बिलासपुर

छत्तीसगढ़ः प्रदेश में अब मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन के जरिए होगी सफाई

Aaryan Dwivedi
16 Feb 2021 6:00 AM GMT
छत्तीसगढ़ः प्रदेश में अब मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन के जरिए होगी सफाई
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बिलासपुरः छत्तीसगढ़ में पांच सितंबर से पहली बार बिलासपुर में मैकेनिकल स्वीपिंग के जरिए सफाई शुरू हो रही है. इसके लिए ठेकेदार ने मशीनों की जांच भी कर ली है. जांच में ठेकेदारों को सबकुछ सही मिला है. शहर में मैकेनिकल स्वीपिंग के जरिए सफाई की जिम्मेदारी जिन ठेकेदारों को सौंपी गई है वे शहर के मुख्य मार्ग, बाजार और गलियों को साफ रखने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. दरअसल, शहर में पहले ही घर-घर से कचरा उठाने का काम ठेकेदार एमएसडब्ल्यू सॉल्यूशन को मिला है. जिसने अपना काम चालू कर दिया है. अब इस कड़ी में दूसरे ठेकेदार भी शामिल होने जा रहे हैं. लॉयन सर्विसेज नाम के ठेकेदार को शहर के अंदर मुख्य मार्ग, बाजार और गलियों की सफाई करनी है. इसके अलावा इन मशीनों द्वारा सड़क, मूर्तियों और डिवाइडर आदि की धूलाई भी की जाएगी. ठेकेदारों के लिए जरूरत के मुताबिक मशीन की व्यवस्था कर दी गई है.

500 कर्मचारियों की भर्ती इसके अलावा उसने 500 कर्मचारियों की भर्ती करने की भी सूचना निगम को दे दी है. अब इस काम के विधिवत्‌ उद्घाटन की जरूरत है. इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के पांच सितंबर को संभावित आगमन की तारीख को चुना गया है. अगले दिन छह सितंबर से पूरे शहर में नए ठेकेदार को सफाई करनी होगी. इसकी तैयारी ठेकेदार ने शहर में शुरू कर दी है. शहर के नेहरू चौक, गांधी चौक के पास ठेकेदार नई मशीनों से धुलाई कर जांच की है. वहीं बड़ी धूल खींचने वाली मशीन को कोनी रोड और महामाया चौक के पास प्रयोग कर देखा गया है. दोनों ही मशीनें जांच में ठीक निकली हैं.

स्वीपिंग मशीन से केवल रात में सफाई ठेकेदार ने जो स्वीपिंग मशीन खरीदी है, वह कई मामलों में बेहतर है. जांच में ठेकेदार ने निगम अमले को इस मशीन से 10 किलो वजनी सामान भी खींचकर दिखाया. इसके अलावा इस मशीन की रफ्तार भी काफी तेज है. यही कारण है कि एक मशीन से ही पूरे शहर के मुख्य मार्गों की सफाई हो जाने का दावा किया जा रहा है. रोड स्वीपिंग मशीन से सफाई केवल रात में होगी. क्योंकि दिन में सड़क किनारे की जगह आठ घंटे खाली नहीं मिलेगी। ठेकेदार को इसी हिसाब से अपने स्टाफ रखने कहा गया है.

एक घंटे में 20 लीटर पेट्रोल की खपत शहर में इससे पहले भी सड़कों की मशीन से सफाई करने के लिए दो स्वीपिंग मशीन खरीदी गई थी. इसकी लागत एक करोड़ 20 लाख रुपये आई थी. कुछ ही समय में मशीन कबाड़ भी हो गई. इसके पीछे कारण यह था कि मशीन से साफ करना बेहद खर्चीला साबित हो रहा था. एक घंटे में ही मशीन में 20 लीटर पेट्रोल की खपत हो रही थी. शहर में फिलहाल 27 वार्डों, मुख्य मार्ग और बाजार की सफाई 20 स्थानीय ठेकेदार कर रहे हैं. इनका ठेका चार सितंबर को समाप्त करने की तैयारी है.

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