
खुशखबरीः मध्यम वर्ग के लिए केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान

भोपाल. केंद्रीय बजट में आयकर में छूट की सीमा 2.50 लाख से 5 लाख करने की जो राहत दी है, उससे करदाता खुश हो रहे हों, लेकिन सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। यदि आपकी आमदनी 2.50 लाख रुपए से अधिक है तो आपको पुराने नियमों के तहत ही रिटर्न फाइल करना होगा। फिर क्यूं न आमदनी पर टैक्स जीरो हो। बजट में की गई घोषणानुसार इनकम टैक्स में छूट के तहत 5 लाख रुपए तक की सालाना आय वालों को कोई टैक्स नहीं देना होगा।
5 लाख रुपए सालाना आमदनी होने पर कोई टैक्स नहीं
केन्द्र सरकार ने एक फरवरी को पेश किए अंतरिम बजट में आयकर 5 लाख रुपए तक आमदनी वाले करदाताओं को उनकी देय टैक्स में छूट प्रदान की है। 5 लाख रुपए सालाना आमदनी होने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इस आमदनी को देय आयकर से पूर्णत: मुक्त किया है, लेकिन रिटर्न में इसे दिखाना होगा। नई छूट के हिसाब से करदाता को इस आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।
आयकर अधिनियम की धारा 87ए के तहत जो छूट पूर्व में 2500 रुपए थी, उसे बढ़ाकर 12,500 रुपए कर दिया गया है। ये छूट पूर्व में ऐसे लोगों को मिल रही थी, जिनकी आमदनी 3.50 लाख से कम थी (2.50 लाख से ऊपर) इस पर 5000 रु. टैक्स बन रहा था, इसमें 2500 रु. की छूट दी जाती थी। अब 5 लाख रुपए आमदनी पर 2500 को बढ़ाकर 12,500 रुपए कर दिया है। यानी सामान्य करदाता को 12,500 रुपए का फायदा मिलेगा।
आमदनी का स्लैब - आमदनी टैक्स अब बचत होगी
2.50 से 5 लाख रु. तक 05% आय का 5 प्रतिशत या अधिकतम क्र12,500 5 से 10 लाख रुपए तक 20% 2080 रुपए 10 लाख से 50 लाख 30% 3120 रुपए
10.55 लाख पर भी ले सकते हैं राहत
टैक्स एक्सपर्ट के मुताबिक यदि आपकी सालाना आमदनी 10.55 लाख रुपए है तो भी आप टैक्स देने से बच सकते हैं। इसके लिए सरकार की तरफ से दी जाने वाली अलग-अलग स्कीमों में निवेश करके लाभ उठाना होगा। कोई भी करदाता 2 लाख रुपए का होम लोन ब्याज, 1.5 लाख रुपए सेक्शन 80सी का लाभ, 50 हजार रुपए एनपीएस और 25 हजार रुपए मेडिक्लेम, 50 हजार रुपए के शिक्षा ऋण का ब्याज, 50 हजार स्टेंडर्ड डिडक्शन (वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए) और 30 हजार रुपए का अभिभावक का मेडिक्लेम का लाभ उठाया जा सकता है।
वित्त मंत्री ने मिडिल क्लास आयकरदाताओं को 5 लाख रुपए तक की जो छूट दी है, उससे 12,500 रुपए का फायदा मिलेगा। लेकिन 2.50 लाख रुपए से ऊपर आमदनी वालों को रिटर्न फाइल करना होगा। भले ही उसकी टैक्स सीमा जीरो हो।
- राजेश कुमार जैन, वरिष्ठ चार्टर्ड एकाउंटेंट




