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औरंगाबाद का नाम कैसे पड़ा? जिसे उद्धव ठाकरे ने जाते-जाते संभाजी नगर कर दिया, संभाजी कौन थे?

औरंगाबाद का नाम कैसे पड़ा? जिसे उद्धव ठाकरे ने जाते-जाते संभाजी नगर कर दिया, संभाजी कौन थे?
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औरंगाबाद का नाम औरंगाबाद कैसे पड़ा: इसकी कहानी जानने के लिए आपको सन 1548 में जाना होगा

औरंगाबाद का इतिहास: महाराष्ट्र की पूर्व MVA सरकार ने जाते-जाते राज्य के दो शहरों के नाम बदल डाले। औरंगाबाद का नाम संभाजी नगर कर दिया और उस्मानाबाद का नाम धाराशिव रख दिया। भारत में जिलों/शहरों के नाम बदलने का प्रचनल कोई आज का नहीं है. जिन लोगों ने जहां हुकूमत की उस इलाके का नाम बदल दिया। पहले मुग़लों और इस्लामिक आक्रांताओं ने अपने अनुसार नाम बदले और अब राज्य सरकारें मुग़लों के रखें नामों को बदल रही हैं.

खैर शहरों के नाम बदले के टॉपिक में पड़ गए तो आर्टिकल बहुत लंबा खिंच जाएगा इसी लिए अपन सिर्फ औरंगाबाद और औरंगाबाद के नए नाम संभाजी नगर पर बात करेंगे। आज जानेंगे कि औरंगाबाद का नाम औरंगाबाद कैसे पड़ा, किसने रखा और नया नाम संभाजी नगर किनके नाम पर और क्यों रखा गया.

औरंगाबाद का नाम औरंगाबाद कैसे पड़ा

How Did Aurangabad City Get Its Name: औरंगाबाद महाराष्ट्र के ऐतिहासिक शहर रहा है. 1610 में अहमदनगर साम्राज्य के सिद्दी जनरल मलिक अबंर (Malik Ambar) ने औरंगाबाद को बसाने का काम किया था. मलिक अंबर एक अफ़्रीकी ग़ुलाम था जो बाद में योद्धा और उसके बाद बादशाह बन गया था.

मलिक अंबर कौन था

Who Was Malik Ambar: मलिक अंबर अफ़्रीकी गुलाम था, वो अपने घर इथियोपिया से भारत आया था. यहां आने के बाद उसे न सिर्फ गुलामी से आज़ादी मिली थी बल्कि उसे यहां योद्धा करार दे दिया गया था. उसने ही औरंगाबाद शहर की स्थापना की थी लेकिन उस वक़्त औरंगाबाद का नाम खिरकी या खिड़की रखा गया था. मलिक अंबर का जन्म दक्षिणी इथियोपिया के खंबाटा में 1548 में हुआ था. वो ओरोमो जनजाति से ताल्लुख रखता था. उसे अरब देशों के शेखों ने खरीद लिया था. इतिहासकारों का मानना है कि मलिक़ अंबर पहले से ही एक लड़ाकू था, जिसकी ताकत देखते हुए सौदागरों ने उसे उसके माता-पिता से खरीद लिया था.मलिक अंबर के मरने के बाद उसके बेटे ने 1626 में खिरकी शहर का नाम बदलकर इसे फतेरपुर कर दिया था.

कैसे पड़ा औरंगाबाद नाम

जब भारत में इस्लामिक आक्रांताओं का आक्रमण हुआ तो हिंदुस्तान के बड़े भौगोलिक क्षेत्र में उन आतंकियों का कब्ज़ा हो गया था. मुग़लों की नज़र फतेरपुर में में भी पड़ गई थी. 1653 में ओरंगजेब ने जब दक्क्न में हमला किया तो इस शहर को अपनी राजधानी बना लिया। यहीं से उसने फरतेरपुर का नाम बदलार औरंगाबाद बाद कर दिया था.

औरंगाबाद का नाम औरंगाबाद किसने रखा था

Who named Aurangabad as Aurangabad: मुगलिया आतंकी औरंगजेब ने 1653 में फरतेरपुर का नाम बदलकर औरंगाबाद किया था

संभाजी कौन थे

Who Was Sambhaji : उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र से अपनी सत्ता गंवाने के एक दिन पहले 29 जून 2022 के दिन औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजी नगर कर दिया। संभाजी महान योद्धा और महाराजा छत्रपति शिवाजी के बेटे और उत्तराधिकारी थे. जिनकी 1689 में ओरंगजेब ने हत्या करवा दी थी.




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