महाराष्ट्र

कौन है एकनाथ शिंदे जिन्होंने शिवसेना को 42 साल दिए और एक क्षण में सब कुछ छीन लिया

कौन है एकनाथ शिंदे जिन्होंने शिवसेना को 42 साल दिए और एक क्षण में सब कुछ छीन लिया
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एकनाथ शिंदे कौन हैं: महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार का महाविनाश करने पर उतारू एकनाथ शिंदे ने कभी राजनीति त्याग दी थी.

Who is Eknath Shinde: वक़्त की एक खूबी है. यह बदलता रहता है, किसी के हाथ नहीं आता किसी का साथ देता है तो किसी को बर्बाद कर देता है. महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार के साथ यही हो रहा है. कभी शिवसेना के लिए जान न्योछावर कर देने के लिए तैयार रहने वाले एकनाथ शिंदे ने महाविकास अघाड़ी सरकार का वक़्त बदल दिया है. शिवसेना को 42 साल देने के बाद शिंदे ने एक क्षण में सब कुछ छीन लिया है।

Story Of Eknath Shinde: कौन है एकनाथ शिंदे जिसने महान नेता बालासाहेब की बनाई चट्टान से अधिक मजबूत शिवसेना को चकनाचूर कर दिया है. महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार का महाविनाश करने वाले शिंदे की जिंगदी में एक ऐसा वक़्त भी आया था जब उन्होंने राजनीति करना ही छोड़ दिया था. वो बुरी तरह से टूट गए थे और सब कुछ त्याग देने का फैसला कर लिया था. बालासाहेब के बाद उद्धव के पीछे चलने वाले शिंदे ने आज सबको पीछे छोड़ दिया है.

एकनाथ शिंदे कौन हैं

Eknath Shinde Political Carrier: बात 9 फरवरी 1964 की है जब महाराष्ट्र के सतारा जिले के जवाली तालुका में एकनाथ शिंदे का जन्म हुआ था. पढाई-लिखाई पूरी करने के बाद शिंदे ने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना जो ज्वाइन कर लिया। बालासाहेब के बाद शिवसेना में कोई बड़ा कद रखता था वो वह 'आनंद दीगे' थे. शिंदे महाराष्ट्र के ठाणे में रहने लगे और आनंद दीगे को अपना गुरु बना लिया। शिंदे शिवसेना के सैनिक बन गए, लेकिन वो भी उन हज़ार लोगों में एक थे जो शिवसेना में शामिल थे.

जब शिंदे ने अपना सबकुछ छोड़ दिया था

1980 से साल 2000 तक शिंदे ने शिवसेना की खूब सेवा की, 1997 में ठाणे नगरनिगम के कॉर्पोरेटर बने. शिंदे शिवसेना में चमकने लगे थे यह उनकी राजनीति का पीक पॉइंट था लेकिन एक वक़्त ऐसा आया जब शिंदे बुरी तरह से टूट गए थे. साल 2000 की 2 जून को शिंदे की जिंदगी में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. एकनाथ अपने 11 साल के बेटे दीपेश और 7 साल की बेटी के साथ सतारा में घूमने गए थे. बोटिंग करने के दौरान बोट नदी में पलट गई और उनकी आंखों के सामने उनके दोनों बच्चे डूब गए. इस हादसे के बाद शिंदे बिखर गए थे और सब कुछ त्याग देने का फैसला कर लिया था.

आनंद दीगे ने शिंदे को वापस बुलाया

अपने बच्चों की मौत देखने के बाद शिंदे गहरे डिप्रेशन में चले गए थे, वो किसी से मिलना नहीं चाहते थे, कहीं भी जाते नहीं थे, उस वक़्त वो अकेले पड़ गए थे. तब उनके राजनितिक गुरु आनंद दीगे ने उन्हें वापस शिवसेना में बुलाया था.

26 अगस्त 2001 में शिंदे के गुरु की मौत हो गई

Eknath Shinde With Anand Dighe: 26 अगस्त 2001 में शिवसेना के महानायक आनंद दीगे की अचानक मौत हो गई, वह मौत थी या हत्या आज तक इसका खुलासा नहीं हुआ. बालासाहेब को लगता था कि आनंद की शिवसेना में उनसे ज़्यादा पकड़ न हो जाए. लेकिन इसका उनकी मौत से कोई लेना देना नहीं था. दीगे की मौत के बाद शिवसेना को अब अपना दबदबा बनाए रखने के लिए नए चेहरे की तलाश थी. इसी लिए एकनाथ शिंदे को आनंद दीगे की राजनितिक विरासत सौंप दी गई.

Eknath Shinde Bala Saheb Thackeray: अपने गुरु के नक़्शे कदम पर चलने वाले शिंदे ने उस दिन के बाद कभी पीछे मुड़ के नहीं देखा, ठाणे महाराष्ट्र की राजनीति का केंद्र बन गया. 2004 में शिंदे पहली बार शिवसेना विधायक बने और 2009, 2014, 2019 और 2014 में लगातार विधायक बनते रहे. साल 2014 में बीजेपी की सरकार के दौरान शिंदे कांग्रेस के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष भी बने थे. तत्कालीन सीएम देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें PWD मंत्री बना दिया, 2019 में जब शिवसेना ने बीजेपी का साथ छोड़ कांग्रेस और NCP के सहारे सरकार बनाई तो शिंदे ने इसका विरोध किया। लेकिन शिवसेना में बड़ा कद रखने के चलते उन्हें महाराष्ट्र का परिवार कल्याण मंत्री, नगरविकास मंत्री और विधायक दल का नेता चुनना पड़ा. क्योंकि शिवसेना में शिंदे उद्धव ठाकरे से ज़्यादा अनुभवी और काबिल नेता थे.

42 साल शिवसेना को देने के बाद अब खुद की सेना बना ली

जब से शिवसेना ने महाराष्ट्र में सत्ता हथियाने के लिए बालासाहेब के उसूलों के खिलाफ जाकर काँग्रेस का साथ लिया तभी से शिंदे को उद्धव खटकने लगे थे. उद्धव शिवसेना के विधायकों को कम तवज्जो देते थे और कांग्रेस के MLA की सुनते थे. मगर शिंदे हमेशा अपने विधायकों के साथ खड़े रहते थे. शिंदे ने शिवसेना को अपने 42 साल दिए और आज उद्धव ठाकरे की शिवसेना को नकली बता कर अपने बागी विधायकों के दल को असली बालासाहेब की उसूलो वाली शिवसेना बनाने का दावा ठोंक रहे हैं. शिंदे उद्धव से सिर्फ महाराष्ट्र की सत्ता मात्र नहीं शिवसेना ही छीने ले रहे हैं.

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