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केंद्र सरकार की नेशनल रिटेल ट्रेड पॉलिसी क्या है? जो फुटकर दुकानदारों के बिज़नेस को आसान बना देगी

Abhijeet Mishra | रीवा रियासत
7 March 2023 5:30 PM IST
Updated: 2023-03-07 12:00:49
केंद्र सरकार की नेशनल रिटेल ट्रेड पॉलिसी क्या है? जो फुटकर दुकानदारों के बिज़नेस को आसान बना देगी
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What is National Retail Trade Policy: केंद्र सरकार राष्ट्रीय फुटकर व्यापर पॉलिसी लागू करने वाली है

National Retail Trade Policy Kya Hai: केंद्र सरकार जल्द नेशनल ट्रेड पॉलिसी यानी राष्ट्रीय फुटकर व्यापर पॉलिसी को अमल में ला सकती है. इससे देश के फुटकर दुकानदारों का बिज़नेस सहूलियत भरा और आसान हो जाएगा। National Retail Trade Policy के तहत फुटकर दुकानदारों को कई तरह की सुविधाएं देकर उनका व्यापर आसान बनाने की कोशिश की जाएगी।

Industries and Department for Promotion of Internal Trade के जॉइंट सेक्रेटरी संजीव ने बताया है कि सभी रिटेल व्यापारियों के लिए एक बीमा योजना लाई जा रही है. इसमें खास तौर पर छोटे व्यापारियों को मदद मिलेगी। ऑनलाइन रिटेलरों के लिए भी अलग E-Commerce Policy पर केंद्र सरकार काम कर रही है.

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT ने सरकार से नियम कानून को आसान बनाने की मांग की है. KAIT के नेशनल सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि नेशनल रिटेल ट्रेड पॉलिसी में मुख्य रूप से चार चीजें होनी चाहिए:

  1. रिटेलरों पर लागू 20 से ज्यादा कानूनों की जगह सिंगल लाइसेंसिंग पॉलिसी
  2. फुटकर विक्रेताओं को बैंकों व वित्तीय संस्थाओं से रियायती दराें पर कर्ज मिले
  3. दुकानदारों के लिए खास एक्सीडेंटल इंश्योरेंस पॉलिसी लाई जानी चाहिए

  4. ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाना चाहिए।

बता दें कि भारत में रिटेल सेक्टर का मार्केट साइज़ 68.50 लाख करोड़ रुपए का है, जिसमे सबसे बड़ा हिस्सा पारम्परिक दुकानों का है. नॉर्मल फुटकर दुकानों की हिस्सेदारी 81.5% है, जबकि संगठित रिटेलर कंपनियों की हिस्सेदारी 12% और ऑनलाइन सेल्स चैनल की हिस्सेदारी 6.5% है.

अगले 7 साल में 2.5 करोड़ रोजगार तैयार होंगे

सरकार रिटेल सेक्टर में इसी लिए ज़्यादा केंद्रित है क्योंकि इससे देश के करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता है. राष्ट्रीय संवर्धन और सुविधा एजेंसी की रिपोर्ट का कहना है कि रिटेल सेक्टर अभी 3.5 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहा है. ये सेक्टर काफी तेजी से आगे बढ़ सकता है और 2030 तक यह 2.5 करोड़ नए रोजगार पैदा कर सकता है


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