
- Home
- /
- मध्यप्रदेश
- /
- इंदौर
- /
- इंदौर दूषित पानी कांड:...
इंदौर दूषित पानी कांड: भागीरथपुरा में 24वीं मौत, 78 वर्षीय सुभद्राबाई ने तोड़ा दम | Indore Water Tragedy Update

- भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में 24वीं मौत, 78 वर्षीय महिला ने अस्पताल में दम तोड़ा
- पीड़ित परिवार का दावा – पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी
- हाईकोर्ट में सरकार से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट, अगली सुनवाई 20 जनवरी
- इलाके में नर्मदा और ड्रेनेज लाइन का काम तेज, सड़कों पर खुदाई
इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड ने एक बार फिर शहर को झकझोर कर रख दिया है। गुरुवार सुबह इस त्रासदी में एक और जिंदगी खत्म हो गई। 78 वर्षीय सुभद्राबाई पंवार ने इलाज के दौरान निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस भयावह हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है। यह मामला अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और शहरी व्यवस्था की गंभीर विफलता का प्रतीक बनता जा रहा है।
भागीरथपुरा Contaminated Water Case – कैसे बिगड़ी सुभद्राबाई की हालत?
परिजनों के अनुसार, 26 दिसंबर को दूषित पानी पीने के बाद सुभद्राबाई की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें तेज उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। बेटे मनीष पंवार बताते हैं कि पहले घर पर ही इलाज की कोशिश की गई, लेकिन हालत न संभलने पर 28 दिसंबर को उन्हें चरक अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ दिनों के इलाज के बाद 31 दिसंबर को छुट्टी दे दी गई और एक सप्ताह की दवाइयां दी गईं।
परिवार को लगा कि अब स्थिति सुधर रही है, लेकिन पांचवें दिन अचानक फिर से तबीयत बिगड़ गई। 8 जनवरी को उन्हें दोबारा अस्पताल ले जाया गया। एक निजी अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर किया गया और अंततः मेट्रो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद गुरुवार सुबह उनकी मौत हो गई।
Family Claims – पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी
मनीष पंवार का कहना है कि उनकी मां को न तो ब्लड प्रेशर था और न ही डायबिटीज जैसी कोई गंभीर बीमारी। वे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रही थीं। परिवार का आरोप है कि यदि दूषित पानी नहीं होता, तो आज सुभद्राबाई जीवित होतीं। यही नहीं, 25 दिसंबर को मनीष की पत्नी प्रिया भी इसी दूषित पानी से बीमार हो गई थीं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
परिवार के अनुसार, मां के इलाज में लगभग डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए, जबकि पत्नी के इलाज में भी करीब 38 हजार रुपये गए। यह खर्च मध्यमवर्गीय परिवार के लिए किसी बड़े आर्थिक झटके से कम नहीं है। पीड़ित परिवार पूछ रहा है – “क्या यह सब किसी की गलती का नतीजा नहीं है?”
High Court Hearing – सरकार से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
इंदौर में दूषित पानी से मौतों का मामला अब न्यायालय की सख्त निगरानी में है। गुरुवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस विषय पर सुनवाई हुई। मुख्य सचिव अनुराग जैन वर्चुअल माध्यम से कोर्ट में उपस्थित हुए। सरकार की ओर से बताया गया कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित किया गया है और सभी मरीजों का मुफ्त इलाज कराया जा रहा है।
सरकार ने यह भी कहा कि जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें कई को पहले से अन्य बीमारियां थीं। हालांकि कोर्ट ने इस दलील पर संतोष नहीं जताया और स्पष्ट किया कि यह तय करना आवश्यक है कि वास्तव में दूषित पानी से कितनी मौतें हुई हैं। अदालत ने शासन को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई, यानी 20 जनवरी तक एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए।
Hospital Update – ICU में जिंदगी और मौत की जंग
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, भागीरथपुरा दूषित पानी कांड का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। गुरुवार तक कुल 440 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती किए जा चुके हैं, जिनमें से 413 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। फिलहाल 27 मरीज अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 8 मरीज आईसीयू में हैं और 3 मरीज वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
