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पेसा एक्ट क्या है? जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शहडोल पहुंचकर लागू किया है

Abhijeet Mishra | रीवा रियासत
15 Nov 2022 3:31 PM IST
Updated: 2026-02-06 12:42:00
पेसा एक्ट क्या है? जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शहडोल पहुंचकर लागू किया है
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What is PESA Act: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने (President Draupadi Murmu) 15 नवंबर को मध्य प्रदेश के शहडोल (Shahdol) से पंचायत अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार लागू किया है

पेसा एक्ट क्या है: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Of India Draupadi Murmu) 15 नवंबर को पहली बार मध्य प्रदेश पहुंचीं। एमपी के शहडोल जिले में उनका हेलीकॉप्टर दोपहर 2 बजे लैंड हुआ। यहां महामहिम बिरसा मुंडा जयंती (Birsa Munda Jayanti) के मौके पर आयोजित जनजातीय गौरव दिवस समारोह में बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुईं। लालपुर हवाई पट्टी में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

द्रौपदी मुर्मू ने इस मौके पर पेसा एक्ट (PESA Act) लागू कर दिया है, जिसका मतलब 'पंचायत अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार' है। इससे अनुसूचित क्षेत्रों की ग्राम सभाओं को अधिकार देकर आदिवासियों को सशक्त बनाया जाएगा। पेसा एक्ट क्या है? इससे क्या लाभ होगा? इसके बारे में हम विस्तार से जानते हैं।

PESA Act क्या है

What Is PESA Act In Hindi: पेसा एक्ट का फुलफॉर्म 'Panchayat Extension to Scheduled Areas' है। इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा मध्य प्रदेश के आदिवासियों (Tribals Of Madhya Pradesh) के अधिकारों के लिए लागू किया गया है।

पेसा अधिनियम की पूरी जानकारी

PESA Act Full Information: जब भारत का संविधान तैयार किया गया था, तब इसमें द्विस्तरीय व्यवस्था की गई थी—पहला संसद और दूसरा विधानसभा। बाद में तीसरी व्यवस्था शुरू की गई जिसे हम 'पंचायती राज व्यवस्था' कहते हैं। मगर यह व्यवस्था अनुसूचित क्षेत्रों में सीधे लागू नहीं हो सकती थी।

चूंकि आदिवासियों और उनके क्षेत्रों की परिस्थितियां अन्य शहरी और ग्रामीणों से अलग थीं, इसीलिए दिलीप सिंह भूरिया की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी। इसके बाद साल 1996 में पंचायती राज व्यवस्था में अनुसूचित क्षेत्रों के विस्तार के लिए पेसा कानून की शुरुआत हुई।

पेसा एक्ट का क्रियान्वयन और इतिहास

1996 में मध्य प्रदेश पंचायती राज को लागू करने वाला पहला राज्य बना था। 1998 तक इसके सभी नियम बन जाने थे, जिनमें आदिवासियों को 15 विशेष अधिकार मिलने थे। 2014 में एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनजातीय वर्ग के विकास के लिए इस पर संज्ञान लिया। ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (TAC) में लंबी चर्चा और बैठकों के बाद 22 सितंबर 2022 को पेसा नियम का ड्राफ्ट आया। इसमें जल, जंगल, और जमीन से लेकर संस्कृति संरक्षण के विशेष उपबंध बनाए गए।


पेसा एक्ट मतलब जल, जंगल और जमीन

1. जमीन (Land Rights)

  • अब ग्राम सभा को मिट्टी के कटाव और जल संचयन की व्यवस्था कृषि विभाग के जरिए करने का अधिकार होगा।
  • ग्राम सभा आदिवासियों को वित्त वर्ष का नक्शा और खसरा देगी, जिससे उन्हें तहसील के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
  • आदिवासियों की जमीन का लैंड-यूज़ बिना सूचना के बदला नहीं जा सकेगा।
  • गैर-आदिवासी को गलत तरीके से मिली जमीन वापस लेने का अधिकार ग्राम सभा के पास होगा।

2. जल (Water Rights)

  • अब तक वन विभाग के पास रहने वाले नदी-तालाबों के अधिकार अब ग्राम सभा के पास होंगे।
  • 40 हेक्टेयर तक के तालाबों के प्रबंधन, संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी ग्राम सभा की होगी।
  • आदिवासी इन छोटे तालाबों में मछली पालन कर सकेंगे।

3. जंगल (Forest Rights)

  • ग्राम सभा के पास जंगलों में होने वाले अवैध खनन को रोकने का अधिकार होगा।
  • जनजातीय स्व-सहायता समूह अब जंगल के खनिक टेंडर और तेंदूपत्ता के टेंडर में भाग ले सकेंगे।

पेसा एक्ट के प्रमुख लाभ

  • श्रमिकों का पूरा रिकॉर्ड दर्ज होगा ताकि उनका शोषण न हो सके।
  • गांवों में न्यूनतम मजदूरी के बोर्ड लगेंगे; शिकायत होने पर ग्राम सभा सख्त कदम उठाएगी।
  • शराब की दुकान कहां और कितनी खुलेगी, इसका फैसला भी अब ग्राम सभा ही करेगी।
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