
ATM Cash Withdrawal 2026: अब ATM से हर निकासी पर कटेंगे इतने रूपये? नया नियम लागू

अब ATM से हर निकासी पर कटेंगे इतने रूपये
Table of Contents
- एटीएम निकासी 2026: आम आदमी की जेब पर आरबीआई का प्रहार
- मेट्रो और नॉन-मेट्रो शहरों के लिए क्या हैं अलग नियम?
- SBI, HDFC, PNB और अन्य बैंकों के नए चार्ज की सूची
- क्यों बढ़ाए गए एटीएम चार्ज? जानें इसके पीछे की असली वजह
- क्या जन धन खाताधारकों को मिलेगी इस चार्ज से राहत?
- एटीएम ट्रांजैक्शन चार्ज से बचने के स्मार्ट और आसान तरीके
- FAQs: आपके सभी महत्वपूर्ण सवालों के जवाब यहाँ हैं।
एटीएम निकासी 2026: आम आदमी की जेब पर आरबीआई का प्रहार
भारत के करोड़ों बैंक खाताधारकों के लिए एटीएम (ATM) से पैसे निकालना अब एक महंगा सौदा साबित हो रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साल 2026 में बैंकिंग सेवाओं की बढ़ती लागत को देखते हुए एटीएम ट्रांजैक्शन पर लगने वाले शुल्कों में वृद्धि कर दी है। अब आपकी फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा समाप्त होते ही हर निकासी पर 23 रुपये तक का चार्ज वसूला जा रहा है। यह नियम न केवल निजी बैंकों बल्कि सरकारी बैंकों पर भी समान रूप से लागू है। महंगाई के इस दौर में मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ की तरह है।
मेट्रो और नॉन-मेट्रो शहरों के लिए क्या हैं अलग नियम?
आरबीआई ने शहरों की श्रेणी के आधार पर फ्री निकासी की सीमा तय की है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे मेट्रो शहरों में ग्राहकों को महीने में केवल 3 फ्री ट्रांजैक्शन की अनुमति है। इसमें फाइनेंशियल (पैसे निकालना) और नॉन-फाइनेंशियल (बैलेंस चेक या मिनी स्टेटमेंट) दोनों शामिल हैं। वहीं, नॉन-मेट्रो या छोटे शहरों में यह सीमा 5 ट्रांजैक्शन की है। इस सीमा को पार करते ही बैंक आपसे प्रति ट्रांजैक्शन शुल्क वसूलना शुरू कर देते हैं।
SBI, HDFC, PNB और अन्य बैंकों के नए चार्ज की सूची
देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (SBI) से लेकर एचडीएफसी और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) तक, सभी ने नए चार्ज लागू कर दिए हैं। फ्री लिमिट के बाद फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर 23 रुपये और जीएसटी (GST) अलग से लगता है। वहीं, बैलेंस इंक्वायरी जैसे नॉन-फाइनेंशियल कामों के लिए 11 रुपये प्लस जीएसटी देना पड़ रहा है। आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक जैसे निजी बैंकों ने भी इसी पैटर्न को अपनाया है, जिससे ग्राहकों में काफी असंतोष देखा जा रहा है।
क्यों बढ़ाए गए एटीएम चार्ज? जानें इसके पीछे की असली वजह
आरबीआई और बैंकों का तर्क है कि एटीएम मशीनों के रखरखाव, सुरक्षा गार्डों का वेतन और सॉफ्टवेयर अपडेट करने की लागत काफी बढ़ गई है। इंटरचेंज फीस (एक बैंक के ग्राहक द्वारा दूसरे बैंक के एटीएम का उपयोग करना) में वृद्धि के कारण बैंकों को यह बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ रहा है। इसके अलावा, सरकार डिजिटल पेमेंट्स और यूपीआई (UPI) को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि कैश का चलन कम हो सके। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में जहां कैश की मांग अधिक है, वहां यह दलील बेअसर साबित हो रही है।
क्या जन धन खाताधारकों को मिलेगी इस चार्ज से राहत?
अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या पीएम जन धन योजना के तहत खुले खातों पर भी यह नियम लागू होंगे। दुखद पहलू यह है कि फ्री लिमिट खत्म होने के बाद इन खाताधारकों को भी नियमों के दायरे में रखा गया है। ग्रामीण भारत में जहां लोग अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए एटीएम पर निर्भर हैं, वहां 23 रुपये का चार्ज उनके दिनभर की कमाई का एक हिस्सा ले जा रहा है।
एटीएम ट्रांजैक्शन चार्ज से बचने के स्मार्ट और आसान तरीके
इस फालतू खर्च से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप यूपीआई (UPI) या इंटरनेट बैंकिंग का ज्यादा इस्तेमाल करें। कोशिश करें कि एक बार में ही महीने भर की जरूरत का कैश निकाल लें ताकि बार-बार एटीएम न जाना पड़े। हमेशा अपने ही बैंक के एटीएम का उपयोग करें, क्योंकि कुछ बैंक अपने ग्राहकों को अधिक फ्री ट्रांजैक्शन की सुविधा देते हैं। इसके अलावा, मोबाइल ऐप के जरिए अपना बैलेंस चेक करें ताकि एटीएम पर नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की लिमिट खराब न हो।
FAQs - एटीएम निकासी और नए बैंकिंग नियमों की पूरी जानकारी
निष्कर्ष: एटीएम से कैश निकालना अब विलासिता जैसा होता जा रहा है। एक जागरूक ग्राहक के रूप में आपको अपनी बैंकिंग गतिविधियों को डिजिटल माध्यमों पर शिफ्ट करना चाहिए ताकि आपकी गाढ़ी कमाई इन छोटे-छोटे चार्जेस में बर्बाद न हो।
Aaryan Puneet Dwivedi
Aaryan Puneet Dwivedi is a senior editor and an experienced journalist who has been active in the news industry since 2013. He has extensive experience covering and editing news across multiple fields, including politics, national and international affairs, sports, technology, business, and social issues. He is a state-level accredited journalist recognized by the Madhya Pradesh government. Known for his in-depth understanding of news and current affairs, he focuses on delivering accurate, reliable, and reader-friendly information across all major news categories.




