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लाड़ली बहना योजना की 32वीं किश्त जारी: माखन नगर से सीएम यादव ने किया ₹1836 करोड़ का DBT, ढाई साल में 5.70 लाख बहनों के नाम कटे

- लाड़ली बहना योजना में ढाई साल में 5.70 लाख महिलाओं के नाम कटे
- अब पात्र महिलाओं की संख्या घटकर 1.25 करोड़ रह गई
- आज 32वीं किस्त में ₹1836 करोड़ ट्रांसफर किए गए
- नवंबर 2025 से राशि बढ़कर ₹1500 प्रति माह हुई
मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना एक ओर महिलाओं के लिए आर्थिक संबल का प्रतीक बनी हुई है, तो दूसरी ओर इसके आंकड़े कई सवाल भी खड़े कर रहे हैं। बीते ढाई साल में इस योजना से 5 लाख 70 हजार से अधिक महिलाओं के नाम बाहर हो चुके हैं। अब इस योजना में पात्र महिलाओं की संख्या घटकर 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार रह गई है। यह गिरावट ऐसे समय सामने आई है, जब आज राज्य सरकार ₹1500 प्रति महिला के मान से कुल ₹1836 करोड़ की राशि सीधे महिलाओं के खातों में ट्रांसफर किए है।
Ladli Behna Yojana – आज ट्रांसफर हुई 32वीं किस्त
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को नर्मदापुरम जिले के माखन नगर (बाबई) में आयोजित लाड़ली बहना योजना के राज्य स्तरीय सम्मेलन के दौरान प्रदेश की लाड़ली बहनों के खातों में योजना की 32वीं किश्त का अंतरण कर दिया। इस अवसर पर 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार से अधिक पात्र बहनों के बैंक खातों में ₹1836 करोड़ से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे भेजी गई।
लाड़ली बहना योजना: अब तक की प्रगति
- • पहले मिलते थे: ₹1250 प्रति माह
- • नवंबर 2025 से बढ़ोतरी: ₹250
- • अब हर माह मिलते हैं: ₹1500
- • दिसंबर में दूसरी किस्त जारी की गई
- • 1.26 करोड़ से अधिक बहनों को राशि ट्रांसफर
- • कुल ट्रांसफर राशि (हालिया): ₹1857 करोड़
- • अब तक कुल वितरित राशि: ₹48,632 करोड़
सूची से नाम कम होने के मुख्य कारण
🔴 आयु सीमा: महिला की उम्र 60 वर्ष पूर्ण होने पर।
🔴 मृत्यु: लाभार्थी की मृत्यु होने पर हर माह डेटा अपडेट होता है।
🔴 स्वैच्छिक त्याग: लाभ छोड़ने की लिखित सूचना देने पर नाम हटाया जाता है।
🔴 अपवर्जन: विभाग की अन्य शर्तों के आधार पर प्रतिवर्ष समीक्षा।
शुरुआत में इस योजना के तहत महिलाओं को ₹1250 प्रतिमाह दिए जाते थे। लेकिन नवंबर 2025 से सरकार ने इसमें ₹250 की बढ़ोतरी करते हुए राशि को ₹1500 कर दिया। इस फैसले के बाद राज्य सरकार पर हर महीने 300 करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार बढ़ गया है। अक्टूबर 2025 तक जहां एक साथ लगभग ₹1500 करोड़ ट्रांसफर होते थे, वहीं दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा ₹1850 करोड़ के पार पहुंच गया।
Why Names Are Being Cut – नए नाम नहीं जुड़ रहे, पुराने बाहर हो रहे
सबसे बड़ा सवाल यही है कि लाड़ली बहना योजना में लाभार्थियों की संख्या लगातार क्यों घट रही है? सरकार की नीति के अनुसार, इस योजना में फिलहाल नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं। इसके उलट, उम्र सीमा पूरी होने, पात्रता की शर्तों में बदलाव और दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर महिलाओं के नाम लगातार काटे जा रहे हैं। यही कारण है कि 2023, 2024 और 2025 – तीनों वर्षों में लाभार्थियों की संख्या बढ़ने की बजाय घटती चली गई।
