मध्यप्रदेश: Kamalnath जैसे थोक तबादले कर रही Shivraj सरकार, नायब तहसीलदारों को भी मिली नई....

कुछ अधिकारी सरकार के इशारे पर काम कर रहे, मैंने लिस्ट बना ली है, बख्शूंगा नहीं : SHIVRAJ

मध्यप्रदेश

भोपाल. मध्य प्रदेश में सत्ता के लिए शुरू हुआ संघर्ष अब कानूनी दांव-पेंच में उलझता नजर आ रहा है। दोपहर करीब 4 बजे भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा राजभवन पहुंचे। बीते 20 घंटे में भाजपा नेताओं की राज्यपाल से यह दूसरी मुलाकात है। नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने अल्पमत ली कमलनाथ सरकार द्वारा की जा रही संवैधानिक नियुक्तियों पर रोक लगाने की मांग की। शिवराज सिंह ने कहा कि कुछ अधिकारी सरकार के कहने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे ऐसे अधिकारियों की लिस्ट बना रहे हैं और उन्हें बख्शेंगे नहीं। Some officials working at the behest of the government, I have made a list, not spared: SHIVRAJ

शिवराज सिंह चौहान ने कहा- कमलनाथ सरकार ने इतनी तबाही और बर्बादी की कि उनके 16 विधायकों को इस्तीफा देना पड़ा। राज्य सरकार अल्पमत में है। इसके बाद भी संवैधानिक पदों पर नियुक्ति कर रही है। ये नियुक्तियां असंवैधानिक हैं। मामले की सुनवाई सु्प्रीम कोर्ट में होने जा रही है। हमने राज्यपाल से अनुरोध किया कि इन नियुक्तियों को रोका जाए।

रातोंरात चीफ सेक्रेट्री बदले जा रहे हैं- चौहान

उन्होंने कहा- रातोंरात चीफ सेक्रेटरी बदले जा रहे हैं। चीफ सेक्रेट्री के पद पर दागी अफसर की नियुक्ति की गई। बिजली नियामक आयोग अध्यक्ष के पद पर भी ऐसे ही अधिकारी की नियुक्ति की कोशिश कर रही है। दरअसल, कमलनाथ सरकार का टाइम काटू कार्यक्रम चल रहा है। विधायक बंधक नहीं हैं। वे खुली हवा में सांस ले रहे हैं। उनका दम कमलनाथ सरकार में घुटता है। उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दिया है। यह कोई साधारण बात नहीं है।

हमने अविश्वास प्रस्ताव का कोई नोटिस नहीं दिया- चौहान

चौहान ने कहा- हमने अविश्वास प्रस्ताव का कोई नोटिस नहीं दिया है। जब राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया है तो हम क्यों अविश्वास प्रस्ताव का कहेंगे। वहीं, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि इन नियुक्तियों की जानकारी राज्यपाल तक की जानकारी नहीं है। हम इसकी शिकायत करने राज्यपाल के पास गए थे। ऐसी कौनसी कयामत आ रही थी जो आधी रात को चीफ सेक्रेट्री को चार्ज दिलाया गया।

24 घंटे में कमलनाथ सरकार द्वारा की गईं नियुक्तियां
कांग्रेस नेता शोभा ओझा को राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। जेपी धनोपिया राज्य पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष बनाए गए। गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष बनाए गए। अभय तिवारी मध्य प्रदेश युवा आयोग के अध्यक्ष बनाए गए। सोमवार को एम गोपाल रेड्डी को मप्र का नया मुख्य सचिव बनाया गया। उन्होंने सोमवार रात को ही चार्ज ले लिया। निवर्तमान मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती को प्रशासन अकादमी का डीजी बनाया गया है।

कोर्ट ने राज्यपाल-मुख्यमंत्री और स्पीकर से 24 घंटे में जवाब मांगा

इससे पहले, भाजपा फ्लोर टेस्ट कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। कोर्ट ने मंगलवार को राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा स्पीकर को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। इस मामले में बुधवार को 10:30 बजे फिर सुनवाई होगी। अब मुख्यमंत्री कमलनाथ दिल्ली से आए पार्टी के वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक और संसदीय कार्य मंत्री गोविंद सिंह के साथ कानूनी मसले पर चर्चा की। सुबह 11 बजे के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता, मंत्री और विधायकों के सीएम हाउस पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।

