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शारदा पीठ का इतिहास: पीओके में मौजूद शारदा शक्तिपीठ की कहानी, जहां 75 साल से कोई हिन्दू नहीं गया

शारदा पीठ का इतिहास: पीओके में मौजूद शारदा शक्तिपीठ की कहानी, जहां 75 साल से कोई हिन्दू नहीं गया
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Story of Sharda Shaktipeeth POK: 18 महाशक्तियों में से एक शारदा शक्तिपीठ वह स्थल है जहां माता सती का दायां हाथ गिरा था, बदकिस्मती से इस प्राचीन मंदिर में अब कोई हिन्दू नहीं जा पाता है

History of Sharda Shaktipeeth Of POK: देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने POK में मौजूद प्राचीन शारदा शक्तिपीठ का मुद्दा उठाया है, तभी से लोगों में शारदा शक्तिपीठ के इतिहास को जानने की जिज्ञासा बढ़ गई है. हम आपको शारदा शक्तिपीठ की कहानी बताते हैं. यह ऐसा प्राचीन हिन्दू मंदिर है जहां पिछले 75 सालों से कोई भी हिन्दू दर्शन पाने के लिए नहीं पहुंच पाया है. क्योंकि शारदा शक्तिपीठ पाक अधिकृत कश्मीर मतलब POK में मौजूद है.


शारदा शक्तिपीठ की कहानी और इतिहास जानने से पहले ये जानिए कि रक्षामंत्री ने शारदा शक्तिपीठ के बारे में क्या कहा?

''पाक अधिकृत कश्मीर यानी PoK, भारत का हिस्सा था, भारत का हिस्सा है और रहेगा। ऐसा कैसे हो सकता है कि भगवान शिव के रूप में बाबा अमरनाथ हमारे साथ हैं और मां शारदा शक्ति LoC के दूसरी ओर हैं।" राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री भारत

शारदा शक्तिपीठ का इतिहास:


History of Sharda Shaktipeeth POK: कश्मीरी पंडितों की कुलदेवी माँ शारदा हैं मतलब माँ सरस्वती। पीओके में मौजूद शारदा पीठ कश्मीरी पंडितों का तीर्थस्थल हुआ करता था.

नमस्ते शारदा देवी कश्मीर पुर वासिनी त्वम अहम् प्रथये नित्यं विद्याधनं चे दे ही माही।'

अर्थात 'माँ आपको प्रणाम, कश्मीर की निवासी, मैं आपकी प्रशंसा करता हूं. मुझे ज्ञान और धन दो.

शारदा पीठ कभी हिन्दुओं का तीर्थस्थल हुआ करता था, यह 18 अष्टादश महाशक्ति पीठों में से एक है.

शारदा पीठ मंदिर का इतिहास

History of Sharda Peeth Temple POK: इतिहासकारों के अनुसार कश्मीर में शारदा शक्तिपीठ का निर्माण 5 हज़ार साल पहले हुआ था, वहीं कुछ का मानना है कि शारदा शक्तिपीठ को 272 BC में सम्राट अशोक के वक़्त बनवाया गया था. शारदा शक्तिपीठ का आर्किटेक्चर कश्मीर के मार्तण्ड सूर्यमंदिर जैसा है जिसका निर्माण राजा ललितादित्य ने करवाया था.

शारदा शक्तिपीठ का निर्माण किसने करवाया था


Who built the Sharda Shaktipeeth POK: शारदा पीठ का निर्माण पहली सदी में कुषाण वंश के शासन में होना बताया जाता है,वहीं शारदा मंदिर पर स्टडी करने वाले फैज उर रेहमान का कहना है कि शारदा पीठ का निर्माण कश्मीर के कर्कोटा राजवंश के राजा ललितादित्य मुक्तपीड़ ने करवाया था.

  • शारदा शक्तिपीठ का उल्लेख नीलमत पुराण में मिलता है जिसे छटवी शताब्दी में लिखा गया था, नीलमत पुरान कश्मीर के इतिहास के बारे में बताने वाली सबसे प्राचीन ग्रन्थ है.
  • वहीं 11 वीं सदी में कश्मीरी कवि बिल्हाड ने शारदा पीठ और यहां के अध्यात्म और शिक्षा के बारे में लिखा था
  • 11 वीं सदी में भारत आने वाले फ़ारसी विद्वान् अल-बरुनी ने मुल्तान के सूर्य मंदिर, स्थानेश्वर के महादेव मंदिर और सोमनाथ के साथ शारदा शक्तिपीठ के बारे में अपनी किताब में लिखा था.
  • 12 वीं सदी में कश्मीरी कवि कल्हण की पुस्तक राजतरंगिणी में माँ शारदा शक्तिपीठ को सबसे प्रमुख पूजा स्थल बताया गया था
  • 16 वीं सदी में अकबर के नवरत्नों में से एक 'अबुल फजल' ने शारदा शक्तिपीठ को महान पूजा स्थल बताया था. फजल ने लिखा था कि- ''शुक्ल पक्ष की हर आठवीं तिथि को मंदिर हिलने लगता है और सबसे ज्यादा असाधारण प्रभाव पैदा करता है।'

शारदा शक्तिपीठ की कहानी

Story of Sharda Shaktipeeth: शारदा पीठ 18 महाशक्ति पीठों में से एक है, मान्यता है कि यहीं माता सती का दायां हाथ गिरा था, जब देवी सती की मृत्यु हुई थी तब शोक में भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर तीनों लोकों में घूम रहे थे, सांसर को शिव के क्रोध से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए थे. जो धरती के अलग-अलग हिस्सों में गिरे थे. यह सभी क्षेत्र शक्तिपीठ कहलाए थे. जहां आज माता शक्ति मतलब माँ पार्वती या माँ दुर्गा के मंदिर हैं.