जब यह योजना शुरू हुई थी, तब कुल 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 आवेदन प्राप्त हुए थे। इसके बाद आपत्तियों और सत्यापन प्रक्रिया के दौरान 2 लाख 18 हजार 858 नाम बाहर कर दिए गए। उस समय पात्र महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। अब यह आंकड़ा और गिरकर 1 करोड़ 25 लाख के आसपास पहुंच गया है।
Financial Impact – सरकार पर बढ़ता आर्थिक दबाव
लाड़ली बहना योजना केवल एक सामाजिक योजना नहीं, बल्कि राज्य के बजट पर सबसे बड़ा मासिक खर्च बन चुकी है। जून 2023 से दिसंबर 2025 के बीच अब तक कुल ₹48,632 करोड़ 70 लाख की राशि महिलाओं के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल में, यानी जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच ही ₹38,635 करोड़ 89 लाख रुपए वितरित किए गए हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि योजना का सामाजिक प्रभाव भले ही सकारात्मक हो, लेकिन इसका दीर्घकालिक वित्तीय प्रबंधन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यही कारण है कि पात्रता की शर्तों को सख्ती से लागू किया जा रहा है और नए नाम जोड़ने पर फिलहाल रोक लगी हुई है।
लाड़ली बहना योजना 2026
बजट और पात्रता की पूरी जानकारी
आर्थिक विश्लेषण
* ₹250 की वृद्धि के कारण सरकार पर सालाना ₹3810 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ा है।
आवेदन हेतु अनिवार्य शर्तें
- 📍 मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी होना अनिवार्य है।
- 📅 जन्म 1 जनवरी 1963 के बाद और 1 जनवरी 2000 से पहले हुआ हो।
- 💍 विवाहित हो (विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल)।
- 💰 परिवार की वार्षिक आय ₹2.5 लाख से अधिक न हो।
- 🚫 परिवार का कोई भी सदस्य आयकर दाता या सरकारी कर्मचारी न हो।
- 🚜 5 एकड़ से अधिक भूमि या चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर छोड़कर) न हो।
- 🏛️ परिवार का कोई सदस्य सांसद, विधायक या स्थानीय निकाय का जनप्रतिनिधि न हो।
How Ladli Behna Was Born – एक रात में बदली सोच
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की शुरुआत केवल एक सरकारी फाइल से नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे एक राजनीतिक और भावनात्मक कहानी जुड़ी है। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 4 मार्च 2023 को भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान इस योजना का खुलासा करते हुए कहा था कि एक रात उन्होंने पूरी नींद नहीं ली। सुबह करीब 4 बजे उन्होंने अपनी पत्नी को जगाया और कहा – “मेरे दिमाग में एक योजना आई है। सभी बहनें मुझे भाई मानती हैं। मैं भी अपनी बहनों को कुछ देना चाहता हूं।”
शिवराज ने मंच से कहा था कि साल में एक बार सहायता देने से महिलाओं की समस्या हल नहीं होगी। अगर हर महीने पैसा मिलेगा, तभी वे आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सकेंगी। इसी सोच से जन्म हुआ मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का। उन्होंने इसे सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि “बहनों की जिंदगी बचाने का महाअभियान” बताया था।
Social Impact – घर की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की हिस्सेदारी
ग्रामीण और शहरी इलाकों में इस योजना का असर साफ दिखाई देता है। कई परिवारों में पहली बार ऐसा हुआ है कि महिला के खाते में सीधे पैसा पहुंच रहा है। इससे घर की जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और छोटे-मोटे खर्चों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, लाड़ली बहना योजना ने कई महिलाओं को घरेलू स्तर पर निर्णय लेने की ताकत दी है।
