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दिल्ली शराब नीति घोटाला केस में बड़ा फैसला: CBI मामले में केजरीवाल-सिसोदिया बरी, राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा- पूरे मामले में पर्याप्त सबूत नहीं

Neelam Dwivedi
27 Feb 2026 11:19 AM IST
दिल्ली शराब नीति घोटाला केस में बड़ा फैसला: CBI मामले में केजरीवाल-सिसोदिया बरी, राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा- पूरे मामले में पर्याप्त सबूत नहीं
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दिल्ली शराब नीति घोटाला केस में राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी किया। अदालत ने कहा पर्याप्त सबूत पेश नहीं हुए।

मुख्य बिंदु

  • राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI केस में केजरीवाल और सिसोदिया को बरी किया
  • अदालत ने कहा – आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं
  • ED और CBI दोनों एजेंसियों ने अलग-अलग जांच की थी
  • CAG रिपोर्ट में राजस्व नुकसान का दावा, राजनीतिक बहस तेज

दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में शुक्रवार को बड़ा कानूनी मोड़ आया जब राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश करने में असफल रहा। यह फैसला लंबे समय से चल रहे राजनीतिक और कानूनी विवाद के केंद्र में रहे इस मामले में अहम माना जा रहा है।

क्या बदला इस फैसले से?

CBI केस में बरी होने के बाद अब इस मामले की कानूनी स्थिति और राजनीतिक असर दोनों नए चरण में प्रवेश कर गए हैं।

अदालत का स्पष्ट संदेश

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है। किसी भी आपराधिक मामले में दोष सिद्ध करने के लिए प्रमाणिक, ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य जरूरी होते हैं। अदालत ने पाया कि CBI द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। इसी आधार पर दोनों नेताओं को बरी कर दिया गया।

जांच एजेंसियों की कार्रवाई और टाइमलाइन

इस मामले में दो केंद्रीय एजेंसियों—प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)—ने अलग-अलग केस दर्ज किए थे। मार्च 2024 में ED ने कार्रवाई शुरू की थी। बाद में CBI ने भी मामले में गिरफ्तारी और पूछताछ की। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद दोनों नेता कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे थे।

CBI केस में अब अदालत के फैसले के बाद अभियोजन की दिशा पर सवाल उठे हैं। हालांकि अन्य कानूनी प्रक्रियाएं अलग दायरे में जारी रह सकती हैं।

शराब नीति विवाद की पृष्ठभूमि

दिल्ली सरकार ने 2021 में नई आबकारी नीति लागू की थी, जिसका उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और लाइसेंसिंग सिस्टम को व्यवस्थित करना बताया गया था। बाद में इस नीति को वापस ले लिया गया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि नीति के जरिए कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

आरोपों के बाद जांच शुरू हुई और मामला राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक बहस में बदल गया।

CAG रिपोर्ट और राजस्व नुकसान का दावा

कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की एक रिपोर्ट में संभावित राजस्व नुकसान का दावा किया गया था। रिपोर्ट में लाइसेंस आवंटन प्रक्रिया और कुछ प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि कोर्ट का ताजा फैसला केवल CBI केस से संबंधित है और रिपोर्ट के व्यापक निष्कर्षों पर अंतिम टिप्पणी नहीं करता।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे न्याय की जीत बताया। पार्टी नेताओं ने कहा कि अदालत का निर्णय आरोपों की वैधता पर स्पष्ट संदेश देता है। विपक्ष ने कहा कि वह पूरे मामले की व्यापक जांच की मांग जारी रखेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, खासकर दिल्ली की राजनीति में।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अदालत का फैसला इस बात की याद दिलाता है कि आपराधिक मामलों में साक्ष्य का स्तर अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। केवल दस्तावेजी आरोप या अनुमान पर्याप्त नहीं माने जाते। अदालतों में अभियोजन को हर आरोप को ठोस आधार पर स्थापित करना पड़ता है।

आगे क्या?

CBI केस में बरी होने के बाद यह देखना होगा कि क्या एजेंसी उच्च अदालत में अपील करती है। साथ ही अन्य जांच प्रक्रियाओं का क्या रुख रहता है, यह भी आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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फैसले की प्रमुख बातें

  • CBI केस में आरोप सिद्ध नहीं हुए
  • अदालत ने पर्याप्त सबूत न होने की बात कही
  • राजनीतिक बहस फिर तेज
  • आगे अपील की संभावना
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या दोनों नेता पूरी तरह बरी हो गए?

राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI केस में उन्हें बरी किया है। अन्य कानूनी प्रक्रियाएं अलग दायरे में हो सकती हैं।

अदालत ने क्या आधार दिया?

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश करने में असफल रहा।

क्या CBI अपील कर सकती है?

कानूनन एजेंसी उच्च अदालत में अपील कर सकती है, हालांकि आधिकारिक निर्णय बाद में स्पष्ट होगा।

क्या शराब नीति अब भी विवाद में है?

नीति पहले ही वापस ली जा चुकी है, लेकिन राजनीतिक बहस जारी है।

क्या इस फैसले का चुनावों पर असर पड़ेगा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है।

Neelam Dwivedi

Neelam Dwivedi

Neelam Dwivedi is an experienced digital content editor in the field of journalism. She has been working with the Rewa Riyasat news portal since 2016, managing and editing news content in both Hindi and English. She covers a wide range of topics, including national and international news, politics, sports, technology, health, lifestyle, and social issues. Her work focuses on presenting clear, accurate, and easy-to-understand news for readers while staying updated with the latest trends in digital media.

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