इंदौर

पूरे परिवार को मेरी चिंता है, पर हमें 'इंदौर को बचाना है', 24 घंटे कोरोना पीड़ितों की सेवा में लगे डॉक्टर ने कहा

Aaryan Dwivedi
16 Feb 2021 6:18 AM GMT
पूरे परिवार को मेरी चिंता है, पर हमें इंदौर को बचाना है, 24 घंटे कोरोना पीड़ितों की सेवा में लगे डॉक्टर ने कहा
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इंदौर : कोरोना COVID-19 की लड़ाई में डॉक्टर, पैरामेडिकल सहित चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी दिन रात कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का इ

इंदौर : कोरोना COVID-19 की लड़ाई में डॉक्टर, पैरामेडिकल सहित चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी दिन रात कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का इलाज करने में जुटे हैं। इंदौर में कोरोना के संक्रमण को रोका जा सके इसके लिए निगमकर्मी और पुलिस 24 घंटे ड्यूटी दे रहें। एमआरटीबी अस्पताल में पदस्थ डॉ. मुकुल पाराशर 4 दिनों से नाइट ड्यूटी दे रहें हैं। वह बताते हैं, पीपीई किट (मास्क) पहनने के बाद पूरी तरह पैक हो जाते हैं। मरीजों का इलाज करते वक्त गर्मी का अहसास नहीं होता। मैं ग्वालियार से हूं। पूरे परिवार को मेरी चिंता लगी रहती है लेकिन यहां मुझे इन मरीजों की चिंता ज्यादा है।

माता-पिता को उनकी व उन्हे मरीजों की चिंता

कालापीपल निवासी डॉ. जितेन्द्र राजपूत एमआरटीबी अस्पताल में मरीजों के इलाज में जुटे हैं. गांव में रह रहें माता-पिता और भाई को हर दम उनकी चिंता रहती है, लेकिन डॉ जितेन्द्र का कहना है, सबसे पहले मानव धर्म और कोरोना से जितना है। इनके साथ ही कंधा से कंधा मिलाकर 24 घंटे इनकी मदद के लिए कर्मचारी भी ड्यूटी पर मुस्तैद हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पहली लड़ाई हमारी कोरोना से है, हमे पहले इस जंग को जितना है।

सोशल डिस्टेंसिंग का करवा रहे पालन

कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए पुलिस, निगमकर्मी, डॉक्टर सब अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद हैं। एमवायएच कैजुअल्टी में सीएमओ डॉ. उमेश मंडलोई, डॉ रामप्रवेश कुशवाह, डॉ. प्रसंजीत दरस रातभर इलामें में जुटे रहते हैं। डॉ. मंडलोई ने बताया मरीज और उनके परिजन के साथ खुद की सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना चुनौतीपूर्ण है।

मेडिसिन विभाग और रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के डॉक्टर अलग-अलग क्रम में 24 घंटे ड्यूटी दे रहै हैं। डॉक्टरों की इस फौज में 70 प्रतिशत यंग डॉक्टर है। विभागाध्यक्ष डॉ. सलिल भार्गव के निर्देशन में ये टीम बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा रही है। हर छोटी-छोटी बात पर निजी अस्पतालों की ओर भागने वाले लोगों के लिए आज सरकारी अस्पतालों का महकमा देवदूत बना हुआ है।

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