मध्य प्रदेश में Kamal Nath सरकार का बचना लगभग मुश्किल, जानें आगे के समीकरण
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MP Govt Crisis कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे Jyotiraditya Scindia द्वारा पार्टी से इस्तीफा देने के बाद Madhya Pradesh में जारी Political Crisis ने नया मोड़ ले लिया है। सिंधिया का इस्तीफा होने के बाद ही उनके गुट के 19 विधायकों और मंत्रियों ने भी सरकार से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद विधानसभा में पहले ही परेशानियों का सामना कर रही Kamalnath सरकार के सामने अब वर्चस्व का संकट पैदा हो गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर है कि कमलनाथ अपनी सरकार को बचाने के लिए क्या करते हैं। हालांकि, वर्तमान हालातों को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि कमलनाथ सरकार का बचना मुश्किल है लेकिन फिर भी आखिर तक कुछ नहीं कहा जा सकता।
अगर नजर डालें प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस सरकार पर तो उनकी हालत खराब है। सिंधिया और उनके विधायकों के इस्तीफे के बाद आब आगे क्या समीकरण बन सकते हैं हम उन्हीं का एक अनुमानिक खांका आपके लिए लाए हैं।
अभी ये है स्थिति फिलहाल विधानसभा में 230 सीटें हैं लेकिन दो रिक्त सिटों के कारण प्रभावी संख्या 228 है। इस हिसाब से सदन में बहुमत के लिए 115 विधायकों का समर्थन चाहिए।
जहां तक सत्ता पक्ष की बात है तो 19 विधायकों के इस्तीफे के पहले तक उसके पास 121 विधायक थे जिनमें 114 खुद के, 2 बसपा के, 4 निर्दलीय और 1 सपा का था। वहीं विपक्षी दल भाजपा के पास 107 विधायक थे।
अब 19 विधायकों द्वारा कांग्रेस सरकार से इस्तीफा देने के बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ जाएगी। वो ऐसे कि 19 विधायकों के इस्तीफे के बाद सदन में प्रभावी संख्या 211 होगी और इस हिसाब से बहुमत के लिए 106 विधायक चाहिए होंगे जबकि कमलनाथ सरकार के पास केवल 102 विधायक ही रहेंगे। इसमें भी अगर सरकार के साथ खड़े 4 निर्दलीय विधायक अपना समर्थन खींच लेते हैं तो कमलनाथ सरकार के पास केवल 98 विधायक ही बचेंगे। वहीं इस बीच कांग्रेस के बिसाहु लाल सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया है। इसके बाद और भी कांग्रेस विधायक भाजपा में आ सकते हैं।
अब बात भाजपा की करें तो प्रभावी संख्या के अनुसार बहुमत की बात करें तो भाजपा के पास 107 विधायक हैं और इस हिसाब से पार्टी सरकार बनाने में सक्षम है। अगर भाजपा को 4 निर्दलीय समर्थन दे देते हैं तो यह आंकड़ा 111 हो जाएगा। लेकिन यह तभी संभव होगा जब कमलनाथ सरकार गिरती है।
कांग्रेस भी कर रही दावे हालांकि, इस बीच कांग्रेस ना तो 19 विधायकों के इस्तीफे की पुष्टि कर रही है वहीं यह भी मानने को तैयार नहीं है कि वो संकट में है। दूसरी तरफ उसके नेताओं का यह भी दावा है कि पार्टी के संपर्क में कुछ भाजपा विधायक हैं। वहीं दूसरी तरफ बेंगलुरु में रहकर इस्तीफा देने वाले विधायकों में भी फूट का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इसकी कोई पुष्टि नहीं है। अगर कांग्रेस अपने साथ कुछ कांग्रेस विधायकों को रोक पाती है तो वर्तमान प्रभावी संख्या के हिसाब से सरकार बनाए रख सकेगी। कांग्रेस नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि विधायक दल की बैठक के बाद साबित हो जाएगा कि उनके पास बहुमत का नंबर है।