ड्राइवर पिता ने रिश्ते को किया तार-तार, बेटी से दुष्कर्म पर जज दी उम्रकैद की सजा

ड्राइवर पिता रिश्ते की मान-मर्यादा भूल अपनी ही बेटी से दुष्कर्म करता था। इस मामले में उसे विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट ने बुधवार को फैसला

Update: 2021-02-16 06:48 GMT

ड्राइवर पिता ने रिश्ते को किया तार-तार, बेटी से दुष्कर्म पर जज दी उम्रकैद की सजा
जज ने मनुस्मिति श्लोक पढ़ कहा-अपराधी चाहे कोई हो, वह है दण्डनीय

उज्जैन। ड्राइवर पिता रिश्ते की मान-मर्यादा भूल अपनी ही बेटी से दुष्कर्म करता था। इस मामले में उसे विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई हैं। साथ ही उसे 2500 रूपए के अर्थदण्ड से भी दण्डित किया है। विशेष न्यायाधीश डाॅ. आरती शुक्ला पाण्डेय ने पहले मनुस्मिति श्लोक पढ़ा, फिर उसका हिन्दी अनुवाद बताया फिर सजा सुना दी। इस मामले में अभियोजन ने रेयरेस्ट आॅफ रेयर केस करार देते हुए मृत्युदण्ड दिए जाने की अपील की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो उप संचालक अभियोजन डाॅ. साकेत व्यास ने बताया कि 6 अप्रैल 2019 को 11 साल की बच्ची ने चिमनगंज मंडी थाने में अपने ही पिता के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि पिता पेशे से ड्राइवर हैं। वह अपनी गाड़ी लेकर समय-समय पर बाहर जाते रहते हैं।

एक दिन वह घर के कमरे में अकेली बैठी हुई थी। उसी दरम्यान उनके पिता ने उसके साथ दुष्कर्म किया। यह सिलसिला 5 से 6 महीनों तक चलता रहा। बेटी ने जब इसका विरोध किया तो उसे मारने-पीटने की धमकी दी। पिता के डर के कारण इस बात को उसने अपनी मां से भी नहीं बताया। जब एक दिन पेट में दर्द हुआ तो मां को पूरे वाक्ये की जानकारी हुई।

मां के साथ बेटी थाने पहुंच दर्ज कराई रिपोर्ट

पिता के कुकर्म की जानकारी जब मां को हुई तो उसने बेटी को थाने ले जाकर पूरे मामले की जानकारी पुलिस में दी। पुलिस ने बेटी एवं मां के बयान के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की। जिसमें दुष्कर्म, पास्को एक्ट सहित अन्य धाराएं शामिल हैं।

जज ने सुनाया मनुस्मिति श्लोक

विशेष न्यायाधीश डाॅ. आरती शुक्ला पाण्डेय ने फैसला सुनाने से पहले मनुस्मिति का एक श्लोक सुनाया। साथ ही उन्होंने हिन्दी अनुवाद भी बताया।

पिताचार्य: सुह्न्माताभार्यापुत्र: पुरोहित:।

नादण्डयोनामरोज्ञास्ति य: स्वधर्मे न तिष्ठति।।

श्लोक का हिन्दी अर्थ है.. अपराध जो भी करें वह अश्वय दण्डनीय हैं फिर चाहे पिता, माता, गुरू, पत्नी, मित्र या फिर चाहे गुरू ही क्यों न हो।

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