
India-Russia Oil Deal: अमेरिका ने दी 30 दिन की छूट, रूस से तेल खरीद जारी रख सकेगा भारत

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- अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी
- 3 अप्रैल तक वैध रहेगा अमेरिकी ट्रेजरी का स्पेशल लाइसेंस
- मिडिल ईस्ट तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचीं
- भारत समुद्र में मौजूद रूसी टैंकरों से तेल खरीदने पर विचार कर रहा
इजराइल-US बनाम ईरान युद्ध के चलते मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी यह स्पेशल लाइसेंस 3 अप्रैल तक वैध रहेगा, जिससे भारत को पहले से लोड किए गए रूसी तेल कार्गो प्राप्त करने की अनुमति मिल जाएगी। इस कदम से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर तत्काल दबाव कम होने की उम्मीद है।
क्यों दी गई भारत को यह छूट
अमेरिका का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने और सप्लाई में कमी से बचाने के लिए भारत को यह अस्थायी अनुमति दी गई है।
अमेरिका ने क्यों दी 30 दिन की अनुमति
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि यह निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत लिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण साझेदार है और तेल सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए यह अस्थायी कदम उठाया गया है।
अमेरिका का मानना है कि इस छूट से वैश्विक बाजार में तेल की कमी नहीं होगी और कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
अमेरिकी तेल खरीद बढ़ने की उम्मीद
स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अमेरिका चाहता है कि भारत अस्थायी तौर पर रूसी तेल प्राप्त करने के बाद धीरे-धीरे अमेरिकी तेल की खरीद भी बढ़ाए।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका और भारत के बीच ऊर्जा व्यापार संबंध मजबूत हो सकते हैं।
कौन सा रूसी तेल खरीद सकेगा भारत
अमेरिकी ट्रेजरी के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (OFAC) द्वारा जारी लाइसेंस के अनुसार भारत केवल वही रूसी तेल खरीद सकेगा जो 5 मार्च तक टैंकरों में लोड हो चुका है।
इसका मतलब है कि समुद्र में पहले से मौजूद कार्गो की ही डिलीवरी भारत को दी जाएगी। नए अनुबंधों के तहत तेल खरीदने की अनुमति इस लाइसेंस में शामिल नहीं है।
मिडिल ईस्ट युद्ध से बढ़ी तेल कीमतें
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक कर दिया है, जो दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई का प्रमुख मार्ग है।
इस स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़कर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
समुद्र में मौजूद टैंकरों से तेल खरीदने की योजना
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार भारत उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने पर विचार कर रहा है जो इस समय एशियाई जल क्षेत्र या भारतीय समुद्र के पास टैंकरों में मौजूद हैं। अनुमान है कि करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल इन टैंकरों में मौजूद है।
यदि भारत इन टैंकरों से तेल खरीदता है तो परिवहन समय और लागत दोनों कम हो सकते हैं।
भारत के लिए क्यों जरूरी है रूसी तेल
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत तेल आयात करता है। ऐसे में सस्ती कीमतों पर उपलब्ध रूसी तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रूस अक्सर अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों से कम दर पर तेल उपलब्ध कराता है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों की लागत कम होती है और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की संभावना कम मानी जा रही है।
सरकार और तेल कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अमेरिकी छूट से सप्लाई मैनेजमेंट में मदद मिलने की उम्मीद है।
आगे क्या हो सकता है
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
ऐसी स्थिति में भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी।
Join WhatsApp Channel Follow on Google Newsअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट कितने दिनों के लिए मिली है?
अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिनों की विशेष छूट दी है, जो 3 अप्रैल तक वैध है।
क्या भारत नया रूसी तेल खरीद सकता है?
नहीं, केवल वही रूसी तेल खरीदा जा सकता है जो 5 मार्च तक टैंकरों में लोड हो चुका है।
रूसी तेल भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
रूस भारत को रियायती दरों पर तेल उपलब्ध कराता है, जिससे देश में ईंधन कीमतें नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
क्या भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे?
फिलहाल ऐसी संभावना कम है क्योंकि तेल सप्लाई को स्थिर रखने के उपाय किए जा रहे हैं।
मिडिल ईस्ट तनाव का तेल बाजार पर क्या असर पड़ा है?
तनाव के कारण वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
Neelam Dwivedi
Neelam Dwivedi is an experienced digital content editor in the field of journalism. She has been working with the Rewa Riyasat news portal since 2016, managing and editing news content in both Hindi and English. She covers a wide range of topics, including national and international news, politics, sports, technology, health, lifestyle, and social issues. Her work focuses on presenting clear, accurate, and easy-to-understand news for readers while staying updated with the latest trends in digital media.




