मध्यप्रदेश

Rewa News: महल जैसे इमारत में रुकने का चार्ज जानकर हैरान हो जाएंगे आप, आइए लें पूरी जानकारी

Rewa News: महल जैसे इमारत में रुकने का चार्ज जानकर हैरान हो जाएंगे आप, आइए लें पूरी जानकारी
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Rewa News: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक आलीशान महल जैसी इमारत है जहां लोगों को ठहरने का अवसर मिलता है। वहां ठहरने का किराया लगता है लेकिन उसकी कीमत इतनी कम है कि आप जानकर ही दंग रह जाएंगे।

महल का नाम सुनते ही व्यक्ति के दिलों दिमाग पर एक भव्य इमारत की छटा घूमने लगती है। म्यूजियम में तब्दील देश के कई किलों को आपने नजदीक जाकर देख देखा होगा। लेकिन इस भव्य महल में रूकने अनुभव आम लोगों ने नहीं किया होगा। क्योंकि इस महल जैसे होटलों में रूकने का चार्ज काफी ज्यादा होता है जो आम लोगां के पहुंच से कहीं ज्यादा है। लेकिन मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक आलीशान महल जैसी इमारत है जहां लोगों को ठहरने का अवसर मिलता है। वहां ठहरने का किराया लगता है लेकिन उसकी कीमत इतनी कम है की आप जानकर ही दंग रह जाएंगे। ऐसा हमारी बातों में विश्वास नहीं होगा लेकिन यह बात सौ फ़ीसदी सत्य है। आइए के बारे में जानकारी एकत्र करें।

कहां है यह भवन

अगर आप आलीशान इमारत में ठहरना चाहते हैं और जेब में ज्यादा पैसे नहीं है तो आप रीवा में स्थित इस आलीशान महल में मात्र 60 रुपए में 24 घंटे ठहर सकते हैं। यह इमारत रीवा शहर के बीचो-बीच स्थित पुराने बस स्टैंड के बिल्कुल पास स्थित है। जो हवेली की तरह है बाहर से महल की तरह दिखाई पड़ता हैं। इस भवन को बैजू धर्मशाला का नाम दिया गया है। बताया गया है कि भवन का निर्माण सेठ बैजनाथ द्वारा 1940-41 के बीच करवाया गया था। शायद इसी वजह से इस इमारत का नाम सेठ बैजनाथ के नाम पर बैजू धर्मशाला रखा गया।

खूबसूरती जो लगाती है चार चांद

महल की खूबसूरती का वर्णन शब्दों में पूरी तरह से नहीं किया जा सकता। यहां एक से बढ़कर एक इमारत है। इसमें राजसी ठाठ बाट के साथ ही भवन की नक्काशी देखकर दिल खुश हो जाता है। यहां ठहरने पर आप अपने आप को किसी हेरिटेज होटल की तरह महसूस करेंगे।

बहुत कम है किराया

बैजू धर्मशाला बनवाने का उद्देश्य दूरदराज से आने वाले लोगों को कम पैसे में ठहरने का उत्तम प्रबंध देना था। तब से लेकर आज तक बैजू धर्मशाला अपने उद्देश्य को पूरा कर रहा है। 30 कमरों वाले इस आलीशान भवन में मात्र 60 रुपए के किराए पर सोने के लिए पलंग, एक गद्दा और एक चद्दर प्राप्त होता है। वही ठंड के समय कंबल दिया जाता है। गर्मी के समय पंखे आदि की भी व्यवस्था होती है।

ठहरने वाले व्यक्ति को अपना परिचय पत्र देना होता है। यह बात जरूर है कि कमरा खाली रहने पर जरूरतमंदों को दिया जाता है। कई बार ऐसा भी होता है कि अगर जिले में बड़ा आयोजन चल रहा है तो कमरे खाली नहीं रहते। फिर भी प्रबंधन इसका पूरा इंतजाम कर रहा है।

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