इंडेक्स आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की मदद से इलाके में हेल्थ कैंप लगाए गए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रोजाना उल्टी-दस्त और डायरिया के मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी के प्रभाव से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, डिहाइड्रेशन और संक्रमण तेजी से फैलता है, जो बुजुर्गों और बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
Ground Reality – भागीरथपुरा की सड़कों पर खुदाई और कीचड़
सरकार और नगर निगम ने अब इलाके में नर्मदा पाइपलाइन और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने का काम तेज कर दिया है। भागीरथपुरा टंकी के पास बने गार्डन और चौकी के सामने की सड़क पर जेसीबी से खुदाई की जा रही है। जगह-जगह पाइप रखे हुए हैं और पूरी सड़क उखड़ चुकी है।
इलाके के भीतर जाने पर हालात और भी बदतर नजर आते हैं। चाय की दुकानों और घरों के सामने से गुजरने वाली सड़कें पूरी तरह टूटी हुई हैं। कई जगहों पर कीचड़ फैला हुआ है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को भारी परेशानी हो रही है। रास्ते बंद होने के कारण लोग गलियों से होकर आने-जाने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि काम जरूरी है, लेकिन यह काम पहले क्यों नहीं किया गया? अगर समय रहते ड्रेनेज और पेयजल लाइनों की मरम्मत होती, तो शायद इतने लोगों की जान नहीं जाती।
इंदौर: दूषित पानी के कारण हुई मौतों का विवरण
प्रभावित व्यक्तियों की सूची और दिनांक
| नाम | उम्र | मृत्यु तिथि |
|---|---|---|
| सुमित्रा देवी | 50 | 21 दिसंबर |
| अशोकलाल पंवार | 70 | 24 दिसंबर |
| गोमती रावत | 50 | 26 दिसंबर |
| उर्मिला यादव | 69 | 27 दिसंबर |
| जीवनलाल बरेडे | 75 | 28 दिसंबर |
| सीमा प्रजापत | 35 | 29 दिसंबर |
| संतोष बिगोलिया | 72 | 29 दिसंबर |
| अव्यान साहू | 5 माह | 29 दिसंबर |
| श्रावण खुपराव | 81 | 29 दिसंबर |
| रामकली | 47 | 29 दिसंबर |
| नंदलाल | 75 | 30 दिसंबर |
| उमा कोरी | 29 | 30 दिसंबर |
| मंजूला वाढे | 70 | 30 दिसंबर |
| ताराबाई | 60 | 30 दिसंबर |
| हीरालाल | 65 | 31 दिसंबर |
| अरविंद लिखार | 40 | 1 जनवरी |
| गीताबाई | 60 | 1 जनवरी |
| हरकुंवर बाई | 75 | 1 जनवरी |
| शंकर भाया | 70 | 1 जनवरी |
| ओमप्रकाश शर्मा | 69 | 5 जनवरी |
| सुनीता वर्मा | 49 | 10 जनवरी |
| भगवानदास | 64 | 12 जनवरी |
| सुभद्रा बाई | 78 | 16 जनवरी |
High Court Observations – स्वच्छ पानी मौलिक अधिकार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में सरकार के जवाब को “असंवेदनशील” बताते हुए कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि इस घटना ने “देश के सबसे स्वच्छ शहर” कहे जाने वाले इंदौर की छवि को गहरा आघात पहुंचाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के नागरिकों का मौलिक अधिकार है।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि भविष्य में जरूरत पड़ी, तो दोषी अधिकारियों पर सिविल और क्रिमिनल जिम्मेदारी तय की जा सकती है। पीड़ित परिवारों को दिए गए मुआवजे को लेकर भी अदालत हस्तक्षेप कर सकती है, यदि वह अपर्याप्त पाया गया।
FAQ: भागीरथपुरा दूषित पानी कांड से जुड़े सवाल
भागीरथपुरा में दूषित पानी कैसे पहुंचा?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ड्रेनेज और पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल गया, जिससे सैकड़ों लोग बीमार हुए।
अब तक कितनी मौतें हो चुकी हैं?
ताजा जानकारी के अनुसार इस हादसे में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार और कोर्ट के बीच इसी आंकड़े को लेकर विस्तृत जांच चल रही है।
सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित किया है, सभी मरीजों का मुफ्त इलाज कराया जा रहा है और इलाके में नर्मदा व ड्रेनेज लाइन का काम तेज कर दिया गया है।
आगे क्या होगा?
20 जनवरी को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई होगी। इसमें सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि दूषित पानी से वास्तव में कितनी मौतें हुईं और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या स्थायी कदम उठाए जा रहे हैं।




