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मैहर: जमीनी विवाद बना खूनी संघर्ष का अखाड़ा; क्या प्रशासन के सामने रसूखदारों को है छूट?

मैहर, मध्य प्रदेश: मैहर जिले के ताला थाना क्षेत्र के जमुना गांव में जमीनी विवाद को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे क्षेत्र में तनाव पैदा कर दिया है। यह विवाद सिर्फ दो परिवारों की लड़ाई नहीं, बल्कि कानून की निष्पक्षता पर भी एक बड़ा सवालिया निशान है। वर्तमान सरपंच और पूर्व सरपंच के बीच चली आ रही यह रंजिश अब राजनीतिक दबाव और पक्षपातपूर्ण कार्यवाही के आरोपों में तब्दील हो गई है।
विवाद की जड़: गिट्टी और अवैध कब्जा
घटना की शुरुआत ग्राम पंचायत के वर्तमान सरपंच प्रकाश सिंह बघेल और पूर्व सरपंच विष्णु प्रताप सिंह के बीच पुराने भूमि विवाद को लेकर हुई। बताया जा रहा है कि विवादित जमीन पर रखी गिट्टी को हटाने को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पूर्व सरपंच के पक्ष का आरोप है कि सरपंच द्वारा उनकी जमीन पर रखी गिट्टी को जबरन उठाया जा रहा था। जब इसका विरोध किया गया, तो बात गाली-गलौज से शुरू होकर खूनी संघर्ष तक पहुँच गई। मारपीट और पुलिस शिकायतों के बाद, दोनों पक्षों के बीच एक लिखित समझौता सामने आया है, जिसमें गिट्टी के स्वामित्व और विवादित स्थान पर दुकान के संचालन को लेकर शर्तें तय की गई हैं।
लिखित समझौता: शर्तों के साथ दुकान का संचालन
विवाद के बीच एक हस्तलिखित दस्तावेज़ सामने आया है, जिस पर दोनों पक्षों की सहमति के हस्ताक्षर हैं। इस समझौते के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- गिट्टी का स्वामित्व: दस्तावेज़ के अनुसार, ग्राम जमुनाटोला में इंद्रमणि पाण्डेय के घर के सामने स्थित प्लॉट पर रखी गई गिट्टी विष्णु प्रताप सिंह (मुन्ना) की है।
- हस्तक्षेप पर रोक: स्पष्ट किया गया है कि प्रकाश सिंह (बबलू) इस गिट्टी के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या इसका उपयोग नहीं करेंगे।
- दुकान का संचालन: अंतिम निर्णय होने तक प्रकाश सिंह (सरपंच) प्लॉट पर बनी दुकान का संचालन कर सकेंगे।
- अवैध कार्यों पर पाबंदी: दुकान संचालन के लिए सख्त शर्त रखी गई है कि वहां किसी भी प्रकार का अवैध कार्य नहीं होगा और न ही राजनीतिक लोगों की बैठक आयोजित की जाएगी। इसे केवल व्यापारिक उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाएगा।
गंभीर आरोप और पुलिस की भूमिका
समझौते के बावजूद तनाव कम नहीं हुआ है। पूर्व सरपंच विष्णु प्रताप सिंह ने आरोप लगाया है कि उनकी पट्टे की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई और विरोध करने पर उनके परिवार के साथ अभद्रता की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस ने सरपंच पक्ष की FIR तो दर्ज कर ली, लेकिन उनकी शिकायत पर अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की है। इसके अलावा, उन्होंने विवादित क्षेत्र में अवैध शराब और तस्करी की गतिविधियों के होने का भी गंभीर आरोप लगाया है।
जमुना गांव का यह विवाद अब पुलिस और राजस्व विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि कागजों पर समझौता हुआ है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गहराता अविश्वास और राजनीतिक रसूख का आरोप किसी बड़ी अप्रिय घटना को जन्म दे सकता है। स्थानीय ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन को इस मामले में हस्तक्षेप कर जमीन का स्थायी सीमांकन करना चाहिए ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
हाई-वोल्टेज ड्रामा और जेसीबी का इस्तेमाल
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और चश्मदीदों के अनुसार, स्थिति तब और गंभीर हो गई जब विवाद के दौरान जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया। पीड़ित पक्ष के गगन सिंह ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी गिट्टी बचाने के लिए उसके सामने लेट गए, तो उन पर जेसीबी चढ़ाने का प्रयास किया गया। वीडियो में महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की और चीख-पुकार भी साफ सुनी जा सकती है, जो घटना की गंभीरता को दर्शाती है।
पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिस की कार्यवाही है। प्रथम पक्ष (सरपंच) की शिकायत पर मुकुंदपुर थाने ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए पांच लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की और उनका मेडिकल कराया। वहीं, दूसरे पक्ष (विष्णु प्रताप सिंह) का आरोप है कि पुलिस उनकी शिकायत सुनने को तैयार नहीं है।
"हमने घटना के तुरंत बाद थाने में शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय केवल एक लिखित आवेदन लेकर हमें टाल दिया। क्या कानून केवल रसूखदारों के लिए है?" — विष्णु प्रताप सिंह, पूर्व सरपंच
स्मगलिंग और अवैध गतिविधियों के आरोप
विवाद के बीच पूर्व सरपंच ने सरपंच पक्ष पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि जिस जमीन पर विवाद है, वहां सरपंच द्वारा गांजा, अवैध शराब और डीजल की तस्करी जैसे काले कारनामे किए जाते हैं। उनका कहना है कि रात भर वहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है, जिससे गांव की शांति भंग होती है और महिलाओं की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है।
प्रशासन के सामने चुनौतियां
यह मामला इसलिए भी पेचीदा है क्योंकि इसमें एक ही परिवार के लोग शामिल हैं। पूर्व सरपंच का आरोप है कि सरपंच अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर उन लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज करवा रहे हैं जो घटना के वक्त गांव में मौजूद ही नहीं थे (कोई बाहर नौकरी कर रहा है तो कोई घर में था)।
मुख्य मांगें:
- मामले की निष्पक्ष और सीआईडी स्तर की जांच हो।
- राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर पुलिस कार्यवाही करे।
- राजस्व विभाग जमीन का सीमांकन कर विवाद को हमेशा के लिए सुलझाए।




