
LPG की किल्लत: भारत के पास कितने दिन का बचा है स्टॉक? जंग खिंची तो क्या खाली हो जाएंगे चूल्हे? जानिए हर सवाल के जवाब...

रीवा रियासत न्यूज, नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से अगर आपको अपना गैस सिलेंडर बुक करने में दिक्कत आ रही है या बुकिंग के बाद डिलीवरी नहीं मिल रही, तो आप अकेले नहीं हैं। देश के लाखों घरों में इस वक्त यही हाल है। लोग गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जवाब मिल रहा है— "पीछे से सप्लाई नहीं है।"
इस संकट की असली जड़ भारत से हजारों मील दूर पश्चिम एशिया (West Asia) में मची जंग है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़े इस तनाव ने भारत की रसोई के बजट और सप्लाई दोनों को हिलाकर रख दिया है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए बड़े कदम उठाए हैं।
Q&A तस्वीरों के माध्यम से हम आपको इस पूरे संकट की कहानी समझा रहे हैं:
होर्मुज स्ट्रेट: जहाँ फंसी है भारत की गैस
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% LPG विदेशों से मंगाता है। इसमें से करीब 90% सप्लाई समुद्र के एक बहुत संकरे रास्ते से आती है जिसे 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) कहते हैं। जंग की वजह से यह रास्ता बंद है या वहां जहाजों का आना-जाना बेहद खतरनाक हो गया है। यही कारण है कि भारत आने वाले गैस के टैंकर रास्ते में ही रुक गए हैं।
भारत के पास कितना है 'बफर स्टॉक'? (LPG Buffer Stock in India)
मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी आंकड़ों की मानें तो भारत के पास आमतौर पर 10 से 22 दिन का बफर स्टॉक होता है। यह स्टॉक उन सिलेंडरों और बड़े टैंकों में होता है जो पहले से देश के अंदर मौजूद हैं। अगर आज से सप्लाई पूरी तरह बंद हो जाए, तो भारत करीब 3 हफ्ते तक अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है। हालांकि, सरकार ने अब नए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं।
सरकार का 'मास्टर प्लान': आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू
सप्लाई कम होने पर अक्सर लोग डरकर ज्यादा सिलेंडर जमा करने लगते हैं (Panic Buying)। इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955’ लागू कर दिया है।
जमाखोरी पर रोक: अब कोई भी एजेंसी या व्यक्ति जरूरत से ज्यादा सिलेंडर स्टॉक नहीं कर पाएगा।
रिफाइनरी को आदेश: रिलायंस और IOCL जैसी कंपनियों को आदेश दिया गया है कि वे अपना उत्पादन बढ़ाएं।
नए सप्लायर्स: भारत अब अमेरिका, नॉर्वे और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से गैस मंगाने की तैयारी कर रहा है, ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम हो सके।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
बुकिंग में देरी: अब आपको सिलेंडर रिफिल के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना पड़ सकता है।
कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस के दाम बढ़ने से भारत में भी प्रति सिलेंडर 60 से 110 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
कमर्शियल सप्लाई पर असर: होटल और रेस्टोरेंट को मिलने वाले बड़े सिलेंडरों की सप्लाई कम की गई है ताकि आपके घर की रसोई चलती रहे।
आपको क्या करना चाहिए?
इस संकट के समय में घबराने के बजाय समझदारी से काम लें। अगर आपके पास इंडक्शन कुकटॉप है, तो उसका इस्तेमाल करें। सोलर कुकर या इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर भी इस समय अच्छे विकल्प हो सकते हैं। सबसे जरूरी बात— जब तक बहुत जरूरी न हो, अतिरिक्त सिलेंडर की बुकिंग के लिए भीड़ न लगाएं।
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Aaryan Puneet Dwivedi
Aaryan Puneet Dwivedi is a senior editor and an experienced journalist who has been active in the news industry since 2013. He has extensive experience covering and editing news across multiple fields, including politics, national and international affairs, sports, technology, business, and social issues. He is a state-level accredited journalist recognized by the Madhya Pradesh government. Known for his in-depth understanding of news and current affairs, he focuses on delivering accurate, reliable, and reader-friendly information across all major news categories.




