एंटरटेनमेंट

जानिए कौन है 'ठग्स ऑफ हिंदुस्तान', जिस पर आमिर और अमिताभ निभा रहे है ये अहम किरदार

Aaryan Dwivedi
16 Feb 2021 11:26 AM IST
जानिए कौन है ठग्स ऑफ हिंदुस्तान, जिस पर आमिर और अमिताभ निभा रहे है ये अहम किरदार
x
Get Latest Hindi News, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, Today News in Hindi, Breaking News, Hindi News - Rewa Riyasat

मुंबई। आमिर खान ठग्स ऑफ हिंदोस्तान फिल्म बना रहे हैं। जो इस साल दिवाली पर रिलीज होगी। इस फिल्म में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी एक अहम किरदार निभा रहे हैं।

ये पीरियड फिल्म फिलिप मेडोज टेलर के लिखे उपन्यास 'कन्फेशन्स ऑफ ए ठग' पर आधारित मानी जा रही है। ये उपन्यास पहले 1839 में प्रकाशित हुआ था। उस वक्त भारत में प्रचलित ठगी के काम पर ये कहानी आधारित है। इसका ताना-बाना नामी ठग सईद अमीर अली के इर्द-गिर्द बुना गया है। 19वीं सदी में ये नॉवेल ब्रिटेन में बेस्टसेलर बना था।

इसमें अमीर अली के मां-बाप को लूटा और मार दिया जाता है और फिर ये बच्चा ठगों के बीच बड़ा होता है। इसे इस्माइल नाम का ठग पालता पोसता है और ये अमीर अली बड़ा खतरनाक और कुख्यात ठग बनता है।

ऐसी ही 'ठग्स' की हकीकत

इस फिल्म को लेकर काफी हो-हल्ला मचा है, क्योंकि इसका नाम ही कुछ ऐसा है, जो कई सवाल पैदा करता है। ठग्स शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में गुंडे, लुटेरे, डाकू और हत्यारों की तस्वीर सामने आती है। मगर हकीकत कुछ ऐसी है, जो आपको हैरान कर देगी कि आखिर कौन थे ठग्स ऑफ हिंदोस्तान। उनकी जो छवि बताई गई है, क्या वो ऐसे थे या सच्चाई कुछ और है।

आदिवासी जाति का नाम था ठग

भारत में ठग एक आदिवासी जाति का नाम था, जो घने जंगलों में रहती थी और काली मां की पूजा करती थी। वो कोई चोर, लुटेरे, डकैत डाकू नहीं थे। जब अंग्रेजों ने भारत पर धीरे-धीरे अपना कब्जा जमाना शुरू किया तो ये ठग ही थे, जिन्होंने उनका पुरजोर विरोध किया, क्योंकि अंग्रेज उन जंगलों को खत्म करने पर तुले थे, जिसमें ये पीढ़ियों से रह रहे थे।

अंग्रेजों ने किताबों के जरिए किया था इन्हें बदनाम

जमीन पर कब्जा करने के चक्कर में अंग्रेजों ने एक चाल चली और इनकी छवि खराब करने के लिए ऐसी किताबें छापी, जिसमें इन्हें डकैत, लुटेरे और हत्यारा बताया गया। इसके लिए उन्होंने एट्रोसिटी लिटरेचर का सहारा लिया गया। ऐसी ही एक किताब कन्फेशन्स ऑफ ए ठग 1839 में फिलीप मेडोज टेलर ने लिखी, जिसमें ठग्स को कुख्यात लुटेरा, हत्यारा और डकैत बताया गया। इस किताब को आज भी ठग जाति से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों से जोड़कर देखा जाता है।

ये किताब ही नहीं, ब्रिटिश संसद ने 1871 में क्रिमिनिल ट्राइब्स एक्ट पारित किया। जिसके तहत भारत की कुछ चिन्हित आदिवासी जनजातियों को सामूहिक रूप से मारने का अधिकार अंग्रेजों को दिया गया। इसमें दुधमुंहे बच्चे भी शामिल थे। इसी एक्ट की आड़ में अंग्रेजों ने ठग के अलावा कई आदिवासी जनजातियों पर जमकर जुल्म ढाए। बड़े पैमाने पर इनका कत्लेआम किया गया।

ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि जंगल में रहने वाले ये आदिवासी अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं थे। ऐसे में इन्हें खत्म करने के इरादे से अंग्रेजों ने मनमाने कानून बनाए और उसकी आड़ में भारत पर कब्जा जमाने के अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दिया। इस सामूहिक नरसंहार को सही साबित करने के लिए ब्रिटिश संसद ने कई लेखकों को आर्थिक सहयोग दिया, ताकि वो ठग्स के खिलाफ किताबें लिखें और उन्हें इतना बदनाम कर दें कि समाज उन्हें कभी स्वीकार भी कर सके।

ये ठीक वैसा ही था, जैसा नेटिव अमेरिकन्स और ऑस्ट्रेलिया के मूल बाशिंदो के साथ अंग्रेजों ने किया था।

इसी वजह से आज ठग एक गाली बन चुकी है। इसे हिंसा और अपराध के साथ ही जोड़कर देखा जाता है। जबकि इतिहास को खंगालने के बाद सच्चाई कुछ और ही सामने आई।

Next Story