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Samudra Gupt : इतिहास जो गलत पढ़ाया लेकिन अब सुधारने की है ज़रूरत

Abhijeet Mishra
2 Oct 2021 11:16 AM GMT
Samudra Gupt : इतिहास जो गलत पढ़ाया लेकिन अब सुधारने की है ज़रूरत
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गोरे लोगों की जितनी बुद्धि चली उन्होंने इस्तेमाल की अब हम लोग उनके बताए इतिहास को क्यों सच मानते है भाई।

सम्राट समुद्र गुप्त के शासन काल को भारतवर्ष का स्वर्ण युग माना जाता था उन्होंने उत्तर से लेकर दक्षिण तक अपना आधिपत्य जमा दिया था। उनकी गिनती भारत के सबसे पराक्रमी और सर्वश्रेष्ठ सम्राटों में होती है लेकिन समुद्र्गुप्त की महानता की तुलना भारतवासी और यहाँ का सिस्टम नेपोलियन से करता है जो बात बेहद दुर्भायपूर्ण है। पता है दिक्क्त कहाँ आ रही है कि हम जो इतिहास पढ़ते आ रहे है न वो किसी भारतीय ने नहीं लिखी है बल्कि 200 सालों तक हमपर राज करने वाले गोरे फिरंगियों ने लिखी है। ससुरे जानते सब थे लेकिन जानबूझ कर हमसे हमारा इतिहास छुपा लिए ताकि हमारी गुलामी की मानसिकता और अंग्रेजों की इज़्ज़त बनी रहे।आज हम आज़ाद है लेकिन इतिहास वाली गुलामी वाला पढ़ते है। इतना ही नहीं ये झूठे इतिहास इस कदर भारत वासियों के ज़हन में घुसेड़ दिया गया है की सरकारी परीक्षा में भी पूछा जाता है की बच्चो बताओ भारत का नेपोलियन कौन था।

कौन थे समुद्रगुप्त

335 से लेकर 380 AD तक भारत में राज करने वाले पराक्रमी सम्राट थे समुद्र गुप्त जो गुप्त डाइनेस्टी के चौथे उत्तराधिकारी थे। उनके शासन काल से भारत में स्वर्णयुग की शुरुआत मानी जाती है। समुद्रगुप्त एक साहसी, शक्तिशाली,उदार और कला के संरक्षक थे। वो इतने प्रतापी राजा थे की उनके जीवित रहते कभी उन्होंने पराजय का स्वाद नहीं चखा , जिस राज्य में उनकी नज़र पड़ती उसे वो जीत लेते। प्रयाग के प्रशस्ति में यह ज़िक्र किया गया है की पूरे पृथ्वी में ऐसा कोई नहीं था जो उन्हें हरा सकता था।

गांधार से लेकर असम और हिमालय से सिंघल तक साम्राज्य बना लिया था

समुद्र गुप्त की एक चाहत थी पूरे भारत को एक राष्ट्र बनाने की। जो उन्होंने पूरी भी कर दी थी पश्चिम में गांधार से लेकर पूर्व में असम तक और हिमालय से लेकर दक्षिण के सिंघल तक उनका शासन था। इससे पहले भारत में सैंकड़ों राज वंशों का राज हुआ करता था जिसे समुद्र गुप्त ने पराजित कर एक राष्ट्र बना दिया था. समुद्र गुप्त की राजधानी पाटलीपुत्र थी जो वर्तमान में अब पटना के नाम से जाना जाता है , समुद्रगुप्त ने 51 सालों तक राज किया और उनके बाद के उत्ताधिकारियों ने बने बनाए साम्राज्य को संभाल नहीं पाए।

इतिहास में दिक्क्त कहाँ है

दिक्क्त ये है कि समुद्र गुप्त को भारत का नेपोलियन बोला जाता है, और सरकारी परीक्षाओं में भी ये सवाल किया जाता है की भारत का नेपोलियन किसे कहा गया है। अरे बांगडुओ समुद्रगुप्त 335 AD में था तब नेपोलियन क्या उससे पर बब्बा के भी पर बब्बा और उसके भी पर पर बब्बा के बब्बा का कोई वजूद नहीं था। समुद्रगुप्त भारत का नेपोलियन कैसे हो गया भाई। एक इतिहासकार रहा VINCENT SMITH जिसने भारत के सम्राटों का इतिहास लिखा है उसी ने समुद्र गुप्त को भारत का नेपोलियन कहा। और ये भी सवाल परीक्षा में आता है की समुद्र गुप्त को भारत का नेपोलियन किसने कहा ? अरे इतिहासकार ने कह दिया तो उसको सच काहे मान लिए भाई।

हम कहना क्या चाहते हैं

माना की नेपोलियन बहुत बड़ा और शक्तिशाली राजा था। फ़्रांस में वो 1799 में वो शासक बना और 1814 तक सम्राट रहा एक बार हारा और फिर अगले साल अपनी बुद्धि से 1815 में सम्राट बन गया। लेकिन समुद्रगुप्त कैसे भारत का नेपोलियन बन गया ? नेपोलियन 15 अगस्त 1769 में पैदा हुआ और समुद्रगुप्त उससे सदियों पहले पैदा हुए और मर भी गए। इस हिसाब से नेपोलियन को फ़्रांस का समुद्रगुप्त कहना सही होगा ना की समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहना। आप ही बताइये कोई नाती अपने बाबा की तरह दीखता है तो क्या आप ये कहते है की अरे दादाजी तो एक दम छोटू के जैसे दीखते हैं ? नहीं ना ,क्या देश ये कहता है की गांधी जी भारत के नेल्सन मंडेला हैं? नहीं ना ,क्योंकि नेल्सन मंडेला 1918 में पैदा हुए और गाँधी जी 1869 में। नेल्सन मंडेला को साऊथ अफ्रीका का गाँधी बोला जाता है क्यंकि वो उनके आदर्शों पर चलते थे।

अब शायद आपको ये बात समज में आगई होगी की अंग्रेजों ने जो भारत का इतिहास लिखा है उसमे उन्होंने सिर्फ अंग्रेजों का महिमामंडन किया है ,अगर अपने विन्सेंट स्मिथ भाईसाहब नेपोलिन को फ़्रांस का समुद्रगुप्त बताते तो ये साबित हो जाता की भारत के सम्राट ज़्यादा शक्तिशाली थे। लेकिन हाँ परीक्षा में जब ये प्रश्न आये तो भाई आप यही लिख कर आना की हां दादा समुद्रगुप्त भारत का नोपियन था। वरना नंबर कट जाएगा। लेकिन अपना असली इतिहास हमेशा जानते रहिएगा बाकि रीवा रियासत आपको अनसुने अनकहे असली इतिहास के बारे में जानकारी देता रहेगा।

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