
अमित शाह के बाद अब मप्र का यह दिग्गज नेता बन सकता है भाजपा का नया अध्यक्ष...

इंदौर. अमित शाह के गृहमंत्री बनने के बाद राजनीतिक गलियारों में नए भाजपा अध्यक्ष को लेकर सरगर्मी शुरू हो गई है। दावेदारों की फेहरिस्त में राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी शामिल है। शाह के खास होने के साथ हरियाणा व बंगाल में अच्छे प्रदर्शन की वजह से उनकी लॉटरी भी खुल सकती है। हालांकि उनसे आगे जेपी नड्डा चल रहे हैं, जो मोदी-शाह के साथ संघ के भी चहेते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सबसे विश्वस्त व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सरकार में गृहमंत्री बना दिया। एक बार फिर दोनों की जोड़ी केंद्र सरकार में नजर आएगी। शाह के मंत्री बनने के बाद संघ व पार्टी हलकों में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश शुरू हो गई है। तीन नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जिसमें जेपी नड्डा, भूपेंद्रसिंह यादव के अलावा कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी है। भाजपा संसदीय बोर्ड के सचिव होने के साथ नड्डा की पकड़ संघ मुख्यालय नागपुर में भी खासी है। इसके अलावा उन्हें मंत्री भी नहीं बनाया गया, जिसकी वजह से संभावनाओं को मजबूत माना जा रहा है।
विजयवर्गीय की खुल सकती है लॉटरी
इधर, विजयवर्गीय की भी लॉटरी खुल सकती है। शाह के कहने पर राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने पर विजयवर्गीय ने भी मंत्री पद को छोड़ दिया था। बाद में उन्हें हरियाणा में विधानसभा का चुनाव प्रभारी बनाया गया, जहां पार्टी को जोरदार सफलता हाथ लगी थी। इसके बाद उन्हें पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान प्रभारी बनाकर भेजा गया। हालांकि उस समय पार्टी को सफलता नहीं मिली, लेकिन लोकसभा चुनाव में धमाकेदार एंट्री की। 18 सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कराई। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी के खिलाफ खासा माहौल भी बना हुआ है। इस सफलता के बाद विजयवर्गीय का ग्राफ राष्ट्रीय राजनीति में तेजी से बढ़ा। इन परिणामों के साथ शाह की नजदीकियों की वजह से उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी के करीब माना जा रहा है।
संघ में ढीली हुई पकड़
गौरतलब है कि विजयवर्गीय की पकड़ संघ में थोड़ी कमजोर हो गई है। उनके ताल्लुक संघ के दिग्गज सुरेश सोनी से खासे मजबूत हैं। सोनी पूर्व में भाजपा देखते थे, जिस वजह से कई बार मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदारों में उनका नाम रहा। हालांकि पिछले कुछ समय से सोनी लूपलाइन में हैं, जिसकी वजह से संघ का सीधा वरदहस्त विजयवर्गीय पर नहीं है। इस कमजोरी की वजह से वे दौड़ में पिछड़ रहें हैं।




