
होटल-रेस्टोरेंट की मनमानी पर सरकार का हंटर: 'गैस संकट' चार्ज वसूला तो खैर नहीं!

नई दिल्ली। अगर आप भी बाहर खाना खाने के शौकीन हैं और अक्सर होटल या रेस्टोरेंट जाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। अक्सर हम रेस्टोरेंट का बिल चुकाते समय केवल कुल राशि (Total Amount) देखते हैं और उसे पे कर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि आपके बिल में खाने के अलावा और क्या-क्या जोड़ा जा रहा है? हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि कोई भी होटल या रेस्टोरेंट खाने के बिल में अलग से 'गैस चार्ज' या 'LPG चार्ज' नहीं जोड़ सकता।
नींबू पानी पर 'गैस संकट' का चार्ज: आखिर क्या है पूरा मामला?
इस पूरे विवाद की शुरुआत बेंगलुरु के एक कैफे से हुई। यहाँ एक ग्राहक ने दो 'मिंट लेमोनेड' (नींबू पानी) ऑर्डर किए थे। इन दो ड्रिंक्स की कुल कीमत 358 रुपये थी। कैफे ने चालाकी दिखाते हुए पहले तो ग्राहक को 17.90 रुपये का डिस्काउंट दिया, लेकिन फिर बिल में 5% यानी 17.01 रुपये 'गैस क्राइसिस चार्ज' (Gas Crisis Charge) के नाम पर जोड़ दिए।
हैरानी की बात यह है कि नींबू पानी बनाने में गैस का इस्तेमाल न के बराबर होता है, फिर भी ग्राहक से गैस संकट के नाम पर पैसे वसूले गए। जब यह मामला सोशल मीडिया और अधिकारियों तक पहुँचा, तो सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने इस पर कड़ा रुख अपनाया।
CCPA का सख्त फरमान: मेन्यू की कीमत में ही शामिल होंगे सारे खर्च
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अथॉरिटी का कहना है कि होटल या रेस्टोरेंट को अपने सभी 'इनपुट कॉस्ट' (जैसे गैस, बिजली, किराया और स्टाफ का खर्च) को खाने की उन कीमतों में ही शामिल करना होगा जो मेन्यू कार्ड में लिखी गई हैं।
इसका मतलब यह है कि अगर मेन्यू में किसी डिश की कीमत 200 रुपये लिखी है, तो रेस्टोरेंट मालिक बिल में अलग से 5 या 10 रुपये गैस के नाम पर नहीं मांग सकता। अगर कोई रेस्टोरेंट गैस की बढ़ती कीमतों या किसी अन्य ऑपरेशनल खर्च का हवाला देकर बिल में एक्स्ट्रा चार्ज जोड़ता है, तो इसे उपभोक्ता अधिकारों का हनन और नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।
होटल मालिकों को यह समझना होगा कि सर्विस चार्ज पर लगी रोक को किसी और नाम से घुमाकर वसूलना गैरकानूनी है।
सर्विस चार्ज की 'छद्म' वसूली पर सरकार की नजर
जांच में यह भी पाया गया है कि जब से सरकार ने 'सर्विस चार्ज' वसूलने पर सख्ती की है, तब से कई होटल और रेस्टोरेंट नए-नए नाम ढूँढ रहे हैं। कभी इसे 'फ्यूल चार्ज' कहा जाता है, तो कभी 'ऑपरेशनल कॉस्ट'। CCPA ने पाया कि यह सिर्फ सर्विस चार्ज की पाबंदी से बचने का एक तरीका है। सरकार ने साफ़ किया है कि ग्राहकों को भ्रमित करने वाले ऐसे किसी भी चार्ज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पकड़े जाने पर रेस्टोरेंट पर भारी जुर्माना लग सकता है।
अगर आपके बिल में दिखे ऐसा चार्ज, तो तुरंत करें ये काम
एक जागरूक नागरिक के तौर पर आपकी जिम्मेदारी है कि आप गलत बिल का भुगतान न करें। अगर आपको किसी भी होटल या कैफे के बिल में LPG चार्ज, फ्यूल चार्ज या कोई अन्य संदिग्ध फीस दिखाई देती है, तो आप नीचे दिए गए कदम उठा सकते हैं:
- मैनेजमेंट से बात करें: सबसे पहले होटल या रेस्टोरेंट के मैनेजर से कहें कि यह चार्ज अवैध है और इसे बिल से हटाएं।
- हेल्पलाइन 1915: अगर वे मना करते हैं, तो तुरंत नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर 1915 पर कॉल करें। यह सेवा आपकी मदद के लिए ही बनाई गई है।
- NCH मोबाइल ऐप: आप अपने स्मार्टफोन में 'NCH' ऐप डाउनलोड करके भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- ई-जाग्रति पोर्टल: डिजिटल इंडिया के दौर में आप e-Jagriti पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन कंप्लेंट फाइल कर सकते हैं।
- कलेक्टर से शिकायत: आप मामले की लिखित शिकायत जिला कलेक्टर या सीधे CCPA को भी भेज सकते हैं।
ग्राहकों की सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
सरकार के इस कदम का उद्देश्य ग्राहकों को लूटने से बचाना है। अक्सर छोटे-छोटे चार्ज के नाम पर करोड़ों ग्राहकों से करोड़ों रुपये अवैध रूप से वसूल लिए जाते हैं। अब नियम बिल्कुल साफ हैं—खाने की कीमत वही होगी जो मेन्यू में है, केवल उस पर लागू टैक्स (GST) ही अलग से लिया जा सकता है। अगली बार जब आप बाहर डिनर पर जाएं, तो अपने बिल को ध्यान से जरूर देखें।
Rewa Riyasat News Desk
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