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शोध में दावा: इंसानों का प्राइवेट पार्ट इस वजह से हो रहा छोटा, पढ़िए जरूरी खबर : LIFESTYLE NEWS

RewaRiyasat.Com
Shashank Dwivedi
27 Mar 2021

LIFESTYLE NEWS: इंसानों के लिए बड़ा खतरा महामारी तो है ही, लेकिन उससे ज्यादा घातक प्रदूषण है। एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि प्रदूषण की वजह से इंसानों का प्राइवेट पार्ट छोटा हो रहा है। न्यूयॉर्क स्थित माउंट सिनाई हॉस्पिटल की स्टडी के मुताबिक पॉल्यूशन का स्तर बढऩे की वजह से यह हो रहा है और बच्चे विकृत अंगों के साथ पैदा हो रहे हैं।

माउंट सिनाई हॉस्पिटल में एनवॉयरॉनमेंटल मेडिसिन और पलिक हेल्थ की प्रोफेसर डॉ. शान्ना स्वान के मुताबिक इंसान की प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। डॉ. स्वान ने कहा कि ये इंसानों के लिए अस्तित्व का संकट है। उन्होंने बताया कि स्टडी में एक ऐसे खतरनाक रसायन की पहचान हुई है जो इंसानों की प्रजनन क्षमता को कम कर रहा है।

कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को ट्वीट किया 

डॉ. स्वान ने पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को ट्वीट भी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि प्रदूषण के मामले में मैं ग्रेटा के साथ हूं। इस रसायन का नाम है फैथेलेट्स। इस केमिकल का उपयोग प्लास्टिक बनाने के लिए होता है। इसकी वजह से इंसान के एंडोक्राइन सिस्टम पर पड़ता है। इंसानों में हॉर्मोंस के स्राव एंडोक्राइन सिस्टम के जरिए ही होता है। प्रजनन संबंधी हॉर्मोंस का स्राव भी इसी सिस्टम से होता है। साथ ही जननांगों को विकसित करने वाले हॉर्मोंस भी इसी सिस्टम के निर्देश पर निकलते हैं।

डॉ. स्वान ने बताया कि प्रदूषण की वजह से पिछले कुछ सालों में जो बच्चे पैदा हो रहे हैं, उनके प्राइवेट का आकार छोटा हो रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर एक किताब लिखी है, जिसका नाम है, काउंट डाउन। किताब में आधुनिक दुनिया में पुरुषों के घटते स्पर्म, महिलाओं और पुरुषों के जननांगों में आ रहे विकार संबंधी बदलाव और इंसानी नस्ल के खत्म होने की बात कही गई है। डॉ. स्वान ने फैथेलेट्स सिंड्रोम की जांच सबसे पहले तब शुरू की, जब उन्हें नर चूहों के अंग में अंतर दिखाई दिया।

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