कटनी

रीवा नगर निगम में इनकी वापसी; कांग्रेस में 'हटाए गए', अब BJP आई तो 'बुलाए गए'

Aaryan Dwivedi
16 Feb 2021 6:20 AM GMT
रीवा नगर निगम में इनकी वापसी; कांग्रेस में हटाए गए, अब BJP आई तो बुलाए गए
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नगर निगम कमिश्नर सभाजीत यादव रीवा नगर निगम में लम्बे अरसे तक पदस्थ रहें, कांग्रेस सरकार में हटाए गए इंजीनियर शैलेन्द्र शुक्ला को अब BJP सरकार

रीवा. सरकार के बदलने बनने पर सबसे बड़ी खींचातानी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों में होती है. कुछ ऐसे भी होते हैं जो सरकार बदलने पर सरकार के प्रति झुक जाते हैं और कुछ सरकार बदलने पर सजा के भुक्तभोगी हो जाते है, परिणामतः ट्रांसफर, प्रमोशन में रोक,सस्पेंड. शिवराज सरकार ने कांग्रेसी विचारधारा के माने जाने वाले तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर सभाजीत यादव और स्वास्थय अधिकारी अरुण मिश्रा को निलंबित करने के बाद रीवा नगर निगम में लम्बे अरसे तक पदस्थ रहें, कांग्रेस सरकार में हटाए गए इंजीनियर शैलेन्द्र शुक्ला को फिर वापस बुला लिया गया है.

शैलेन्द्र भाजपा के प्रति वफादार अधिकारियों में गिने जाते हैं. भाजपा सरकार के दौरान उन्होंने लम्बे समय तक रीवा नगर निगम आयुक्त का प्रभार भी सम्हाला था. परन्तु जब डेढ़ साल पहले कांग्रेस कमलनाथ की सरकार बनी तो नगरीय प्रशासन विभाग ने उन्हें कटनी नगर निगम भेज दिया था. भाजपा के प्यारे शैलेन्द्र कांग्रेस के नेताओं की आँखों में शुरू से ही खटकते थें, तभी तो सरकार बनते ही सीएम से शैलेन्द्र शुक्ला की कोंग्रेसियों ने इतनी शिकायते कर मारी की उन्हें सीधे ट्रांसफर ही करना पड़ा.

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खैर अब फिर शिवराज सरकार है. जब भाजपा के इतने वफादार अधिकारी की बतौर प्रभारी अधीक्षण यंत्री रीवा नगर निगम में गृह वापसी हो रही है तो पार्टी के प्रति समर्पित निगम कर्मियों और जनप्रतिनिधियों में ख़ुशी की लहर दौड़ना स्वाभाविक है.

स्क्रीम छह का मामला खुला और निलंबन हुआ

स्कीम नंबर छह का मामला शैलेन्द्र शुक्ला के कटनी जाने के बाद खुला. उन्हें निलंबित करने का प्रस्ताव आयुक्त ने दिया तो पूरी एमआइसी उनके साथ खड़ी हो गई और महीने भर कोई निर्णय नहीं दिया. इस पर नियमों का हवाला देते हुए आयुक्त ने शुक्ला को निलंबित कर आरोप पत्र जारी किया. आयुक्त और एमआइसी के बीच टकराव बढ़ा, मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने एमआइसी को निर्णय लेने के लिए कहा. एमआइसी ने अपना पुराना निर्णय ही पारित किया. इसे तत्कालीन आयुक्त ने नहीं माना और शासन को प्रस्ताव भेज दिया. बताया जाता है कि मामला शासन के पास अब तक लंबित है, उस पर कोई दिशा निर्देश नहीं आया है.

कांग्रेस की सरकार में भी रहे प्रभावी

स्थानीय स्तर पर उन पर भाजपा का करीबी होने का आरोप लगता रहा है. लेकिन कांग्रेस की सरकार आने के बाद भी उनका प्रभाव कम नहीं हुआ. कांग्रेस के पार्षदों के विरोध की वजह से सरकार ने हटाया लेकिन आदेश जारी होने से पहले ही उन्होंने कहा था कि कटनी जाएंगे. उन्होंने अपने साथ उन कर्मचारियों का भी कटनी तबादला कराया जिनकी शिकायत हुई थी. बाद में कर्मचारी वापस लौट आए. निगम आयुक्त ने कई पत्र उन पर कार्रवाई के लिए शासन को भेजा लेकिन सब वहां पर लंबित होते रहे.

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