
देशद्रोह के मामले में पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा, लाहौर की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला

इस्लामाबाद। पेशावर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वकार अहमद सेठ की अध्यक्षता में विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाई। पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार हुआ है जब किसी पूर्व सैन्य प्रमुख के खिलाफ कोर्ट ने इतना बड़ा फैसला दिया हो। वर्तमान में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ दुबई में रह रहे हैं। बताते चलें कि तीन नवंबर 2007 को देश में आपातकाल लगाने और दिसंबर में संविधान को निलंबित करने के मामले में पूर्व सैन्य तानाशाह के खिलाफ नवाज शरीफ सरकार ने राजद्रोह का मुकदमा दिसंबर 2013 में दर्ज कराया था।
28 नवंबर को फैसला सुनाने से रोका गया था इससे पहले इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने विशेष अदालत को 28 नवंबर को फैसला सुनाने से रोक दिया था। विशेष अदालत ने 76 वर्षीय मुशर्रफ को देशद्रोह मामले में पांच दिसंबर को बयान दर्ज कराने के लिए कहा था। उसके बाद दुबई में रह रहे मुशर्रफ ने वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि वह काफी बीमार हैं और देश आकर बयान नहीं दर्ज कर सकते। इसके बाद तय किया गया था कि मुशर्रफ के खिलाफ 17 दिसंबर को फैसला सुनाया जाएगा।
विशेष अदालत में जस्टिस सेठ, सिंध हाईकोर्ट (SHC) के जस्टिस नजर अकबर और लाहौर हाई कोर्ट (LHC) के जस्टिस शाहिद करीम शामिल थे। तीनों जजों ने घोषणा की थी कि वह मंगलवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाएंगे। हालांकि, सरकारी अभियोजक एडवोकेट अली जिया बाजवा ने कहा कि उन्होंने आज तीन याचिकाएं प्रस्तुत की हैं।
याचिकाओं में से एक में कहा गया है कि अदालत ने तीन व्यक्तियों पूर्व प्रधानमंत्री शौकत अजीज, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अब्दुल हमीद डोगर और पूर्व कानून मंत्री जाहिद हामिद को मामले में संदिग्ध बनाया है। अभियोजक ने कहा कि हम मुशर्रफ के सहयोगियों और साथियों को भी संदिग्ध बनाना चाहते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि सभी संदिग्धों की सुनवाई एक ही समय में हो।
न्यायमूर्ति करीम ने कहा कि साढ़े तीन साल के बाद इस तरह का अनुरोध प्रस्तुत करने का मतलब है कि सरकार के इरादे सही नहीं हैं। आज मामला अंतिम बहस के लिए निर्धारित किया गया था और अब नई याचिकाएं पेश की गई हैं।
मुशर्रफ ने लगाई थी याचिका बताते चलें कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने लाहौर हाईकोर्ट (एलएचसी) में एक याचिका दायर कर इस्लामाबाद की एक विशेष अदालत के समक्ष मुकदमे की लंबित कार्यवाही पर रोक लगाने का आग्रह किया था। याचिका में, मुशर्रफ ने एक विशेष अदालत के गठन को चुनौती दी थी, जिसमें देशद्रोह और गैर कानूनी काम के आरोपों के तहत उनपर मुकदमा दायर किया गया था।
दुबई में इलाज करा रहे हैं मुशर्रफ बताते चलें कि मुशर्रफ को 31 मार्च 2014 को दोषी ठहराया गया था और अभियोजन पक्ष ने उसी साल सितंबर में विशेष अदालत के समक्ष पूरे सबूत पेश किए थे। हालांकि, अपीलीय मंचों पर मुकदमेबाजी के कारण पूर्व सैन्य तानाशाह का मुकदमा लटक गया था और वह मार्च 2016 में पाकिस्तान छोड़कर विदेश चले गए थे। बताते चलें कि दुबई में रह रहे मुशर्रफ दुर्लभ बीमारी अमिलॉइडोसिस से पीड़ित हैं। इस बामीरी में प्रोटीन शरीर के अंगों में जमा होने लगता है। वह दुबई एक अस्पताल में इसका इलाज करवा रहे हैं।




