मध्यप्रदेश

MP School Reopen: 50% उपस्थिति के साथ आज से खुलें पहली से 5वीं कक्षा तक के स्कूल, पेरेंट्स की अनुमति अनिवार्य

Aaryan Puneet Dwivedi
20 Sep 2021 2:45 AM GMT
MP School Reopen: 50% उपस्थिति के साथ आज से खुलें पहली से 5वीं कक्षा तक के स्कूल, पेरेंट्स की अनुमति अनिवार्य
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MP School Reopen

मध्यप्रदेश में पहली से पांचवी कक्षा तक के स्कूलों को खोलने की अनुमति दे दी गई है. 50 फीसदी क्षमता के साथ ये स्कूल 20 सितंबर से खोले जा सकेंगे.

MP School Reopen: मध्यप्रदेश में पहली से पांचवी कक्षा (1st to 5th Class) तक के सभी स्कूलों के खोलने के आदेश जारी कर दिए गए है. ये सभी स्कूलें 50 फीसदी छात्र उपस्थिति के साथ आज 20 सितंबर से खोले गए हैं. गत मंगलवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्कूलों को खेले जाने का निर्णय लिया गया था. इसके बाद प्रदेश भर के स्कूलों को आज यानी सोमवार, 20 सितंबर से खोल दिया गया है.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (MP CM Shivraj Singh Chouhan) की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि, पहली कक्षा से पांचवी कक्षा तक की सभी स्कूलों को 50% तक छात्र क्षमता के साथ खोला जा सकेगा. स्कूल आने के लिए छात्र-छात्राओं के अभिभावकों की अनुमति लिखित रूप से लेनी अनिवार्य होगी. सभी स्कूलों 20 सितंबर से शुरू हो जाएंगी.

आवासीय स्कूल 100% क्षमता के साथ खोले जा सकेंगे

इसके साथ ही 8वीं, 10वीं, 12वीं आवासीय विद्यालय (Residential school) 100 फीसदी विद्यार्थियों की उपस्थिति की स्वीकृति दी गयी है. वहीं 11वीं के छात्रों के लिए भी हॉस्टल सुविधा रहेगी, लेकिन सिर्फ 50% को ही अनुमति दी जाएगी.

मध्यप्रदेश में पहले दो चरणों में खोले गए स्कूल

पहला चरण:

मध्य प्रदेश में 26 जुलाई से स्कूल में छात्रों के लिए क्लास खोले गए थे. सबसे पहले 11वीं और 12वीं की क्लास शुरू हुईं. क्लास में 50% से ज्यादा बच्चे मौजूद नहीं होने की पाबंदी थी. बच्चों के बैठने की जहां समुचित व्यवस्था नहीं है, वहां सप्ताह में एक दिन छोटे-छोटे ग्रुप में क्लास लगाई जाने का निर्देश दिए गए थे. बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों की अनुमति जरूरी.

दूसरा चरण:

इसके बाद मध्यप्रदेश में 1 सितंबर से 6वीं से 12वीं तक की सभी क्लासेस रोजाना (रविवार को छोड़कर) का निर्णय लिया था. क्लास में 50% बच्चे उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे. यह निर्णय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया था.

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