मकर संक्रांति 2026 पर रीवा में कई जगह लगेंगे भव्य मेले: क्योटी जलप्रपात में 4 दिन का आयोजन, सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम
रीवा में मकर संक्रांति पर मंदिरों, जलप्रपातों और नदी तटों पर मेले लगेंगे। क्योटी में 4 दिन का मेला, महामृत्युंजय मंदिर और अन्य स्थलों पर भी तैयारियां तेज।
- रीवा में मकर संक्रांति की तैयारियां तेज
- मंदिरों, जलप्रपातों और नदी तटों पर लगेंगे मेले
- क्योटी जलप्रपात में 4 दिन का भव्य आयोजन
- सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर प्रशासन का फोकस
मध्यप्रदेश के रीवा जिले में मकर संक्रांति को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस साल त्योहार का आयोजन 14 और 15 जनवरी को होगा। प्रशासन और स्थानीय आयोजन समितियां मंदिरों, जलप्रपातों और नदी तटों पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक मेलों की रौनक दिखने लगी है और श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।
महामृत्युंजय मंदिर में एक दिन का भव्य मेला
किला परिसर स्थित महामृत्युंजय मंदिर में परंपरा के अनुसार इस बार भी भव्य एक दिवसीय मेला लगेगा। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, दान-पुण्य के साथ-साथ खाने-पीने और पारंपरिक खरीदारी की दुकानें सजनी शुरू हो गई हैं। सफाई और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
क्योटी जलप्रपात में 4 दिन का मेला
जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों— क्योटी जलप्रपात, देवतालाब, बसामन मामा, चिन्नईधाम, लक्ष्मणबाग और कोठी कंपाउंड में भी मेले लगेंगे। खासतौर पर क्योटी जलप्रपात में चार दिवसीय मेला आयोजित होगा। भीड़ नियंत्रण, पार्किंग और सुरक्षा के लिए पुलिस-प्रशासन की टीम तैनात रहेगी। मेला शुरू होने से पहले वरिष्ठ अधिकारी मौके का निरीक्षण करेंगे।
नदी तटों पर भी जुटेंगे श्रद्धालु
चोरहटा थाना क्षेत्र के मध्यपुर गांव में करियारी नदी के तट पर लगने वाले मेले की तैयारियां भी जारी हैं। यहां साफ-सफाई और दुकानों की व्यवस्थित लाइनिंग कराई जा रही है। पुलिस ने स्थानीय लोगों से शांति और नियमों का पालन करने की अपील की है।
इन जगहों पर रहेगी विशेष निगरानी
भीड़भाड़ को देखते हुए प्रशासन ने कई स्थानों को चिन्हित किया है, जिनमें शामिल हैं — खंभे माता मंदिर, पुरवा जलप्रपात, बसामन मामा, क्योटी जलप्रपात, देवरा कोठार, चिन्नईधाम, लक्ष्मणबाग, रानी तालाब, बहुती जलप्रपात, अष्टभुजी माता, देवतालाब जलप्रपात, नईगढ़ी, मोहनिया टनल, भैरवनाथ मंदिर, चिरहुलानाथ और महामृत्युंजय मंदिर। इन सभी जगहों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतज़ाम रहेंगे।
तिल-गुड़, झूले और पारंपरिक रौनक
संक्रांति के मेलों में तिल-गुड़ के पकवान, दान-पुण्य और पारंपरिक खरीदारी का खास महत्व रहता है। बच्चे झूलों और खिलौनों का आनंद लेते हैं, जबकि बड़े दर्शन-पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। त्योहार के पहले ही जिले में उत्सव जैसा माहौल बन गया है।
FAQs — मकर संक्रांति रीवा
रीवा में सबसे बड़ा मेला कहाँ लगता है?
क्योटी जलप्रपात और महामृत्युंजय मंदिर के मेलों में सबसे ज्यादा भीड़ रहती है।
क्या प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाई है?
हाँ — भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक और सफाई के लिए अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया जाएगा।
त्योहार कब मनाया जाएगा?
मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी को मनाई जाएगी।