हालांकि, लाभार्थियों की घटती संख्या यह भी दर्शाती है कि योजना अब एक स्थिर ढांचे में प्रवेश कर चुकी है। सरकार इसे विस्तार देने के बजाय, मौजूदा ढांचे को नियंत्रित करने पर ज्यादा ध्यान दे रही है। यही वजह है कि नए नाम जोड़ने की बजाय, पात्रता की कसौटी और सख्त की जा रही है।
लाड़ली बहनों की संख्या में गिरावट का विवरण
| समय सीमा | कुल लाभार्थी संख्या |
|---|---|
| अक्टूबर 2023 | 1,31,02,182 |
| जनवरी 2024 | 1,29,26,835 |
| जनवरी 2025 | 1,26,36,000 |
| जनवरी 2026 | 1,25,31,000 |
* यह ग्राफ दी गई इमेज के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है।
Political Angle – घटती संख्या, बढ़ते सवाल
राजनीतिक दृष्टि से लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश की राजनीति की दिशा बदली है। इसे महिलाओं के बीच सरकार का सबसे मजबूत आधार माना जाता है। लेकिन अब जब ढाई साल में 5.70 लाख नाम कट चुके हैं, तो विपक्ष सवाल उठा रहा है कि क्या सरकार धीरे-धीरे योजना का दायरा सीमित कर रही है।
सरकार का तर्क है कि यह कटौती पात्रता के नियमों के तहत हो रही है और इसका उद्देश्य योजना को पारदर्शी बनाना है। लेकिन जमीनी स्तर पर कई महिलाएं यह महसूस कर रही हैं कि उम्र सीमा पूरी होते ही या किसी तकनीकी कारण से नाम कटना उनके लिए बड़ा झटका बन जाता है।
FAQ: लाड़ली बहना योजना से जुड़े सवाल
लाड़ली बहना योजना में नाम क्यों कट रहे हैं?
सरकार के अनुसार, उम्र सीमा पूरी होने, पात्रता शर्तों में बदलाव और दस्तावेज सत्यापन के दौरान अपात्र पाए जाने पर नाम हटाए जा रहे हैं। फिलहाल योजना में नए नाम नहीं जोड़े जा रहे।
आज कितनी महिलाओं को राशि मिलेगी?
32वीं किस्त में ₹1836 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई
योजना शुरू होने से अब तक कितना पैसा दिया गया है?
जून 2023 से दिसंबर 2025 तक कुल ₹48,632 करोड़ 70 लाख रुपए महिलाओं के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं।
क्या भविष्य में नए नाम जोड़े जाएंगे?
फिलहाल सरकार की ओर से नए नाम जोड़ने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। भविष्य में यह निर्णय आर्थिक स्थिति और नीति के आधार पर लिया जा सकता है।
लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश की लाखों महिलाओं की जिंदगी में वास्तविक बदलाव किया है। लेकिन लाभार्थियों की घटती संख्या यह संकेत भी देती है कि सरकार अब इस योजना को विस्तार देने की बजाय स्थिर रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सवाल यही है कि आने वाले समय में यह योजना केवल एक सीमित दायरे में सिमट कर रह जाएगी, या फिर नए रूप में और मजबूत होकर सामने आएगी। आज जब ₹1836 करोड़ एक साथ खातों में पहुंचेंगे, तब यह योजना फिर से साबित करेगी कि वह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की उम्मीद बन चुकी है।
Aaryan Puneet Dwivedi
Aaryan Puneet Dwivedi is a senior editor and an experienced journalist who has been active in the news industry since 2013. He has extensive experience covering and editing news across multiple fields, including politics, national and international affairs, sports, technology, business, and social issues. He is a state-level accredited journalist recognized by the Madhya Pradesh government. Known for his in-depth understanding of news and current affairs, he focuses on delivering accurate, reliable, and reader-friendly information across all major news categories.




