषण के कारण हरवर्ष अनुमानित 50 लाख करोड़ रुपए का नुकसान भारत को होता है। आइये हम सब मिलकर भारत मे पर्यावरण दिवस को न केवल 5 जून बल्कि सप्ताह के ७ दिन, माह के 30 दिन व वर्ष के 365 दिन पर्यावरण दिवस मनायें। अपने शरीर, अपनें घर, अपनें गॉव, अपनें जिला, प्रदेश व देश को स्वच्छ, स्वस्थ व विकसित बनाने में अपना योगदान दें।

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