इससे पहले सोमवार शाम भाजपा ने 106 विधायकों की राज्यपाल के सामने परेड कराई थी। फिलहाल, पार्टी के सभी विधायक सीहोर के एक रिसॉर्ट में ठहरे हुए हैं। इससे पहले भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने कहा- कांग्रेस विधायक खुद बोल रहे हैं कि कमलनाथ सरकार छिंदवाड़ा (सीएम के गृहनगर) तक सिमट चुकी है। उन्होंने पुत्रमोह में पूरी सरकार को डुबा दिया। एक राष्ट्रीय अध्यक्ष ने तो पुत्रमोह में देश के अंदर कांग्रेस को डुबा दिया।

राज्यसभा प्रत्याशी सिंधिया और सुमेर पर कांग्रेस की आपत्ति खारिज
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह की ओर से वकील और जेपी धनोपिया ने भाजपा प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेर सिंह सोलंकी के नामांकन पर आपत्ति लगाई गई थी। इसमें कहा गया था कि सिंधिया ने अपने ऊपर दर्ज कई आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई है। वहीं, सोलंकी के बारे में आपत्ति लगाई गई है कि उन्होंने शासकीय सेवा में रहते हुए राज्यसभा के लिए नामांकन भरा। हालांकि, चुनाव अधिकारी ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया है।

भाजपा विधायक के बागी सुर, आज भी कमलनाथ से मिले

दूसरी ओर, मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी 3 दिन में चौथी बार कमलनाथ से मिले। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार को कोई खतरा नहीं है। कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत है। त्रिपाठी सोमवार को भी मुख्यमंत्री से मिले थे। जबकि रविवार को उनकी 2 बार और शनिवार को भी एक बार मुख्यमंत्री से मुलाकात हो चुकी है। उनका कहना है कि वह सिर्फ विकास के साथ हैं। अभी कमलनाथ सरकार है। जब नहीं होगी तो देखा जाएगा।

फ्लोर टेस्ट नहीं कराए जाने पर राज्यपाल 2 बार पत्र लिख चुके
सोमवार को फ्लोर टेस्ट नहीं कराए जाने से राज्यपाल लालजी टंडन ने सरकार को पत्र लिखकर नाराजगी जताई थी। इसमें उन्होंने कहा था कि अगर मंगलवार को फ्लोर टेस्ट नहीं कराया गया तो माना जाएगा कि सरकार अल्पमत में है। राज्यपाल के पत्र के बाद देर शाम कमलनाथ ने पत्र लिखा और उनके आदेश की वैधता को ही चुनौती दे दी। मंगलवार को कमलनाथ ने राज्यपाल को एक और चिट्ठी लिखी। इसमें उन्होंने राज्यपाल के आदेश को असंवैधानिक बताया। दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं। फिलहाल, सरकार की ओर से अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई।

अब आगे क्या हो सकता है?

1) सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
फ्लोर टेस्ट में देरी के विरोध में भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। सुनवाई हुई। मामले की कल भी सुनवाई होगी। अगर स्पीकर अगले 10 दिन के भीतर बागी विधायकों को अयोग्य करार देते हैं तो भी मामला हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है। कोर्ट में तुरंत सुनवाई हुई तो 26 मार्च से पहले भी फ्लोर टेस्ट हो सकता है।

एक्सपर्ट व्यू : संवैधानिक मामलों के जानकार फैजान मुस्तफा के मुताबिक, स्पीकर के पास दो विकल्प हैं। या तो वे विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लें या उन्हें डिस्क्वालिफाई (अयोग्य) करार दें। स्पीकर अपने फैसले को डिले कर सकते हैं, ताकि सत्ताधारी पार्टी के लोगों को बागियों को मनाने का कुछ वक्त मिल जाए। लेकिन दो विकल्पों के अलावा स्पीकर के पास कोई और चारा नहीं है।

2) क्या राष्ट्रपति शासन लगने के आसार हैं?
ये भी एक संभावना है। इसके उदाहरण भी हैं। पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में महाराष्ट्र में चुनाव नतीजों के 19 दिन बाद राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। तब राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य के तीन प्रमुख दलों भाजपा, शिवसेना और राकांपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था, लेकिन कोई भी दल सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या बल नहीं जुटा पाया। 12 दिन बाद रातों-रात राष्ट्रपति शासन हटा और देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। इससे भी पहले जून 2018 में जम्मू-कश्मीर में जब भाजपा ने महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया तो पीडीपी-नेशनल कॉन्फ्रेंस ने मिलकर सरकार बनाने की कोशिश की। हालांकि, इसी बीच वहां राज्यपाल शासन लगा दिया गया।

एक्सपर्ट व्यू : फैजान मुस्तफा बताते हैं कि सरकार या स्पीकर जानबूझकर फ्लोर टेस्ट नहीं कराते तो प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता का कारण बताकर राज्यपाल सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं।

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