महाराष्ट्र में 50-50 के चक्रव्यूह में फंसी BJP! Shivsena ने मांगा CM का पद

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Update: 2021-02-16 06:10 GMT

मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार बनाने के लिए शिवसेना ने बीजेपी के सामने शर्त रखी है. उद्धव ठाकरे (Uddhav thackeray) ने बीजेपी को दो टूक कह दिया है कि फिफ्टी-फिफ्टी फॉर्मूले (50-50 Formula) पर बीजेपी पहले सहमति बनाए और उसके बाद ही प्रदेश में शिवसेना, बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने पर फैसला लेगी. महाराष्ट्र में शिवसेना के 56 विधायकों की बदौलत ही बीजेपी की सरकार बनना संभव है. 288 विधायकों वाली सूबे की विधानसभा में बीजेपी अपने दमपर सरकार बनाने के लिए बहुमत के आंकड़े से कोसों दूर है.

बीजेपी के 105 विधायक चुने गए हैं. जबकि सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा यानी मैजिक फीगर 145 है. शिवसेना के 56 विधायकों के समर्थन से बीजेपी की सत्ता मे दोबारा वापसी सुनिश्चित हो सकती है. शिवसेना ने फिफ्टी-फिफ्टी का फॉर्मूला का पासा फेंककर महाराष्ट्र में नई सरकार गठन का इंतजार फिलहाल लंबा कर दिया है.

फिफ्टी-फिफ्टी फॉर्मूला दरअसल क्या है? शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे फॉर्मूले पर अडिग हैं लेकिन खुलकर नहीं बोल रहे. दरअसल, इस फॉर्मूले के तहत शिवसेना की झोली में मुख्यमंत्री कुर्सी का बीजेपी का वादा है. मुख्यमंत्री पद ढाई साल शिवसेना के पास होगा, और बचे हुए ढाई साल में महाराष्ट्र की सरकार के मुखिया बीजेपी के देवेंद्र फड़णवीस होंगे.

इस फॉर्मूले के तहत उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री कुर्सी पर बिठाने के सपने संजोकर बैठे हैं. आदित्य ठाकरे मुंबई की वर्ली सीट से विधायक भी बन गए हैं. इस फार्मूले में शिवसेना मंत्रिमंडल में पचास फीसदी हिस्सेदारी की मांग कर रही है. फॉर्मूले के तहत सूबे के मलाईदार मंत्रालयों की फिफ्टी-फिफ्टी हिस्सेदारी की उद्धव ठाकरे की मांग है.

शिवसेना ने गृह, वित्त, राजस्व, शहरी विकास, वन और शिक्षा मंत्रालय मांगा है. मुख्यमंत्री कुर्सी पहले कार्यकाल मे न मिलने की स्थिति मे डिप्टी चीफ मिनिस्टर और साथ मे गृहमंत्री कुर्सी और राजस्व, वित्त, शहरी विकास, शिक्षा, कृषि मंत्रालयों जैसे अहम मलाईदार मंत्रालयों की मांग कर रही है. शिवसेना इस फॉर्मूले के तहत अपने राज्य मंत्रियों के लिये भी अहम मलाईदार मंत्रालयों की शर्त पर अड़ी हुई है. फिफ्टी-फिफ्टी फॉर्मूले के तहत शिवसेना प्रदेश मेँ अहम सरकारी महामंडलों पर भी आधी हिसेदारी की मांग अड़ी हुई है. बीजेपी की परेशानी बढ़ी हुई है. एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार जैसे राजनीतिक पैंतरेबाजी से भी प्रदेश का बीजेपी नेतृत्व फूंकफूकर कदम उठा रहा है. खुद अमित शाह उद्धव ठाकरे को मनाने मे लगे हैं.

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