ग्वालियर

मासूम की हत्यारी मां को उम्रकैद: प्रेमी के साथ 5 साल के बेटे ने देख लिया था, निर्दयी मां ने दो मंजिला छत से नीचे फेंक दिया

मासूम की हत्यारी मां को उम्रकैद: प्रेमी के साथ 5 साल के बेटे ने देख लिया था, निर्दयी मां ने दो मंजिला छत से नीचे फेंक दिया
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ग्वालियर की अदालत ने 5 साल के बच्चे की हत्या के मामले में उसकी मां को उम्रकैद की सजा सुनाई है। ढाई साल पुराने इस मामले में कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया, जबकि प्रेमी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
  • ग्वालियर कोर्ट ने मां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई
  • 5 साल के बच्चे की हत्या का मामला, ढाई साल बाद आया फैसला
  • परिस्थिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
  • प्रेमी को सबूतों के अभाव में किया गया बरी

Gwalior Court Verdict | ढाई साल बाद मिला न्याय

ग्वालियर की अपर सत्र न्यायालय ने एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाले मामले में अहम फैसला सुनाते हुए एक मां को अपने ही 5 साल के बेटे की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला लगभग ढाई साल पुराना है, जिसमें कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध माना।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भले ही घटना का कोई प्रत्यक्ष प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया, लेकिन उपलब्ध परिस्थितिजन्य प्रमाणों की श्रृंखला इतनी मजबूत है कि उससे आरोपी मां का दोष सिद्ध होता है। वहीं, महिला के कथित प्रेमी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

Case Background | क्या है पूरा मामला

यह घटना 28 अप्रैल 2023 की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला उस समय अपने प्रेमी के साथ घर की छत पर मौजूद थी। इसी दौरान उसका छोटा बेटा वहां पहुंच गया और उसने मां को प्रेमी के साथ देख लिया। इसी बात को लेकर महिला नाराज हो गई।

आरोप है कि इसी गुस्से में उसने बच्चे को दो मंजिला इमारत से नीचे धकेल दिया। बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान अगले दिन उसकी मौत हो गई। अभियोजन के अनुसार, इस पूरे समय महिला न तो बच्चे को देखने पहुंची और न ही उसकी स्थिति को लेकर कोई चिंता दिखाई।

Unusual Silence | 15 दिन तक सामान्य बना रहा माहौल

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बच्चे की मौत के बाद भी लगभग 15 से 20 दिनों तक घर और आसपास सब कुछ सामान्य दिखाई देता रहा। पड़ोसियों, रिश्तेदारों और परिवार के अन्य सदस्यों को इस घटना को लेकर कोई खास शक नहीं हुआ।

किसी को यह आभास तक नहीं था कि जिस मां को लोग शोकग्रस्त समझ रहे हैं, वही इस वारदात की मुख्य आरोपी है। मामला तब पलटा, जब स्वयं महिला ने अपने पति से बातचीत के दौरान सच्चाई उजागर की।

ऐसे खुला राज | पति तक कैसे पहुंची सच्चाई

घटना के लगभग 15 दिन बाद आरोपी महिला का मनोबल टूटने लगा। अपराधबोध और डर ने उसे अंदर से झकझोर दिया। इसी दौरान उसने अपने पति से कहा—“मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।” पति ने उसे भरोसा दिलाया और पूरी बात बताने के लिए कहा।

पति ने जब शांतिपूर्वक पूछा कि आखिर क्या हुआ था, तो महिला भावुक हो गई और उसने पूरी घटना स्वीकार कर ली। उसने बताया कि गुस्से में आकर उसने अपने ही बेटे को छत से नीचे फेंक दिया था। यह सुनकर पति स्तब्ध रह गया। उसने कहा—“एक छोटे बच्चे ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था?”

Evidence Trail | रिकॉर्डिंग और CCTV बने कड़ी

पति ने बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी। इसके बाद घर में लगे CCTV कैमरों के फुटेज निकलवाए। इन दोनों साक्ष्यों से पूरा घटनाक्रम स्पष्ट होने लगा। पति ने किसी तरह की जल्दबाजी नहीं की, बल्कि सारे प्रमाण इकट्ठा किए।

पूरे साक्ष्यों के साथ वह मुरार थाना पहुंचा और पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज किया और महिला के साथ उसके कथित प्रेमी को भी आरोपी बनाया। जांच के बाद न्यायालय में चालान पेश किया गया।

In Court | सुनवाई और फैसला

मामले की पैरवी लोक अभियोजक विजय शर्मा ने की। कोर्ट में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला रखी गई—रिकॉर्डिंग, CCTV फुटेज, अस्पताल के दस्तावेज और पारिवारिक बयान। अदालत ने माना कि प्रत्यक्षदर्शी न होने के बावजूद साक्ष्यों की कड़ी आरोपी महिला की ओर ही इशारा करती है।

न्यायालय ने महिला को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, प्रेमी को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण बरी कर दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि यह अपराध समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है।

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Breaking News • Daily Updates

मामला कब का है?

यह घटना 28 अप्रैल 2023 की है, जिसमें 5 साल के बच्चे की मौत हुई थी।

कोर्ट ने महिला को क्या सजा दी?

अपर सत्र न्यायालय ने आरोपी मां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

प्रेमी को क्यों बरी किया गया?

कोर्ट में प्रेमी के खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं हो सके, इसलिए उसे दोषमुक्त किया गया।

यह फैसला समाज के लिए क्या संदेश देता है?

यह फैसला बताता है कि कानून के सामने कोई भी अपराध छिपा नहीं रह सकता और मासूमों के साथ हुई क्रूरता पर न्याय अवश्य मिलता है।


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