बिज़नेस

Corporate FD: बैंक एफडी से अधिक रिटर्न प्राप्त करने के लिए कॉरपोरेट एफडी में करें निवेश

Corporate FD: बैंक एफडी से अधिक रिटर्न प्राप्त करने के लिए कॉरपोरेट एफडी में करें निवेश
x
Corporate FD: अधिकतर कई बैंकों ने पिछले कुछ सालों में एफडी पर मिलने वाले ब्याज में कटौती की है। ऐसे में कॉरपोरेट एफडी भी एक शानदार विकल्प है.

Why Should You Invest In Corporate FDs?,Corporate FD vs Bank FD: भारत में बैंक या डाकघर की फिक्स्ड डिपाजिट योजना (FD Schemes) एक सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट की तरह काम करती हैं जो पॉपुलर है। जिसमें एक तय अवधि के तहत ब्याज के हिसाब से शानदार रिटर्न दिया जाता है। बैंक या डाकघर एफडी (FD) में निवेशक का पैसा सेफ रहता है वही तय दर पर ब्याज भी प्राप्त होता है। अधिकतर कई बैंकों ने पिछले कुछ सालों में एफडी पर मिलने वाले ब्याज में कटौती की है। ऐसे में कॉरपोरेट एफडी (Corporate FD) भी एक शानदार विकल्प है जहां बैंकों की तुलना में 2 से 3 फ़ीसदी अधिक ब्याज मिल रहा है।

बैंक एफडी (Bank FD)

बैंकों द्वारा बैंक एफडी (Bank FD) जारी की जाती है। डाकघर में टाइम डिपॉजिट स्कीम है। बैंक एफडी में मैच्योरिटी की अवधि 7 दिन से 5 साल और 10 साल तक हो सकती है। डाकघर में 1 साल, 2 साल, 3 साल और 5 साल की एफडी है। इसमें खतरा ना के बराबर होता है। डाकघर (Post Office FD) में पैसा डूबने का कोई भी खतरा नहीं होता है जबकि बैंकों में भी रिस्क नहीं होता है।

कॉरपोरेट एफडी (Corporate FD)

कॉरपोरेट एफडी (Corporate FD) कंपनियों द्वारा जारी की जाती है। कॉरपोरेट एफडी में मैच्योरिटी की अवधि 6 माह से 5 साल या इससे भी अधिक होती है। बैंक एफडी (Bank FD) की तुलना में कॉरपोरेट एफडी में ब्याज दर अधिक होता है लेकिन यह कंपनियों के कारोबार से जुड़ी होती हैं, इसलिए इसमें बैंक की तुलना में रिस्क अधिक होता है। यदि कंपनी डिफाल्ट कर गई तो पैसा डूबने का खतरा बना रहता है। अधिक रेटिंग वाली कंपनियां और मजबूत कंपनियों की एफडी में खतरा कम रहता है। यह बिल्कुल बैंक एफडी की तरह काम करती हैं।

निवेश करने से पहले कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड देखें

कॉरपोरेट एफडी (Corporate FD) में निवेश करने से पहले उस कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड अवश्य देखें। कंपनी का बिजनेस मॉडल सस्टेन करने वाला है या नहीं, मुनाफा शानदार हो रहा है या नहीं, कहीं उस कंपनी में कर्ज बहुत अधिक तो नहीं है। मैनेजमेंट का ट्रैक रिकॉर्ड क्या है, प्रमोटर्स को भरोसा कंपनी पर है या नहीं। पियर्स की तुलना में कंपनी क्या नया कर रही है एवं इनोवेशन के मामले में कंपनी दूसरों से कैसे अलग है।

कमजोर रेटिंग वाली कंपनियों में अधिक होता है रिस्क

कंपनी की क्रेडिट रेटिंग निवेश करने से पहले जरूर देखें AAA या AA या इससे भी शानदार रेटिंग वाली कंपनियां एफडी की सुविधा दे रही हैं तो उनमें निवेश करना चाहिए। कंपनी की रेटिंग जितनी अधिक अच्छी होगी उसमें उतना ही रिस्क कम होगा। कमजोर रेटिंग वाली कंपनियां ब्याज दर अधिक देती हैं लेकिन उनमें खतरा बना रहता है। कॉरपोरेट एफडी छोटी अवधि का शानदार विकल्प है इसमें रिस्क कम होता है।

Shailja Mishra | रीवा रियासत

Shailja Mishra | रीवा रियासत

    Next Story