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मसाला डोसा छुरी-कांटा से क्यों काटा जाता है : GK IN HINDI

मसाला डोसा छुरी-कांटा से क्यों काटा जाता है : GK IN HINDI
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GK IN HINDI: आमतौर पर हर बड़े होटल में मसाला डोसा खाने के लिए छुरी कांटे दिए जाते हैं। लोगों द्वारा छोरी कांटे का इस्तेमाल भी किया जाता है।

GK IN HINDI: आमतौर पर हर बड़े होटल में मसाला डोसा खाने के लिए छुरी कांटे दिए जाते हैं। लोगों द्वारा छुरी कांटे का इस्तेमाल भी किया जाता है। लेकिन कभी आपने सोचा है कि मसाला डोसा के साथ छुरी काटे क्यों दिए जाते हैं। क्या मसाला डोसा को हाथ से खाया जाए तोड़कर तो उसके कुछ तत्व बदल जाएंगे क्या। छुरी कांटा और मसाला डोसा के बीच ऐसा कौन सा समझौता है जिसे न चाहते हुए भी लोगों कों अपनाना पड़ रहा है। आज हम छुरी-कांटे के संबंध का खुलासा करेंगे।

कैसे विकसित हुई परंपरा

मसाला डोसा और छुरी-कांटे का संबंध कैसे बना हमें जानकारी हासिल करने के पूर्व यह जानना आवश्यक है कि मसाला डोसा की शुरुआत कहां और कैसे हुई। जानकारों की माने तो कहा जाता है कि यह दक्षिण भारत का एक प्रमुख व्यंजन है। जिसे दक्षिण भारत के हलवाई पूरे देश में फैला दिए हैं।

दक्षिण भारत का है व्यंजन

कहा जाता है कि दक्षिण भारत में एक समय ऐसा आया जब हलवाईयों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ा। ऐसे में दक्षिण भारतीय हलवाई रोजगार की तलाश में उत्तर भारत का रुख करते हुए कई राज्यों में पहुंचे और मसाला डोसा को एक अलग व्यंजन के रूप में पेश किया गया। लोगों ने इसे खूब पसंद भी किया। ऐसे में हमारे यहां के व्यापारी इसमें मुनाफा देखने लगे और कुछ परिवर्तन कर दिया।

केले के पत्ते में परोसा जाता था

पहले मसाला डोसा केले के पत्ते पर परोसा जाता था। लेकिन जब यह बड़े होटलों की शान बना तो केले के पत्ते हटाकर मैगी डिजाइनर प्लेट रखती गई। साथ ही इसे विशेष फैशन में शामिल करते हुए छुरी कांटे के साथ परोसा जाने लगा।

हमारा कहने का मतलब यह हुआ कि छुरी कांटे से मसाला डोसा खाने का प्रचलन एक भी वीआईपी व्यवस्था के तहत शामिल किया गया। जो बाद में अनिवार्य दिखने लगा।

आलू के पराठे खाने जैसा है मसाला डोसा

वहीं जानकारों का कहना है कि मसाला डोसा खाना हमारे यहां के आलू के पराठे जैसा है। इसे हाथ से तोड़कर विधिवत खाया जा सकता है। कई बार तो लोग सिर्फ छुरी कांटे की वजह से बड़े होटलों में मसाला डोसा खाने से कतराते थे।

नोट-ः उक्त समाचार में दी गई जानकारी सूचना मात्र है। रीवा रियासत समाचार इसकी पुष्टि नहीं करता है। दी गई जानकारी प्रचलित मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।

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