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Rajgarh Collector Action 2026: सचिव निलंबित, सहायक बर्खास्त; मचा हड़कंप

विषय सूची (Table of Contents)
- Rajgarh Collector Action 2026: भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सर्जिकल स्ट्राइक
- संवाद से समाधान: कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा की नई पहल
- नाटाराम पंचायत मामला: सचिव निलंबित और रोजगार सहायक की सेवा समाप्त
- समग्र आईडी ट्रांसफर में देरी: सामाजिक सुरक्षा अधिकारी और सीईओ को नोटिस
- सारंगपुर सड़क निर्माण: पूर्व सरपंच को धारा 92 के तहत चेतावनी
- डेटा एंट्री ऑपरेटर पर गिरी गाज: वेतन कटौती के निर्देश
- प्रशासनिक संदेश: काम में कोताही अब बर्दाश्त नहीं
- निष्कर्ष: जनता की शिकायतों पर तत्काल न्याय का नया दौर
- FAQs: राजगढ़ कलेक्टर कार्रवाई और प्रशासनिक नियमों से जुड़े सवाल
Rajgarh Collector Action 2026: भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सर्जिकल स्ट्राइक
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में प्रशासनिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने जनसुनवाई के दौरान लापरवाह अधिकारियों की क्लास लगा दी। साल 2026 में प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाने के उद्देश्य से 'संवाद से समाधान' कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस कार्यक्रम के पहले ही दिन कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया कि जनता की फाइल को लटकाने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं है। एक ही दिन में निलंबन, बर्खास्तगी और नोटिस की बौछार ने यह साबित कर दिया है कि राजगढ़ प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में है।
संवाद से समाधान: कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा की नई पहल
मंगलवार को आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में कलेक्टर ने पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की पांच प्रमुख और गंभीर शिकायतों को चुना। कलेक्टर मिश्रा का विजन है कि शिकायतों का केवल दस्तावेजी निराकरण न हो, बल्कि मौके पर जाकर समाधान किया जाए। इसी दौरान जब उन्होंने पुराने मामलों की फाइलें खोली, तो सरकारी मशीनरी की सुस्ती और लापरवाही उजागर हो गई।
नाटाराम पंचायत मामला: सचिव निलंबित और रोजगार सहायक की सेवा समाप्त
सबसे गंभीर मामला ग्राम पंचायत नाटाराम से सामने आया। यहाँ शिकायतकर्ता दांगी ने दो साल पहले अपने खेत पर हुए अवैध अतिक्रमण की शिकायत की थी। ताज्जुब की बात यह है कि दो साल बीत जाने के बाद भी पंचायत स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसे घोर लापरवाही मानते हुए कलेक्टर ने पंचायत सचिव राधेश्याम दांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया। वहीं, ग्राम रोजगार सहायक (GRS) रामबाबू दांगी की कार्यशैली और अनुशासनहीनता को देखते हुए उनकी सेवाएं तत्काल समाप्त (Terminated) करने के आदेश जारी कर दिए गए।
समग्र आईडी ट्रांसफर में देरी: सामाजिक सुरक्षा अधिकारी और सीईओ को नोटिस
प्रशासनिक लापरवाही का दूसरा बड़ा नमूना समग्र आईडी ट्रांसफर के मामले में दिखा। आवेदक बनवारी सौंधिया लंबे समय से अपनी आईडी ग्राम कोलूखेड़ा से मांडाखेड़ा खिलचीपुर ट्रांसफर कराने के लिए भटक रहे थे। डिजिटल युग में भी एक आईडी ट्रांसफर न होना सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। कलेक्टर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सामाजिक सुरक्षा अधिकारी राजगढ़ को निलंबन का नोटिस थमा दिया। इसके साथ ही, जनपद राजगढ़ और खिलचीपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) को भी 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया गया है।
सारंगपुर सड़क निर्माण: पूर्व सरपंच को धारा 92 के तहत चेतावनी
विकास कार्यों में बाधा डालने वालों को भी कलेक्टर ने नहीं बख्शा। सारंगपुर में सीसी सड़क निर्माण कार्य अधूरा छोड़ने या न करने पर तत्कालीन पूर्व सरपंच के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। कलेक्टर ने उनके खिलाफ पंचायती राज अधिनियम की धारा 92 के तहत नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अल्टीमेटम दिया गया है कि अगले 15 दिनों के भीतर सड़क निर्माण का कार्य पूरा होना चाहिए, अन्यथा वसूली और जेल की कार्रवाई भी की जा सकती है।
डेटा एंट्री ऑपरेटर पर गिरी गाज: वेतन कटौती के निर्देश
सिस्टम की सुस्ती के लिए केवल उच्चाधिकारी ही नहीं, बल्कि निचले स्तर के कर्मचारी भी जिम्मेदार पाए गए। सरकारी पोर्टल पर एंट्री में देरी और काम को टालने की प्रवृत्ति के कारण डेटा एंट्री ऑपरेटर का वेतन काटने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई उन सभी कर्मचारियों के लिए चेतावनी है जो अपनी कुर्सी का उपयोग जनकल्याण के बजाय देरी करने के लिए करते हैं।
प्रशासनिक संदेश: काम में कोताही अब बर्दाश्त नहीं
कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा की इस कार्रवाई से पूरे जिले के विभागों में सन्नाटा पसरा है। यह संदेश साफ है कि 2026 का प्रशासन 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर चलेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों का पालन करते हुए जिला प्रशासन अब आम जनता को बिचौलियों और लापरवाह बाबूओं से मुक्ति दिलाने की कोशिश कर रहा है।
निष्कर्ष: जनता की शिकायतों पर तत्काल न्याय का नया दौर
राजगढ़ में हुई यह बड़ी कार्रवाई केवल एक दिन का गुस्सा नहीं, बल्कि सिस्टम सुधारने की एक लंबी प्रक्रिया की शुरुआत है। जब बड़े अधिकारियों पर गाज गिरती है, तभी निचले स्तर पर सुधार नजर आता है। 'संवाद से समाधान' जैसे कार्यक्रमों से आम आदमी का भरोसा सरकार और प्रशासन पर दोबारा लौट रहा है। आशा है कि आने वाले समय में राजगढ़ के अन्य विभागों में भी इसी तरह की जवाबदेही तय की जाएगी।