ज़्यादातर शक्तिपीठ भारत में हैं, और कुछ नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान में हैं. POK का शारदा शक्तिपीठ इन्ही में से एक है.

शारदा पीठ की पुरानी तस्वीर


Old picture of sharda peeth: शारदा पीठ सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं था, अद्यात्म और शिक्षा का केंद्र था जैसा पूरा कश्मीर हुआ करता था. शारदा पीठ विश्वविद्यालय था जहां पढ़ने के लिए विदेशों से भी लोग आते थे. यहां की लिपि शारदा लिपि थी और कश्मीर का नाम इसी ली शारदा देश पड़ा था. मतलब मां सरस्वती का देश.

शारदा शक्तिपीठ विश्वविद्यालय में 5 हज़ार छात्र पढ़ते थे, नालंदा के पहले यहां दुनिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी थी. जिस तरह तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय थे वैसी ही महत्ता शारदा शक्तिपीठ की थी. यहीं शंकराचार्य और कश्मीरी कवि कल्हण ने पढाई की थी.

शारदा शक्तिपीठ मंदिर कहां है

Where is Sharda Shaktipeeth Temple: शारदा शक्तिपीठ कश्मीर है और POK में है. यह पीठ नीलम, मधुमती और सरगुन नदी के संगम के पास हरमुख पहाड़ी पर 6500 फ़ीट की ऊंचाई पर है.कश्मीर के कुपवाड़ा से सिर्फ 30 किमी दूर शारदा शकितपीठ मंदिर है. लेकिन जब भारत-पाक बटवारा हुआ तब जम्मू-कश्मीर के तीन प्रमुख स्थल पाकिस्तान के हो गए जिनमे शारदा शक्तिपीठ भी शामिल था.

खंडहर में तब्दील हो चुका है शारदा शक्तिपीठ


शारदा शक्तिपीठ में अब कुछ नहीं बचा है, पाकिस्तानियों ने यहां से पत्थर चुराकर अपने घर बना लिए है. यहां अब कोई मूर्ति भी नहीं है. यहां सिर्फ बचे हैं तो पत्थर और धंसकी हुई दीवारें।

2009 में प्रकाशित हुई किताब 'कल्चरल हेरिटेज ऑफ कश्मीरी पंडित्स' (Cultural Heritage of Kashmiri Pandits) में कश्मीरी लेखक अयाज रसूल नाजकी ने शारदा पीठ से जुड़ी एक लोक कथा का जिक्र किया था.। उन्होंने लिखा था- "अच्छाई और बुराई के बीच युद्ध के दौरान देवी शारदा ने ज्ञान के पात्र की रक्षा की थी। शारदा देवी ये पात्र लेकर घाटी में गईं और उसे एक गहरे गड्ढे में छिपा दिया। इसके बाद उन्होंने उस पात्र को ढंकने के लिए खुद को एक ढांचे में बदल लिया। अब यही ढांचा शारदा पीठ के रूप में खड़ा है।"


इस मंदिर की ओर जाने वाली सीढ़ियों की चौड़ाई लगभग 10 फीट है। इनमें से हर एक सीढ़ी करीब एक फुट ऊंची है और 2 से 3 फीट गहरी है।

1947 में जब बंटवारा हुआ था तब मंदिर में जाने वाले आखिरी कश्मीरी पंडित 'पृथ्वीनाथ कौल बामजई' ने बताया था कि POK में जाने के बाद शारदा शक्तिपीठ की क्या हालत हो गई थी, उन्होने बताया था- "मंदिर में कोई मूर्ति नहीं थी, लेकिन एक बहुत बड़ा चबूतरा था और बाहर एक शिवलिंग मौजूद था। मंदिर के मुख्य प्रांगण का व्यास 22 फीट यानी करीब 72 फीट था। इसका प्रवेश द्वार पश्चिम की ओर था। अन्य प्रवेश द्वारों के ऊपर तोरण बने थे, और ये तोरण 20 फुट ऊंचे थे। मुख्य द्वार पर पगडंडियां थीं। बरामदे के दोनों किनारों पर दो चौकोर आकार के पत्थर के स्तंभ थे, जो 16 फीट ऊंचे और करीब 2.6 फीट चौड़े थे। मंदिर के अंदर का निर्माण बहुत सादा और कम सजावट वाला था"

शारदा शक्तिपीठ में हर साल मेला लगता था लेकिन POK में जाने के बाद यहां सब कुछ खत्म हो गया.

75 साल से कोई हिंदू ने यहां दर्शन नहीं किए


1947 के बाद से यहां भारतीय तीर्थ यात्रियों के जाने में पाबन्दी लग गई, उसके बाद से लेकर 2007 तक मंदिर को पाकिस्तानी तोड़ते रहे, 2005 में आए भूकंप से मंदिर और भी जर्जर हो गया. 2007 में पूर्व गृहमंत्री लालकृष्ण अडवाणी ने पाकिस्तान सरकार से मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए मांग की थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ. 2019 में जब मोदी सरकार ने सिखों के लिए पाकिस्तान का करतारपुर कॉरिडोर खुलवा दिया तब हिन्दुओं ने शारदा शक्तिपीठ जाने की मांग भी तेज़ कर दी. लेकिन अबतक भारत सरकार ने इसपर कोई काम नहीं किया। अब जाकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शारदा शक्तिपीठ का मुद्दा उठाया है.

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