लापरवाही पडे़गी भारी, पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज हो सकता है प्रकरण, जानिए क्या है कानूनी अधिकारी
कई बार ऐसा देखने में आता है कि एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने जाने वाले फ़रीदारियो की एफआईआर दर्ज करना तो दूर पुलिस शिकायती आवेदन तक लेने से मना कर देती है।
दिल्ली- कई बार ऐसा देखने में आता है कि एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने जाने वाले फ़रीदारियो की एफआईआर दर्ज करना तो दूर पुलिस शिकायती आवेदन तक लेने से मना कर देती है। ऐसा करने के पीछे या पुलिस का निजी स्वार्थ निहित होता है या फिर संबंध। कारण चाहे जो भी हो अगर कोई फरियादी थाने अपने मामले की शिकायत करने जाता है तो पुलिस एफआईआर दर्ज करने से मना नहीं कर सकती।
अगर ऐसा करती है तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ तक एफआई आर दर्ज कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में कहा है कि गंभीर मामलों में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज न करने और जांच मंे कोताही बरतने वाले जांच अधिकारी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए। भारती दंड संहिता की धारा 166ए में लापरवाही के संबंध में प्रावधान दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्टेट ऑफ़ मप्र के मामले में पारित निर्णय में इस संबंध में विस्तृत व्याख्या की है।
न्यायालय में जाने का विकल्प
अगर थाने में फरियादी की एफआईआर दर्ज नहीं की जाती तो आवेदक को को जिले के पुलिस अधीक्षक को आवेदन देना चाहिए। पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को आवेदन देने के बाद भी अगर एफआईआर दर्ज नहीं होती तो सीआरपीसी के सेक्शन 156, 3 के तहत मेट्रोपाॅलिटिन मजिस्ट्रेट के पास इसकी शिकायत की जा सकती है। शिकायत के आधार पर मजिस्ट्रेट पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दे सकती है।
ऑनलाइन एप पर भी दर्ज हो सकती है FIR
थाने की पुलिस अगर एफआईआर दर्ज नहीं करती तो पीड़ित व्यक्ति अपनी शिकायत ऑनलाइन भी रजिस्टर करा सकता है। अपनी शिकायत आनलाइन रजिस्टर करने के लिए आपको अपने एरिया के वेबसाइट पर जाना होगा। यहां जाने के बाद फरियादी अपनी एफआईआर दर्ज करा सकता है।
क्या है एफआईआर
प्रथम सूचना रिपोर्ट, एफआईआर किसी भी घटना के बाद की प्रक्रिया है। एफआईआर में घटना के संबंध में संक्षिप्त विवरण होता है। इसी के आधार पर पुलिस द्वारा मामले की जांच की जाती है। इसलिए आवेदक को बहुत ही सोच समझ कर बिना किसी दबाव के एफअआईआर दर्ज करानी चाहिए। कई बार ऐसा भी देखने में आता है कि पुलिसकर्मी मनमर्जी तरीके से एफआईआर दर्ज कर फरियादी से दस्तखत करा लेता है। अगर आवेदक के कथनानुसार एफआईआर नहीं है तो फरियादी को एफआईआर की काॅपी में दस्तखत नहीं करना चाहिए।