क्या जिंदा हैं नाना पाटेकर या सच है निधन की खबर?

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क्या जिंदा हैं नाना पाटेकर या सच है निधन की खबर?

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  • सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबर को पहले माना गया अफवाह, लेकिन डॉक्टरों ने की पुष्टि; गोवा आवास पर सुबह 5:20 बजे हुआ निधन, पोस्टमॉर्टम की तैयारी।

अफवाह नहीं, सच है खबर: सुबह 5:20 बजे तोड़ा दम

सोशल मीडिया पर अक्सर मशहूर हस्तियों को लेकर फर्जी खबरें फैलाई जाती रही हैं, यही वजह है कि जब गुरुवार सुबह नाना पाटेकर के निधन की सूचना आई, तो शुरुआत में किसी को इस पर यकीन नहीं हुआ। लोग इंटरनेट पर सर्च करने लगे कि "क्या नाना पाटेकर सच में जिंदा हैं?"।

हालांकि, हमारे चैनल और आधिकारिक सूत्रों की पड़ताल में यह स्पष्ट हो गया है कि यह खबर बिल्कुल सत्य है। गोवा स्थित उनके आवास पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) आया था।

45 मिनट तक दिया गया CPR, दर्ज हुआ MLC केस

डॉक्टरों की टीम के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट के तुरंत बाद अभिनेता को बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) दिया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें होश में नहीं लाया जा सका।

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शेखर सालकर ने जानकारी दी कि नाना पाटेकर का निधन सुबह 5:20 बजे हुआ। प्रोटोकॉल के तहत पुलिस में मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज कराया गया है और आगे की कानूनी व चिकित्सीय प्रक्रियाओं के तहत पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा।

‘परिंदा’ से ‘क्रांतिवीर’ तक: 3 नेशनल अवॉर्ड और पद्मश्री का सफर

नाना पाटेकर ने अपने अभिनय से हिंदी और मराठी सिनेमा में ऐसा मुकाम हासिल किया जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है:

  • परिंदा (1989): इस क्लासिक फिल्म में अंडरवर्ल्ड डॉन 'अन्ना' के नेगेटिव किरदार के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला।
  • क्रांतिवीर (1994): इस ऐतिहासिक फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (Best Actor) का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • अग्निसाक्षी (1996): इसमें अपने गहन अभिनय के लिए उन्होंने एक और बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड जीता।

सिनेमा जगत में उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2013 में उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से नवाजा था।

'उदय शेट्टी' बनकर हंसाया, 'प्रहार' के लिए ली थी असली आर्मी ट्रेनिंग

गंभीर भूमिकाओं के अलावा नाना पाटेकर ने कॉमेडी में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। फिल्म 'वेलकम' और 'वेलकम बैक' में डॉन 'उदय शेट्टी' का उनका रोल आज भी मीम्स और पॉप-कल्चर का हिस्सा बना हुआ है।

इसके अलावा, 1991 में आई फिल्म 'प्रहार: द फाइनल अटैक' के जरिए उन्होंने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने और उसे यथार्थवादी बनाने के लिए उन्होंने खुद भारतीय सेना के साथ कई हफ्तों की कड़ी ट्रेनिंग ली थी। उनके जाने से भारतीय सिनेमा के एक सुनहरे युग का अंत हो गया है।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
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Shashank Dwivedi | रीवा रियासत
सह-संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक • रीवा रियासत

द सिटी एक्सप्रेस के सह-संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक। नीतिगत विश्लेषण, समसामयिक विषयों पर गहन दृष्टिकोण और क्षेत्रीय समाचार समन्वय। डिजिटल मीडिया आचार संहिता व शिकायत निवारण (Grievance Redressal) के प्रभारी।

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