रीवा : हादसे में अधिकांश यात्रियों के सिर-लीवर फटने से हुई मौत, जीवन-मौत से जूझ रहा शंकर...
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रीवा. जिले के गुढ़ में बस हादसे के दौरान चीखपुकार और मौत के तांडव का सच अब कागजों पर आने लगा है। वाहनों की भिंड़त इस कदर है कि उसके धक्के से मृतकों के लीवर और सिर फट गए। जिससे मौके पर ही मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट बता रही कि सबसे ज्यादा सिर और लीवर फटने के साथ भीतरी हिस्से में गहरी चोटें पहुंचने से मौतें हुईं। सडक़ हादसे में दुर्घटना स्थल से लेकर अस्पताल पहुंचने के बीच ९ यात्रियों की मौत हो गई थी। हादसे के दूसरे दिन भी एक घायल सर्जरी आइसीयू में जीवन मौत संषर्ष कर रहा है।
पेट में धक्के लगने से लीवर फट गया संजय गांधी अस्प्ताल में पांच सदस्यीय डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने हादसे में मारे गए यात्रियों का पोस्टमार्टम किया। चिकित्सकों के पैनल की रिपोर्ट के मुताबिक दस माह के वैभव को पेट पर धक्के लगने के कारण लीवर फट गया। मां की गोद में सफर के दौरान बैठे वैभव को हादसे के दौरान मां शिवानी ने आंचल में छिपाने की कोशिश की। लेकिन बस की बेलगाम रफ्तार के आगे मां की मामता भी घुंटने टेक दी। दरअसल टकराहट इतनी तेज थी कि शिवानी के सिर में चोटें ज्यादा रहीं। जबकि वैभव के पेट पर ज्यादा चोट आई।
जिंदगी का केस हजार गए अशोक इसी तरह हादसे में मारे गए हिनौता के निवासी अशोक सिंह के गर्दन में अधिक चोटें रहीं। बाया पैर टूट गया था। पूरे शरीर में गंभीर चोटें आयी हैं। एसजीएमच के वार्ड में बेड पर तड़प रहे सीधी के कपिल चुंगवानी को भीतरी चोटें हैं। कमर में अधिक चोट के कारण परिजन नागपुर के लिए रेफर कराकर चले गए। इसी तरह मृतक शांति रजक के साथ घायल अंजू मालवीय को जलबपुर के लिए रेफर कर दिया गया है।
सर्जरी आइसीयू में जीवन-मौत से जूझ रहा शंकर हादसे के दूसरे दिन भी सर्जरी विभाग के आइसीयू में शंकर मिश्र नाम का यात्री जीवन मौत से जूझ रहा है। हादसे के दौरान सिर में गहरे चोटें आई हैं। चेहरे पर बस के धक्के लगने से गंभीर चोट है। जिससे दूसरे दिन भी कुछ बोल नहीं सका। दुर्घटना से आकस्मिक चिकित्सा में पहुंचने के दौरान नाम शंकर मिश्र बताया था। चिकित्सकों ने बताया कि पहले दिन की अपेक्षा सेहत में मामूली सुधार है।
घायलों के आंखों में दूसरे दिन भी मंडरा रहा हादसे में मौत के तांडव का मंजर रीवा-सिंगरौली हाइवे पर सडक़ हादसे के बाद संजय गांधी अस्पताल के विभिन्न वार्ड में बेड पर दुर्घटना के दर्द से कराह रहे कई घायालों के सिर में अभी भी मौत का तांडव मंडरा रहा है। दूसरे दिन दोपहर चिकित्सकों ने अकांक्षा को रेफर कर दिया। अकांक्षा के पैर में गहरी चोटें आई हैं। व्हीलचेयर पर बैठते ही अकांक्ष कहती हैं कि हादसा भूले नहीं भुला रहा है। वहीं पृथ्वीराज सिंह दर्द की पीड़ा से कराह रहे थे। उनके दायीं पसली में गंभीर चोटें आई हैं।