
Gemstone Astrology: ये रत्न धारण करते ही होने लगती है पैसो की बरसात, सूर्य जैसे चमक जाती है किस्मत, पलभर में बन जाते है करोड़पति

Gemstone Astrology: ज्योतिष शास्त्र में रत्नों का बहुत सारा महत्वं बताया गया है। रत्नों में अलौलिक शक्ति का समावेश होता है। साथ ही रत्नों में मानव को सुखमय, उल्लासपूर्ण बनाने की अप्रतिम क्षमता है, लेकिन मनुष्य को जन्मकुंडली के पूर्ण विश्लेषण के बाद ही रत्न धारण करना चाहिए। वहीं कभी भी मारक, बाधक, नीच या अशुभ ग्रह का रत्न धारण नहीं करना चाहिए। रत्न हमेशा शुभ ग्रह यदि अस्त है या निर्बल है तो उसका धारण करना चाहिए। ताकि उस ग्रह के प्रभाव को बढ़ाकर शुभ फलों में बढ़ोतरी की जा सके।
ये है 9 रत्न
ज्योतिष शास्त्र में 84 रत्न और उपरत्नों का उल्लेख मिलता है, जिनमें नौ ही रत्न ऐसे हैं जिन्हें नवरत्नों की संज्ञा दी गई है। ये नवरत्न है माणिक्य, मोती, मूंगा, पन्ना, पुखराज, हीरा, नीलम, गोमेद और लहसुनिया।
सुर्य का रत्न है माणिक्य
माणिक्य सूर्य ग्रह का रत्न है। भगवान सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है, इन्हीं के प्रताप से मानव जीवन का विकास होता है। वहीं कुंडली में अगर सूर्य देव कमजोर अवस्था में हो तो मनुष्य को माणिक्य रत्न धारण करना चाहिए।
बीमारियों से मिलती है मुक्ति
माणिक्य पहनकर सूर्य उपासना करने से सूर्य की पूजा का फल दोगुना हो जाता है। माणिक्य धारण करन से सूर्य प्रभावित रोग ह््रदय रोग, आंख के रोग, पित्त विकार रोगों से मुक्ति मिलती है।
इन्हे माणिक्य लाभकारी
-मेष, सिंह और धनु लग्न के जातक माणिक्य धारण कर सकते हैं।
-कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न में माणिक्य साधारण परिणाम देता है।
-अगर जातक को ह््रदय और नेत्र रोग है तो भी वह माणिक्य धारण कर सकता है।
-अगर धन भाव, दशम भाव, नवम भाव, पंचम भाव, एकादश भाव में सूर्य उच्च के स्थित हैं तो भी माणिक्य धारण कर सकते हैं।
इ्रन्हे नही धारण करना चाहिए माणिक्य
-कन्या, मकर, मिथुन, तुला और कुम्भ लग्न के जातकों को माणिक्य धारण करना नुंकसानदायक साबित हो सकता है।
-जन्मकुंडली में सूर्य ग्रह नीच का स्थित है तो भी माणिक्य धारण नहीं करना चाहिए।
-जो मनुष्य शनि और राहु ग्रह से संबंधित व्यापार कर रहे हैं उन्हें भी माणिक्य धारण करने से बचना चाहिए।
यह है विधि
-माणिक्य गुलाबी या लाल रंग का अच्छा माना जाता है।
-माणिक्य का वजन कम से कम 6 से सवा 7 रत्ती का होना चाहिए।
-तांबा या सोने के धातु में माणिक्य को धारण करना सबसे शुभ माना जाता है।
-सूर्योदय होने के एक घंटे बाद माणिक्य रत्न को धारण करें।
-माणिक्य धारण करने से पहिले अंगूठी को गाय के दूध और गंगाजल से शुद्ध कर लें। उसके बाद मंदिर के सामने बैठकर एक माला सूर्य देव के मंत्र ऊं सूर्याय नमः का जाप करें और फिर अंगूठी को धारण करें।
नोट- यह जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। रीवा रियासत न्यूज इसकी पुष्टि नही करता है। विशेषज्ञ से ले सलाह।




