स्कूलों में जन-गण-मन से पहले वंदे मातरम अनिवार्य, राष्ट्रगीत के सभी 6 पैरा गाना जरूरी; सभी सरकारी दफ्तरों के अलावा यहां भी लागू होगा...

केंद्र सरकार ने वंदे मातरम् को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और औपचारिक समारोहों में पूरे 6 अंतरे 3 मिनट 10 सेकेंड तक गाए जाएंगे। जानिए नया प्रोटोकॉल, कब और कहां अनिवार्य होगा।

Update: 2026-02-11 12:04 GMT

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वंदे मातरम् – नया प्रोटोकॉल

  • राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रगीत गाए/बजाए जाएंगे
  • सामूहिक रूप से पूरे छह पैराग्राफ गाए/बजाए जाएंगे
  • अवधि – 3 मिनट 10 सेकेंड (190 सेकेंड)
  • राष्ट्रगान की तरह सावधान मुद्रा में खड़े रहना अनिवार्य

कब-कब गाया जाएगा राष्ट्रगीत:

  • राष्ट्रध्वज परेड में लाते समय
  • तिरंगा फहराते समय
  • राष्ट्रपति के आगमन पर
  • राष्ट्रपति के संबोधन से पहले और बाद में
  • राज्यपाल/उपराज्यपाल समारोह
  • सिविलियन अवॉर्ड समारोह (भारत रत्न, पद्म पुरस्कार)
  • स्कूलों में कार्य प्रारंभ से पहले

Vande Mataram New Guidelines को लेकर केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को सरकारी कार्यक्रमों, औपचारिक आयोजनों और सभी स्कूलों में अनिवार्य रूप से बजाया या गाया जाएगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ था, जिसकी जानकारी बाद में सार्वजनिक हुई। पहली बार राष्ट्रगीत के लिए इतना विस्तृत प्रोटोकॉल निर्धारित किया गया है।

📌 Quick Explainer

अब हर औपचारिक कार्यक्रम में पूरे 6 अंतरे 3 मिनट 10 सेकेंड तक गाए जाएंगे और सभी को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा।

क्या है नया आदेश?

नए National Song Protocol India के अनुसार यदि राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान एक साथ गाए जाएं तो पहले वंदे मातरम् प्रस्तुत किया जाएगा। इसके सभी छह अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड होगी। पहले आमतौर पर केवल दो अंतरे गाए जाते थे। अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सामूहिक रूप से पूर्ण संस्करण गाया जाएगा।

कहां-कहां होगा अनिवार्य?

School Assembly National Song नियमों के तहत सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत से होगी। इसके अलावा तिरंगा फहराने, राष्ट्रपति या राज्यपाल के आगमन, उनके संबोधन से पहले और बाद में, और पद्म पुरस्कार जैसे Civilian Award Ceremony में वंदे मातरम् अनिवार्य रूप से गाया जाएगा।

वंदे मातरम् के बारे में

  • रचयिता: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय
  • प्रकाशन: 1882, आनंदमठ उपन्यास
  • 1896: कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार सार्वजनिक गायन
  • 1950: राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकृति

सिनेमा हॉल में क्या नियम?

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि Cinema Hall Rules इस नए आदेश के दायरे में नहीं आएंगे। फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम् बजाना अनिवार्य नहीं होगा। यदि किसी डॉक्यूमेंट्री या न्यूजरील के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजता है, तो दर्शकों को खड़ा होना जरूरी नहीं होगा।

🇮🇳 वंदे मातरम् मूल राष्ट्रगीत 🇮🇳

वंदे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम्
शस्य श्यामलां मातरम्।
वंदे मातरम्।

शुभ्र ज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,
फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्।
वंदे मातरम्।

कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,
अबला केन मां तुमि एतो बले,
बहुबल धारिणीं नमामि तारिणीं,
रिपुदलवारिणीं मातरम्।
वंदे मातरम्।

तुमि विद्या, तुमि धर्म, तुमि हृदि, तुमि मर्म,
त्वं हि प्राणाः शरीरे,
बाहुते तुमि मां शक्ति,
हृदये तुमि मां भक्ति,
तोमारइ प्रतिमा गढ़ि
मंदिरे-मंदिरे मातरम्।
वंदे मातरम्।

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरण धारिणी,
कमला कमलदल विहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी,
नमामि त्वाम्।
नमामि कमलाम्, अमलाम्, अतुलाम्,
सुजलां सुफलां मातरम्।
वंदे मातरम्।

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,
धरणीं भरणीं मातरम्।
वंदे मातरम्।

इतिहास और महत्व

Bankim Chandra Chattopadhyay द्वारा 1875 में रचित यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जन-जन का नारा बना। 1896 में कांग्रेस अधिवेशन में इसे सार्वजनिक रूप से गाया गया। 1950 में इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला। ‘वंदे मातरम्’ का अर्थ है – हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं।

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FAQs

1. क्या अब सभी स्कूलों में वंदे मातरम् गाना अनिवार्य है?

हाँ, नए आदेश के अनुसार दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत से होगी।

2. क्या सिनेमा हॉल में भी नियम लागू होंगे?

नहीं, सिनेमाघरों को इस आदेश से बाहर रखा गया है।

3. कितने समय तक गाया जाएगा?

पूरे छह अंतरे, कुल 3 मिनट 10 सेकेंड।

4. राष्ट्रगान से पहले या बाद में?

यदि दोनों साथ हों तो पहले वंदे मातरम् गाया जाएगा।

5. क्या खड़ा होना अनिवार्य है?

हाँ, सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा।

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