
- Home
- /
- मध्यप्रदेश
- /
- भोपाल
- /
- पत्नी की शिकायत : पति...
पत्नी की शिकायत : पति न तो मॉल में शॉपिंग करवाता है और न गहने बनवाता है, पति बोला दिनभर गेम खेलती है, साडी नहीं पहनना नहीं चाहती फिर...

कुटुंब न्यायालय में एक पत्नी ने शिकायत की है कि उसका पति न तो मॉल में शॉपिंग कराता है और न सोने के गहने बनवाता है। उसे मोबाइल और अन्य खर्चे के लिए भी पैसे नहीं देता है। पत्नी ने कुटुंब न्यायालय में भरण-पोषण की मांग की है। काउंसिलिंग में पति ने बताया कि पत्नी फिजूलखर्च करती है। उसे हर खास मौके या त्योहार पर साड़ी और गहने चाहिए।
चार साल पहले विदिशा जिले के वर्धा गांव के किसान परिवार में भोपाल की एमए पास लड़की की शादी हुई। दोनों का दो साल का एक बेटा भी है। शादी के बाद से ही गांव में रहन-सहन को लेकर पति-पत्नी में मनमुटाव चलता रहता था, लेकिन करवाचौथ पर गिफ्ट के तौर पर सोने के गहने की मांग ने घर में भूचाल ला दिया। पत्नी रूठकर मायके चली गई और पति भी उसे लेने नहीं गया।
इसके बाद पत्नी ने कोर्ट में पति के खिलाफ शिकायत कर दी। प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीश योगेश दत्त शुक्ला ने पति-पत्नी को समझाकर एक साथ भेजा और पति को मॉल में शॉपिंग कराने के निर्देश दिए। काउंसलर ने बताया कि पत्नी शहरी परिवेश में रही है, इसलिए वह शहरी रहन-सहन में रहना चाहती है, जबकि पति ग्रामीण परिवेश में संपन्न परिवार का है।
मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलती है
पति ने बताया कि गांव में रोज न तो मॉल ले जा सकता हूं, न मूवी दिखा सकता हूं। घर में इसके लिए पूरी अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध है, लेकिन फिर भी मुझे भोपाल आकर रहने के लिए कहती है, जबकि गांव में पैतृक संपत्ति की देखभाल की जिम्मेदारी मेरी है। पत्नी ऑनलाइन गेम खेलती है, जिससे फिजूलखर्च करती है। साथ ही वह नए-नए स्मार्ट फोन मांगती है। गांव में साड़ी पहनना नहीं चाहती। यह सब शादी से पहले सोचना था कि वह गांव में रह पाएगी या नहीं।
घूंघट रखना संभव नहीं
पत्नी ने बताया कि वह शादी के बाद से गांव में रहने का पूरा प्रयास करती है। उससे हर समय घूंघट रखने के लिए कहा जाता है, जो संभव नहीं है। पति मुझे किसी भी खर्च के लिए पैसे नहीं देते हैं। मेरे गहने लॉकर में रख दिए, अब नए बनवाकर भी नहीं देते हैं। छह माह से मायके में रह रही हूं। कुछ भी खर्च नहीं दे रहे हैं। हर चीज को फिजूलखर्च ही बताते हैं।
इनका कहना है
दोनों के बीच रहन-सहन को लेकर मनमुटाव था, जिसे कई बार की काउंसिलिंग से दूर किया गया और मामले को सुलझाया गया है।
नूरन्निशां खान, काउंसलर, कुटुंब न्यायालय




