
WPI Neeche Giri: थोक महंगाई दर में गिरावट, 18 महीने बाद सिंगल डिजिट में पहुंची

WPI mein Giravat: थोक महंगाई दर में अक्टूबर माह में गिरावट देखने को मिली। सोमवार को जारी आंकड़े बताते हैं कि होलसेल प्राइस-बेस्ड इन्फ्लेशन (डब्ल्यूपीआई) में गिरावट आई है। गत महीनों की बात करें तो जहां डब्ल्यूपीआई लगातार ऊंचाइयों पर थी उसमें गिरावट आते हुए अक्टूबर माह में 8.39 प्रतिशत दर्ज की गई है। जबकि यह पिछले साल अक्टूबर 2021 में 13.83 प्रतिशत दर्ज की गई थी। सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों में इसमें गिरावट दर्ज की गई है। जो विगत माहों जुलाई में जहां 13.93 प्रतिशत, अगस्त में 12.41 प्रतिशत और सितम्बर में डब्ल्यूपीआई 10.70 प्रतिशत दर्ज की गई थी। लगातार 18 महीनों में डबल डिजिट में बने रहने के बाद डब्ल्यूपीआई अब 19वें महीने में सिंगल डिजिट में आई है।
डब्ल्यूपीआई का क्या पड़ता है असर
Effect of WPI: डब्ल्यूपीआई ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर को प्रभावित करती है। यदि थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक उच्च रहता है तो प्रोड्यूसर इसे उपभोक्ताओं को पास कर देते हैं। सरकार द्वारा केवल टैक्स के जरिए ही डब्ल्यूपीआई को कंट्रोल किया जा सकता है। डब्ल्यूपीआई में ज्यादा वेटेज मेटल, प्लास्टिक, रबर, केमिकल जैसी फैक्ट्रियों से जुड़े सामानों का होता है। हालांकि सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कर सकती है क्योंकि उसे भी सैलरी देना होता है। थोक महंगाई का लंबे समय तक बढ़े रहना चिंता का विषय बन जाता है जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
डब्ल्यूपीआई क्या है?
WPI Kya Hai: थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से जो राशि वसूलता है उसे होलसेल प्राइस इंडेक्स (डब्ल्यूपीआई) कहा जाता है। ये कीमतें थोक में किए गए सौदों से जुड़ी होती हैं। भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल जिसका अर्थ है खुदरा और दूसरी होती है थोक महंगाई। खुदरा महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) भी कहा जाता है। दोनों तरह की महंगाई को मापने के लिए अलग-अलग आइटम को शामिल किया जाता है।




