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चौथी क्‍लास के बच्‍चे ने ऐसा निबंध लिखा कि पढ़कर रो पड़ी टीचर, पढ़ें क्‍या लिखा था

Aaryan Dwivedi
16 Feb 2021 11:42 AM IST
चौथी क्‍लास के बच्‍चे ने ऐसा निबंध लिखा कि पढ़कर रो पड़ी टीचर, पढ़ें क्‍या लिखा था
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मुंबई। एक भावुक कर देने वाला वाकया सामने आया है। यहां स्‍कूल में सभी छात्रों को किसी विषय पर निबंध लिखने को कहा गया। मंगेश नाम के इस बच्‍चे ने जो निबंध लिखा उसे पढ़कर टीचर रो पड़ी। वह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकी और आंखें भर आईं। यह मामला बीड़ जिले का है। बहुत कम उम्र में पिता के सहारे को खो देना क्‍या होता है, यह उसके निंबंध में साफ तौर पर झलकता है। इस बालक का नाम मंगेश वाल्‍के है। उसके पिता की कुछ दिनों पहले TB से मौत हो गई थी। मंगेश अपनी दिव्‍यांग मां के साथ रहता है। पिता के गुजर जाने के बाद घर में अब कमाने वाला कोई कोई नहीं है। इन हालातों से गुज़रने का जो दर्द होता है, वह उसकी लिखावट में जीवंत हो गया है। मंगेश बीड़ जिले के गांव वाल्‍केवाड़ी में चौथी क्‍लास में पढ़ता है। उसके स्‍कूल टीचर ने उससे 'My Father' विषय पर निबंध लिखने को कहा। बच्‍चे ने इस पर जो लिखा, उसे पढ़कर टीचर नजमा शेख की भी आंखें नम हो गईं।

टीचर ने WhatsApp group पर शेयर किया निबंध टीचर ने इस निबंध को WhatsApp group पर शेयर किया है और लोगों से अपील की है कि वे आगे आकर मंगेश की मदद करें। टीचर ने कहा कि मंगेश ने मॉय फादर टॉपिक पर निबंध लिखा है, जिसे पढ़कर मेरी आंखों में आंसू आ गए। इसे पढ़कर साफ तौर पर पता चलता है कि पिता के गुज़र जाने के बाद मंगेश किस मानसिक अवस्‍था से गुजर रहा है। मंगेश की दिव्‍यांग मां को 600 रुपए की पेंशन मिलती है। मंगेश और उसकी मां एक छोटे से खेत में काम करते हैं। उसकी मां बताती है कि पिता की मृत्‍यु के बाद बेटा बहुत मायूस रहने लगा है।

मंगेश ने इस निबंध में लिखे जिंदगी के जज्‍़बात निबंध में लिखा गया है कि, "मेरा नाम मंगेश परमेश्‍वर है। मेरे पिता का ही नाम परमेश्‍वर था। उनको टीबी का रोग था, इसलिए मेरी मां ने मुझे मामा के गांव भेज दिया। इस बीच पिता की मृत्‍यु हो गई। वो मजदूरी करते थे। जब वो जीवित थे तो घर में खाना लाते थे। घर चलाते थे। मेरे लिए कॉपी और पेन लाते थे। वो मुझसे बहुत प्‍यार करते थे। मुझे भी पिता से बहुत प्रेम था। लेकिन 18 दिसंबर 2019 को उनकी मृत्‍य हो गई। मुझे याद है मेरी मां उस दिन बहुत रोई थी। मैं भी उस दिन फूट-फूटकर रोया था। मुझे यह अच्‍छे से याद है कि उस दिन घर पर बाहर से बहुत सारे मेहमान आए थे। मेरे पिता एक अच्‍छे इंसान थे। वो हमेशा कहते थे कि आप मन लगाकर पढ़ाई करके बहुत आगे जा सकते हो। अब चूंकि पिता नहीं रहे, इसलिए अब मेरी मदद करने वाला कोई नहीं है। मुझे उनकी बहुत याद सताती है। मैं पापा को मिस करता हूं। अब मुझे और मां को यही डर सताता है कि रात में घर पर चोर-उचक्‍के ना घुस आएं। पापा, आप वापस लौट आओ।"

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