भोपाल

पूर्व मंत्री सुरेन्द्र पटवा को चेक बांउस के चार मामलों में 6—6 माह कारावास की सजा, रीवा जिले की अलग-अलग तहसीलों के प्रमाण पत्र लगाए

Aaryan Dwivedi
16 Feb 2021 11:42 AM IST
पूर्व मंत्री सुरेन्द्र पटवा को चेक बांउस के चार मामलों में 6—6 माह कारावास की सजा, रीवा जिले की अलग-अलग तहसीलों के प्रमाण पत्र लगाए
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भोपाल। चैक बांउस के 4 अलग- अलग मामलों में अदालत ने पूर्व मंत्री सुरेन्द्र पटवा के 6-6 माह के कारावास और 45 लाख रूपये जुर्माने की सजा सुनाई है। राजनैतिक मामलों के लिए गठित विशेष अदालत के न्यायाधीश सुरेश सिंह ने यह फैसले सुनाए हैं। हालांकि पटवा को जेल नहीं भेजा गया। चारों मामलों में हाईकोर्ट में अपील करने के लिए एक माह की मोहलत मिल गई है।

चैक बाउंस हो गए थे सुरेन्द्र पटवा के खिलाफ अदालत में 47 चैक बांउस के मामले लंबित हैं। पटवा को पूर्व में भी दो मामलों में सजा हो चुकी है। सुरेन्द्र पटवा ने व्यवसायिक आवश्यकता के लिए इंदौर निवासी संजय जैन से 9 लाख, सारिका जैन से साढे 9 लाख, माया जैन से साढे 6 लाख, और अनीता मित्तल से 5 लाख रूपये अलग- अलग वर्ष 2017 में उधार लिए थे। इसके ऐवज में चारों को चैक दिए थे जो बाउंस हो गए थे।

चारों मामलों में नई जमानत पेश की अदालत ने चारों मामलों में चेक राशि के डेढ गुना जुर्माना लगाया है। फैसले के बाद सुरेन्द्र पटवा की ओर से चारों मामलों में हाईकोर्ट से स्थगन की मोहलत मांग कर चारों मामलों में नई जमानत पेश की।

फर्जी मूल निवासी प्रमाणपत्र लगाकर पीएमटी में पाया दाखिला

भोपाल। एसटीएफ ने फर्जी मूलनिवास प्रमाण पत्र लगाकर वर्ष 2009-10 में पीएमटी प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वाले तीन अभ्यर्थियों समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि तीनों ने जो मूल निवासी पत्र लगाए थे, वह सभी फर्जी हैं। फिलहाल, तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। एसटीएफ को जानकारी मिली कि तीनों अलग-अलग अस्पतालों में पदस्थ हैं।

रीवा जिले की अलग-अलग तहसीलों के प्रमाण पत्र लगाए

एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि पीएमटी प्रवेश परीक्षा 2019 में शिवसिंह, जबकि वर्ष 2010 की प्रवेश परीक्षा में पंकज कुमार सिंह, सुनील सोनकर ने फर्जी मूलनिवासी प्रमाण पत्र लगाकर शासकीय मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। तीनों ने रीवा जिले की अलग-अलग तहसीलों के प्रमाण पत्र लगाए हैं। एसपी राजेश सिंह ने बताया कि जांच शुरू होने के बाद तीनों के प्रमाणपत्र से जुड़ी जानकारी संबंधित तहसीलों से मांगी गई। जहां, इनके नाम के कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं होने की जानकारी दी गई। इसके बाद मामले में एसटीएफ ने केस दर्ज किया।

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