RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, EMI नहीं बढ़ेगी

RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा, EMI नहीं बढ़ेगी, महंगाई और ग्लोबल हालात को देखते हुए लिया गया फैसला।

Update: 2026-04-08 07:56 GMT

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए वित्त वर्ष की पहली मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर को 5.25% पर बरकरार रखा है। इसका सीधा असर यह होगा कि आम लोगों की EMI नहीं बढ़ेगी और लोन महंगे नहीं होंगे।

रेपो रेट 5.25% पर स्थिर, EMI में राहत

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 8 अप्रैल को हुई मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिलहाल ब्याज दर में बदलाव नहीं किया गया है। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वालों को राहत मिलेगी।

इससे पहले फरवरी 2026 की बैठक में भी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था।

2025 में 4 बार कटौती, कुल 1.25% की कमी

RBI ने साल 2025 में चार बार रेपो रेट में कटौती की थी, जिससे ब्याज दर 6.5% से घटकर 5.25% पर आ गई थी।

  • फरवरी 2025: 6.5% से घटकर 6.25%
  • अप्रैल 2025: 0.25% की और कटौती
  • जून 2025: 0.50% की बड़ी कटौती
  • दिसंबर 2025: 0.25% घटकर 5.25%

यह कटौती करीब 5 साल बाद शुरू हुई थी और इससे लोन सस्ते हुए थे।

क्यों नहीं बदली ब्याज दर?

RBI के अनुसार, महंगाई को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। खराब मौसम और बेमौसम बारिश की वजह से खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा है।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव, खासकर पश्चिम एशिया में स्थिति, सप्लाई चेन को प्रभावित कर रही है। इसी वजह से RBI ने फिलहाल 'रुको और देखो' (Wait and Watch) की नीति अपनाई है।

गवर्नर संजय मल्होत्रा के प्रमुख बयान

RBI गवर्नर ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक हालात चुनौतीपूर्ण हैं। ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय तनाव से आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि RBI लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाएगा।

हर दो महीने में होती है MPC की बैठक

मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में कुल 6 सदस्य होते हैं, जिनमें 3 RBI और 3 केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं। यह समिति हर दो महीने में बैठक करती है और ब्याज दरों पर फैसला लेती है।

वित्त वर्ष 2026-27 में MPC की कुल 6 बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें पहली बैठक 6-8 अप्रैल के बीच आयोजित की गई।

रेपो रेट क्या है और इसका असर?

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर RBI बैंकों को लोन देता है। जब यह दर कम होती है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वे ग्राहकों को भी कम ब्याज पर लोन देते हैं।

इसके उलट जब रेपो रेट बढ़ता है, तो लोन महंगे हो जाते हैं और EMI बढ़ जाती है।

महंगाई और इकोनॉमी पर असर

RBI रेपो रेट का इस्तेमाल महंगाई को नियंत्रित करने के लिए करता है। जब महंगाई बढ़ती है, तो ब्याज दर बढ़ाकर बाजार में पैसे का प्रवाह कम किया जाता है।

वहीं, आर्थिक मंदी के समय दरों को घटाकर खर्च और निवेश को बढ़ावा दिया जाता है।

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