मध्यप्रदेश

तो ठप हो जाएंगे थर्मल पावर प्लांट, ख़त्म हो रहा कोयले का स्टॉक

Abhijeet Mishra
10 Oct 2021 7:15 AM GMT
तो ठप हो जाएंगे थर्मल पावर प्लांट, ख़त्म हो रहा कोयले का स्टॉक
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शिवराज सिंह चौहान ने कहा किसानों को मिले पर्याप्त बिजली

देश की राजधानी दिल्ली में बिजली संकट सामने आ रहा है भारत के एक सैंकड़ा से अधिक थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की कमी ने आफत मचा दी है। दूसरी ओर मध्यप्रदेश में भी कोयले का संकट गहराता जा रहा है, कई प्लांट्स में कोयले का स्टॉक सिर्फ 3 से 4 दिन का ही बचा है। खपत ज़्यादा है और सप्लाई आधी हो रही है, ऐसे में प्रदेश के भीतर भी इलेक्ट्रिसिटी क्राइसिस होने की आशंका बढ़ गई है।

शिवराज सिंह ने बैठक ली

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिजली संकट और कोयले की कमी को देखते हुए शनिवार को अधिकारीयों के साथ बैठक ली और ज़रूरी दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए दस घंटे बिजली आवश्यक रूप से उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश मेंकिफायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

यहाँ सिर्फ 4 दिन का कोयला बचा

मध्यप्रदेश के शहडोल संभाग में आने वाले बीरसिंहपुर पाली में 210 मेगा वाट के 4 प्लांट में से 2 पहले से ही बंद चल रहे हैं जहाँ सिर्फ 90 हज़ार मेट्रिक टन कोयला स्टॉक में बचा है जबकि प्रतीतिन यहाँ 20 मेट्रिक टन कोयले की खपत होती है। ऐसे में यहाँ सिर्फ 4 से 5 दिन का स्टॉक बाकी है। सप्लाई की बात करें तो खपत से आधी मात्रा में कोयला सप्लाई हो रहा है। कुछ दिन बाद भी यही हालात रहे तो पाली थर्मल पावर प्लांट में बजली का प्रोडक्शन रुक जाएगा। बता दें की देस में 70% बिजली कोयले से बनती है।

सौर ऊर्जा पर जोर

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि सौर ऊर्जा भविष्य का ऊर्जा स्त्रोत है। अतः सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में कोई कसर नहीं छोड़ी जाए। जरूरी है कि एक-दो मेगावॉट तक के प्लांट स्थापित करने और ऐसी परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए आवश्यक नीति बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश मंत्रालय में आयोजित रबी फसल के लिए बिजली आपूर्ति संबंधी ऊर्जा विभाग की बैठक में दिए। सीएम ने कहा है कि बिजली उत्पादन में कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाना आवश्यक है। राजस्व बढ़ाने पर भी उन्होने जोर दिया हैं। बैठक में ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस , प्रमुख सचिव ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के अधिकारी संजय दुबे तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

अभी क्या करना है मामा

शिवराज सिंह चौहान ने ये तो कह दिया की भविष्य में बिजली कोयले से नहीं सौर्य ऊर्जा से तैयार होनी है। जे बात एक दम सच है लेकिन भविष्य के साथ वर्तमान की परिस्थितियों पर काबू कैसे पाया जाए। जिस हिसाब से एमपी में कोयले की कमी देखने को मिल रही है ऐसे में तो यहाँ बिजली का संकट सामने आना ही है। शहरों में अधोषित कटौतियां हो रही है लोग इसे बिजली और कोयले के संकट से जोड़ कर देखने लगे है। ऐसा तो नहीं है की मध्यप्रदेश की धरती से कोयला अचानक ख़त्म हो गया हो ? शहडोल में ऐशिया का सबसे बड़े कोयला उत्सर्जन प्लांट है दिक्क्त की बात ये है की सरकार से सही वक़्त में कोयला का भुगतान कंपनियों को नहीं किया जिसके चलते सप्लाई कम कर दी गई वहीँ प्राकृतिक कारणों के चलते कोयले के उत्सर्जन में भी कमी आई है.

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