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तैमूर को नहीं मिलेगी पटौदी खानदान की पुश्तैनी दौलत में से एक भी फूटी-कौड़ी, जानिए क्यों?

तैमूर को नहीं मिलेगी पटौदी खानदान की पुश्तैनी दौलत में से एक भी फूटी-कौड़ी, जानिए क्यों?
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सैफ अली खान पटौदी अपने बच्चों में अपनी पुश्तैनी प्रॉपर्टी नहीं बांट सकते। जानिए क्या है कारण...

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक चॉकलेट बॉय के रूप में शुरुआत करने वाले सैफ अली खान (Saif Ali Khan) ने बहुत कमाल का अभिनय किया है और आज की तारीख में अपने आप को एक बेहतरीन अभिनेता के रूप में स्थापित भी किया है। सैफ अली खान की मां भी मशहूर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर (Actress Sharmila Tagore) है और उनके पिता मंसूर अली खान पटौदी (Mansoor Ali Khan Pataudi) मशहूर क्रिकेटर थे।सैफ अली खान पटौदी जिन्हें हम नवाब भी कहते हैं, उन्हें नवाब का उपनाम अपने परदादा यानी हमीदुल्लाह खान पटौदी (Hamidullah Khan Pataudi) से मिला है।

5000 करोड़ के मालिक हैं सैफ (Saif Ali Khan Property)


नवाब खानदान से ताल्लुक होने की वजह से सैफ अली खान के के पास खूब सारी पुश्तैनी प्रॉपर्टी है जिसमें उनके खानदान की कई सारी पुश्तैनी चीजें शामिल है और एक अनुमान के अनुसार पुश्तैनी प्रॉपर्टी की कीमत करीब 5000 करोड़ रुपए है।

किसी भी बच्चे को नहीं दे सकते सैफ 5000 करोड़ का एक भी हिस्सा


सैफ अली खान (Saif Ali Khan) चाह कर भी ये 5000 करोड़ की प्रॉपर्टी अपने बच्चों में नहीं बांट सकते हैं। सैफ के चार बच्चे हैं तलाकशुदा पत्नी अमृता सिंह (Amrita Singh) से सारा अली खान (Sara Ali Khan) और इब्राहिम अली खान (Ibrahim Ali Khan) और दूसरी पत्नी करीना कपूर (Kareena Kapoor) से तैमूर अली खान (Taimur Ali Khan) और जेह अली खान (Jehangir Ali Khan)। उन्हे नवाब का दर्जा देने वाली उनकी पुश्तैनी संपत्ति है। मगर वो इस संपत्ति को अपने चारों बच्चों में से किसी को नहीं दे सकते हैं क्योंकि उनकी संपत्ति और पूंजी भारत सरकार के विवादास्पद शत्रु विवाद अधिनियम के अंतर्गत आती है।

क्या है शत्रु विवाद अधिनियम (Enemy Disputes Act)


शत्रु विवाद अधिनियम (Enemy Disputes Act) के अनुसार जो भी संपत्ति इस अधिनियम के अंतर्गत आती है, उस संपत्ति का कोई भी उत्तराधिकारी होने का कोई दावा नहीं कर सकता यदि कोई व्यक्ति शत्रु विवाद अधिनियम का विरोध करता है और इस एक्ट में आने वाली संपत्ति पर अपना मालिकाना हक हासिल करना चाहता है तो उसे देश के न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा। वह अपनी बात सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा सकता है।

(दी गई इनफार्मेशन इंटरनेट रिसर्च पर आधारित है। इसका मकसद किसी व्यक्ति विशेष को ठेस पहुंचाना नहीं है)

Article: Ayush Anand

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