नरोत्तम मिश्रा व तुलसी सिलावट बन सकते हैं उप मुख्यमंत्री, ये बन सकते हैं मंत्री, SIDHI के वरिष्ठ विधायक केदार शुक्ल बन सकते है स्पीकर, पढ़िए !

मध्यप्रदेश रीवा शहडोल सतना सीधी

भोपाल : शिवराज सिंह चौहान द्वारा चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद तेज हो गई है।

पिछले बार के मुकाबले इस बार मंत्रिमंडल विस्तार काफी सोच समझकर किया जाएगा। पहली बार शिवराज मंत्रिमंडल में दो उप मुख्यमंत्री डा.नरोत्तम मिश्रा व तुलसीराम सिलावट को बनाया जा सकता है। कांग्रेस सरकार गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा ने वाले सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल में मौका दिया जाएगा। इसके अलावा कांग्रेस से भाजपा में आए वरिष्ठ आदिवासी नेता बिसाहूलाल सिंह, एदल सिंह कंसाना और हरदीप सिंह डंग को भी मंत्रिमंडल में मौका मिल सकता है। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्ढ़ा व अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ ही कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी चर्चा करेंगे। मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय व जातीय समीकरणों का भी पूरा याल रभा जाएगा। अतिविश्वसनीय सूत्रों के अनुसार अधिकांश पूर्व मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। पिछले विधानसभा चुनाव में हारे मंत्रियों के स्थान पर कांग्रेस से भाजपा में आए विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। ऐसी स्थिति में भाजपा के पन्द्रह से बीस मंत्री ही बन पाएंगे। जबकि दावेदारों की फेहरिस्त है। भाजपा के लगाग पचास ऐसे विधायक हैं जो तीन बार या इससे अधिक के विधायक हैं। ऐसी स्थिति में युवाओं को कम मौका मिल सकता है।

ये बन सकते हैं मंत्री

गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह, रामपाल सिंह, श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, विजय शाह, अजय विश्नोई, राजेन्द्र शुक्ल, गौरीशंकर बिसेन, संजय पाठक, पारस जैन, जगदीश देवडा, विश्वास सारंग, हरिशंकर खटीक, सुश्री मीना सिंह, प्रदीप लारिया, अरविंद भदौरिया, ओम प्रकाश सालेचा, बृजेन्द्र प्रताप सिंह, हरिशंकर खटीक, रमेश मेंदोला, जालम सिंह पटेल, श्रीमती मालिनी गौड़,गोपीलाल जाटव, गायत्री राजे पवार, श्रीमती नीना वर्मा, कुंवर सिंह टेकाम,यशपाल सिंह सिसोदिया, कमल पटेल,केदार शुक्ल , रामेश्वर शर्मा, रामोलावन पटेल, मोहन यादव, पंचूलाल, दिव्यराज सिंह आदि को मौका मिल सकता है। यदि पार्टी में पचहत्तर साल की उम्र का फार्मूला लागू नहीं हुआ तो नागेन्द्र सिंह नागौद या नागेन्द्र सिंह गुढ़ को मौका मिल सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ युवा विधायकों के नाम कट सकते हैं।

कांग्रेस से भाजपा में आए इन पूर्व विधायकों को मौका मिल सकता है

बिसाहूलाल सिंह, गोविन्द सिंह राजपूत, डा.प्राूराम चौधरी, इमरती देवी, महेन्द्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युमन सिंह तोमर, एदल सिंह कंसाना और हरदीप सिंह डंग। निर्दलीय तथा बसपा व सपा से आए विधायकों को भी मंत्रिमंडल में मौका मिल सकता है। भाजपा को समर्थन देने वाले प्रदीप जायसवाल को लेकर आी संशय की स्थिति है।

फिर सीताशरण शर्मा बन सकते हैं स्पीकर

एक बार फिर वरिष्ठ भाजपा नेता डा.सीताशरण शर्मा को विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विश्वसनीय डा. शर्मा ने वर्ष 2013 से 2018 तक विधानसभा का बहुत ही संजीदा तरीके से संचालन किया था। डा. शर्मा के अलावा सीधी के वरिष्ठ विधायक केदार शुक्ल भी विधानसभा अध्यक्ष के प्रमुख दावेदार हैं।

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